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झारखंड में गैंगस्टरों के आर्थिक साम्राज्य पर प्रहार, पुलिस ने तैयार किया डिजिटल ब्लूप्रिंटअपराध
26 अग॰ 2026, 5:42 pm (2 घंटे पहले)· 1

झारखंड में गैंगस्टरों के आर्थिक साम्राज्य पर प्रहार, पुलिस ने तैयार किया डिजिटल ब्लूप्रिंट

नक्सल अभियानों के बाद झारखंड पुलिस अब संगठित आपराधिक गिरोहों के वित्तीय तंत्र और मददगारों पर शिकंजा कस रही है, जहां 193 गिरफ्तारियों और डिजिटल डेटाबेस के जरिए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना है।

राज्य में नक्सली नेटवर्क पर गहरा प्रभाव डालने के बाद अब झारखंड पुलिस ने संगठित अपराध और आपराधिक गिरोहों की जड़ों पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। पुलिस का ध्यान अब केवल व्यक्तिगत तौर पर अपराधियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गिरोहों के आर्थिक ढांचे, संपत्ति और पर्दे के पीछे काम करने वाले मददगारों के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। इस नए रणनीतिक खाके के तहत रांची समेत पूरे राज्य में पुलिस प्रशासन, आतंकवाद रोधी दस्ते यानी ATS, विशेष पुलिस इकाइयों और सभी जिलों के SP को एक साथ जोड़कर समन्वित अभियान चलाया जा रहा है।

वित्तीय तंत्र और अचल संपत्तियों की गहन जांच

संगठित आपराधिक गिरोहों की सबसे बड़ी ताकत उनकी अवैध कमाई होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क पर नकेल कसने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस की जांच टीमें गैंगस्टरों की चल और अचल संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा जुटा रही हैं। इसके अंतर्गत अपराधियों और उनके सहयोगियों के बैंक खातों, बेनामी संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और निवेश के स्रोतों को खंगाला जा रहा है।

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जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि रंगदारी या अन्य अवैध गतिविधियों से हासिल किया गया धन किस रास्ते से होकर गुजरता है और उसे कहां खपाया जाता है। इस वित्तीय चक्र को तोड़कर पुलिस गिरोहों की आर्थिक ताकत को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। जब तक अपराध से होने वाली कमाई पर रोक नहीं लगेगी, तब तक आपराधिक गतिविधियों पर स्थायी विराम लगाना संभव नहीं है। इसलिए पैसों के लेनदेन की हर कड़ी की कड़ाई से जांच की जा रही है।

जनवरी से जुलाई 2026 के बीच की गई प्रमुख कार्रवाइयां

वर्ष 2026 के शुरुआती सात महीनों यानी जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान झारखंड पुलिस को संगठित अपराध के खिलाफ अभियानों में उल्लेखनीय सफलताएं हासिल हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस समयावधि के दौरान संगठित आपराधिक गिरोहों से संबंध रखने वाले कुल 193 अपराधियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।

गिरफ्तारी के साथ-साथ पुलिस टीमों ने अपराधियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है। बरामदगी के आंकड़ों में 63 अवैध हथियार और 274 जिंदा कारतूस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने और बार-बार अपराध दोहराने वाले तत्वों पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से 50 अपराधियों के विरुद्ध अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी CCA के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है।

क्रिमिनल डेटाबेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण

अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई के लिए झारखंड पुलिस ने एक अत्याधुनिक डिजिटल डेटाबेस विकसित किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य राज्य के अलग-अलग जिलों, ATS और अन्य विशिष्ट पुलिस इकाइयों के पास उपलब्ध बिखरी हुई जानकारियों को एक स्थान पर संकलित करना है।

इस ऑनलाइन डेटाबेस में केवल मुख्य अपराधियों के नाम ही शामिल नहीं हैं, बल्कि उनके साथ जुड़े हर छोटे-बड़े सहयोगी, उनके रिश्तेदारों या करीबियों के बैंक खातों, संपत्तियों और पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी दर्ज की जा रही है। जब किसी घटना के बाद सभी थानों और जांच एजेंसियों को एक ही क्लिक पर पूरी जानकारी उपलब्ध होगी, तो अपराधियों को पकड़ना और उनके नेटवर्क को बेनकाब करना कहीं अधिक आसान हो जाएगा। सूचनाओं के इस साझा प्लेटफॉर्म से पुलिस की कार्यप्रणाली में तेजी और प्रभावशीलता आई है।

