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फर्जी बिजली बिल के नाम पर पूर्व सैनिक से 15.5 लाख रुपये ठगे, कंबोडिया और यूएई तक फैला मिला डिजिटल अरेस्ट का गिरोहअपराध
25 अग॰ 2026, 1:09 pm (2 घंटे पहले)· 2

फर्जी बिजली बिल के नाम पर पूर्व सैनिक से 15.5 लाख रुपये ठगे, कंबोडिया और यूएई तक फैला मिला डिजिटल अरेस्ट का गिरोह

दिल्ली के मुनिरका में बिजली बिल के बहाने एक रिटायर्ड सैनिक से 15.5 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। जांच में लुधियाना और जयपुर के रास्ते कंबोडिया तथा यूएई तक जुड़े डिजिटल अरेस्ट गिरोह का खुलासा हुआ।

देशभर में साइबर अपराधी लगातार अपने तरीकों को बदलकर मासूम और सीधे-सादे लोगों को निशाना बना रहे हैं। खासतौर पर बुजुर्गों को डरा-धमकाकर उनकी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई छीनने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली के मुनिरका इलाके से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 78 साल के एक रिटायर्ड आर्मी अफसर से बिजली बिल काटने का फर्जी झांसा देकर 15.5 लाख रुपये ठग लिए गए। इस धोखाधड़ी की जांच में एक ऐसा अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह उजागर हुआ है, जिसके तार पंजाब और राजस्थान से होते हुए कंबोडिया और यूएई में बैठे साइबर अपराधियों तक जुड़े हुए हैं।

बिजली बिल काटने की झूठी कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल

यह पूरी घटना 17 अप्रैल की है, जब मुनिरका में रहने वाले 78 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक अपने घर में विश्राम कर रहे थे। घर पर वे अपनी पत्नी के साथ अकेले रहते थे, जबकि उनकी बेटियां दुबई में रह रही थीं। दोपहर के समय उनके घर के लैंडलाइन फोन की घंटी बजी। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से आवाज आई कि उनके घर का बिजली का बिल जमा नहीं हुआ है और अगर दिए गए नंबर पर तुरंत संपर्क नहीं किया गया तो बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा। बुजुर्ग को यह बात हैरान करने वाली लगी क्योंकि उन्हें अच्छी तरह याद था कि बिल पहले ही भरा जा चुका है। विदेश में रह रही बेटियों को परेशान न करने के इरादे से उन्होंने उस फर्जी नंबर पर खुद ही कॉल मिला दी, जिसके बाद वे साइबर ठगों के बुने जाल में उलझते चले गए।

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डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर बनाया खौफ का माहौल

फर्जी नंबर पर कॉल करते ही जालसाजों ने उन्हें अपनी बातों में घेर लिया। कॉल पर मौजूद ठगों ने खुद को सीबीआई और ईडी का वरिष्ठ अधिकारी बताया। उन्होंने रिटायर्ड सैनिक को डराते हुए कहा कि जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनका नाम सामने आया है। जालसाजों का दावा था कि बुजुर्ग के बैंक खाते का इस्तेमाल कर अवैध रकम विदेश भेजी गई है। फर्जी अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर बुजुर्ग को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से घबराए बुजुर्ग ने ठगों के कहे अनुसार अपने बैंक खाते से 15.5 लाख रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने झांसा दिया था कि जांच पूरी होते ही सारा पैसा उनके खाते में वापस भेज दिया जाएगा।

पुलिस की जांच में खुला अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

दो दिन बीत जाने के बाद भी जब पैसे वापस नहीं आए, तब पीड़ित बुजुर्ग को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और वे पुलिस के पास पहुंचे। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की साइबर पुलिस टीम ने सब-इंस्पेक्टर सोमबीर और इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक की अगुवाई में मामले की तफ्तीश शुरू की। वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करने पर पता चला कि 15.5 लाख रुपये की राशि लुधियाना स्थित एक बैंक के करंट अकाउंट में ट्रांसफर की गई थी। यह खाता 38 साल के सरबजीत नामक व्यक्ति का था। पुलिस टीम तुरंत लुधियाना पहुंची और सरबजीत को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में सरबजीत ने खुलासा किया कि उसने यह खाता सूरज नाम के बिचौलिये को दिया था, जिसने टेलीग्राम ऐप के जरिए नरेश उर्फ लकी से संपर्क कर पूरी अकाउंट किट उसे सौंप दी थी।

कंबोडिया और यूएई तक फैला मिला ठगी के बैंक खातों का नेटवर्क

जांच का दायरा राजस्थान के जयपुर तक पहुंच गया। पूछताछ में सामने आया कि सरबजीत, सूरज और संदीप नाम का एक बैंक कर्मचारी तीनों मिलकर अकाउंट किट देने जयपुर गए थे। संदीप बैंकिंग क्षेत्र में अपने संपर्कों का फायदा उठाकर ऐसे बैंक खाते जुटाता था। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरबजीत, सूरज, संदीप और बाद में नरेश को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। नरेश ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि वह इन बैंक खातों को कंबोडिया और यूएई में मौजूद साइबर फ्रॉड गिरोहों को सप्लाई करता था। हालांकि आरोपी पकड़े जा चुके हैं, लेकिन पीड़ित बुजुर्ग की गाढ़ी कमाई अभी वापस नहीं मिल सकी है। पुलिस पड़ताल में यह भी सामने आया कि लुधियाना के जिस एक खाते में पैसे मंगाए गए थे, उससे जुड़ी 17 अलग-अलग शिकायतें देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज थीं और उनसे करोड़ों रुपये का फ्रॉड किया गया था।

बुजुर्गों को निशाना बना रहे साइबर अपराधी, एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में हर महीने बुजुर्गों के साथ दो से तीन बड़े साइबर फ्रॉड की घटनाएं सामने आ रही हैं। साइबर ठग खासतौर पर उन इलाकों को निशाना बनाते हैं जहां बुजुर्ग अकेले रहते हैं या जिनके बच्चे विदेश में बसे हैं। इससे पहले जनवरी महीने में ग्रेटर कैलाश के एक बुजुर्ग दंपति से 14 करोड़ रुपये और 70 साल की एक महिला से 7 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की जा चुकी है। साइबर एक्सपर्ट्स ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि कोई भी सरकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही आरबीआई या किसी सुरक्षित खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। यदि कोई व्यक्ति फोन न काटने या तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो तुरंत कॉल काटकर पुलिस या बैंक से संपर्क करें।

सवाल-जवाब

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की शुरुआत कैसे हुई?
पीड़ित बुजुर्ग को लैंडलाइन पर बिजली बिल बकाया होने का फर्जी फोन आया था, जिस पर संपर्क करने पर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर डराया।
ठगों ने बुजुर्ग से कितने रुपये की धोखाधड़ी की?
जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पीड़ित से उनके जीवन भर की जमा पूंजी 15.5 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस जांच में इस गिरोह के तार कहां तक जुड़े पाए गए?
जांच में पता चला कि पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर से जुड़े फर्जी बैंक खाते कंबोडिया और यूएई में बैठे साइबर गिरोहों को दिए जाते थे।
सरकारी या पुलिस एजेंसियां जांच के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाती हैं?
कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।
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