उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक अंतरधार्मिक विवाह का मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम युवती ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाकर प्रेमी के साथ विवाह रचा लिया। यह मामला हाथरस की काशीराम कॉलोनी से जुड़ा है, जहां रहने वाली निशा और विजय ने वर्षों के परिचय के बाद एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया। हालांकि, शादी के तुरंत बाद युवती के परिजनों की ओर से कथित तौर पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। इस स्थिति से घबराकर नवविवाहित जोड़े ने पुलिस प्रशासन का रुख किया है और अपने तथा अपने परिवार के लिए सुरक्षा की आधिकारिक मांग की है।
लंबे परिचय के बाद लिया विवाह का फैसला
हाथरस की काशीराम कॉलोनी में रहने वाले निशा और विजय एक-दूसरे को काफी लंबे समय से जानते थे। दोनों के बीच आपसी समझ और लगाव बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने शादी करने का विचार किया। अलग-अलग धर्म से होने के कारण सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों की संभावना थी, लेकिन दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे। युवती निशा ने अपनी इच्छा और मर्जी से मुस्लिम धर्म त्यागकर हिंदू धर्म स्वीकार किया। धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद निशा ने विजय के साथ पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न किया।
सुरक्षा के लिए बनवाया कानूनी शपथ पत्र
विवाह के पश्चात युवती के परिवार के सदस्यों की नाराजगी और कथित धमकियों को देखते हुए दंपति ने विधिक सहायता ली। अधिवक्ता मुकेश चतुर्वेदी के माध्यम से एक औपचारिक शपथ पत्र तैयार कराया गया। इस शपथ पत्र में युवती निशा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसने किसी भी प्रकार के दबाव, डर या बहकावे में आए बिना स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया है। इसके साथ ही उसने विजय के साथ अपनी स्वतंत्र सहमति से हिंदू पद्धति से विवाह किया है। शपथ पत्र में यह भी उल्लिखित है कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से एक साथ रहना चाहते हैं।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार
जान-माल का खतरा जताते हुए नवविवाहित जोड़े ने हाथरस पुलिस और जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित शिकायत कर सुरक्षा की अपील की है। दंपति का कहना है कि युवती के रिश्तेदार उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डाल रहे हैं और उन्हें लगातार डरा-धमका रहे हैं। दंपति ने अधिकारियों से मांग की है कि उनके और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाएं। फिलहाल, प्रेमी युगल को पुलिस-प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत और सुरक्षात्मक कार्रवाई का इंतजार है।
समाज और कानून के परिप्रेक्ष्य में मामला
वर्तमान समय में भी अलग-अलग धर्मों के युवाओं द्वारा शादी का कदम उठाना कई तरह की सामाजिक बंदिशों और पारिवारिक विरोधों से घिरा रहता है। ऐसे मामलों में युवक और युवती को न केवल सामाजिक दबाव झेलना पड़ता है, बल्कि कई बार अपने ही परिजनों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। कानूनन दो वयस्क अपनी सहमति से विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं, परंतु सुरक्षा की अनुपस्थिति में ऐसे जोड़े अक्सर डर के साए में जीने को मजबूर होते हैं। हाथरस का यह मामला एक बार फिर ऐसे अंतरधार्मिक युगलों के सामने आने वाली सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है।





