अमन साहू गिरोह पर विशेष नजर और सिंडिकेट का विश्लेषण

डिजिटल डेटाबेस के निर्माण और अपराधियों के वर्गीकरण के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य उजागर हुआ है कि चिन्हित किए गए अपराधियों में सबसे अधिक संख्या अमन साहू गिरोह से जुड़ी हुई है। अमन साहू गैंग के नेटवर्क ने राज्य के कई हिस्सों में अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश की थी, जिस पर अब पुलिस का विशेष ध्यान है।

पुलिस की विशेष टीमें अब अमन साहू गिरोह के सक्रिय सदस्यों से लेकर उनके क्षेत्रीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने वाले लोगों और फंडिंग संभालने वालों की सूची तैयार कर रही हैं। गिरोह के मुख्य सरगनाओं के साथ-साथ उनके निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर भी नजर रखी जा रही है ताकि गिरोह को फिर से संगठित होने का कोई अवसर न मिले। पुलिस का मानना है कि इस मुख्य सिंडिकेट को कमजोर करने से राज्य में रंगदारी और गैंगवार की घटनाओं में भारी कमी आएगी।

मददगारों, आश्रयदाताओं और रसद आपूर्ति पर नकेल

संगठित अपराध का दायरा केवल प्रत्यक्ष रूप से हथियार उठाने वाले अपराधियों तक ही सीमित नहीं होता। गिरोह को लंबे समय तक चलाए रखने में उन लोगों की भी बड़ी भूमिका होती है जो उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान करते हैं। झारखंड पुलिस की वर्तमान रणनीति में ऐसे मददगारों की पहचान करना प्राथमिकता में शामिल है।

पुलिस उन व्यक्तियों की सूची तैयार कर रही है जो अपराधियों को छिपने के लिए ठिकाना या आश्रय देते हैं, उन्हें वाहन या हथियार जैसी लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, या फिर कानूनी और आर्थिक सहायता पहुंचाते हैं। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि अपराध में प्रत्यक्ष भागीदारी न होने के बावजूद गिरोह को किसी भी रूप में सहयोग देने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें भी आपराधिक साजिश का हिस्सा मानकर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परंपरागत पुलिसिंग से आगे बढ़कर नेटवर्क ध्वस्त करने का नया मॉडल

झारखंड पुलिस की यह नई कार्यशैली पुरानी परंपरागत पुलिसिंग से काफी अलग है। पहले जहां किसी वारदात के घटित होने के बाद केवल संबंधित अपराधी को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया जाता था, वहीं अब पुलिस घटना के पीछे छिपे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र यानी इकोसिस्टम को खत्म करने पर जोर दे रही है।

नक्सल उन्मूलन अभियान की सफलता के बाद संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ शुरू की गई इस व्यापक रणनीति से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में राज्य के अंदर रंगदारी, ठेकेदारी में वर्चस्व की लड़ाई, गैंगवार और अन्य संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। पुलिस प्रशासन की यह एकीकृत कोशिश राज्य में कानून का शासन स्थापित करने और आम नागरिकों व व्यवसायियों के बीच सुरक्षा की भावना बढ़ाने में सहायक साबित होगी।

सवाल-जवाब

झारखंड पुलिस ने जनवरी से जुलाई 2026 के बीच कितने अपराधियों को गिरफ्तार किया?
पुलिस ने संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया।
इस अभियान के दौरान कितने हथियार और कारतूस बरामद किए गए?
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 63 अवैध हथियार और 274 कारतूस जब्त किए।
कितने अपराधियों के खिलाफ CCA के तहत कार्रवाई की गई है?
पुलिस ने संगठित अपराध में शामिल 50 अपराधियों के खिलाफ CCA के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की है।
डिजिटल डेटाबेस में किस गिरोह के सबसे ज्यादा अपराधी चिन्हित हुए हैं?
डिजिटल डेटाबेस की जांच में सबसे ज्यादा अपराधी अमन साहू गिरोह से जुड़े पाए गए हैं।
झारखंड पुलिस की नई रणनीति का मुख्य फोकस क्या है?
पुलिस का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उनकी चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों और मददगारों के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है।
आपराधिक गिरोहों के खिलाफ किन पुलिस एजेंसियों को जोड़ा गया है?
इस अभियान में एटीएस, विशेष पुलिस टीमों और सभी जिलों के एसपी को एक साथ जोड़ा गया है।
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