दुनिया के दो सबसे बड़े वित्तीय केंद्रों, अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर एक ऐसा साझा रास्ता तय किया है, जिससे स्टेबलकॉइन, टोकनाइज्ड एसेट्स और डिजिटल मनी पर बनने वाले नियम एक-दूसरे के करीब आ सकें। इसका मकसद साफ है, ब्लॉकचेन पर टिकी फाइनेंस को अटलांटिक महासागर के आर-पार, यानी दोनों देशों के बीच, ज्यादा आसानी से चलने देना।
इस दिशा में मंगलवार को कुल 10 सुझाव सामने आए, जिन्हें ब्रिटेन के एचएम ट्रेजरी और अमेरिकी ट्रेजरी ने प्रकाशित किया। ये सुझाव 'ट्रांसअटलांटिक टास्कफोर्स फॉर मार्केट्स ऑफ द फ्यूचर' की ओर से आए हैं। इस टास्कफोर्स को चांसलर रेचल रीव्स और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सितंबर 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप के ब्रिटेन दौरे के दौरान खड़ा किया था।
क्या-क्या शामिल है इन सुझावों में
इन 10 में से पांच सुझाव सीधे डिजिटल एसेट्स से जुड़े हैं, जबकि बाकी पांच पारंपरिक कैपिटल मार्केट को छूते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कोई भी सुझाव बाध्यकारी नियम नहीं है। यानी दोनों देश एक साझा दिशा के तहत आगे बढ़ेंगे, लेकिन अपनी-अपनी नियामक प्रक्रिया अपने हिसाब से पूरी करेंगे।
डिजिटल एसेट्स के मोर्चे पर टास्कफोर्स चाहती है कि नियामक संस्थाएं, यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड, FCA, SEC और CFTC, टोकनाइज्ड एसेट्स को लेकर एक जैसा नजरिया अपनाएं। इसमें यह भी शामिल है कि टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज का सेटलमेंट कैसे अंतिम रूप से पूरा होगा, और क्या स्टेबलकॉइन तथा टोकनाइज्ड मनी मार्केट फंड को क्लियरिंग हाउस में कोलैटरल यानी गिरवी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। सुझावों में यह भी कहा गया है कि एक निजी क्षेत्र की अगुवाई वाला समूह बनाया जाए, जो एक साल तक सीमा पार टोकनाइजेशन के इस्तेमाल को परखे। साथ ही एक ऐसा 'मल्टी-मनी इकोसिस्टम' बने, जहां स्टेबलकॉइन, टोकनाइज्ड बैंक डिपॉजिट और दूसरी डिजिटल मुद्राएं एक साथ मौजूद रह सकें।
स्टेबलकॉइन पर साझा बयान
इन सुझावों के साथ-साथ दोनों सरकारें स्टेबलकॉइन पर एक साझा बयान भी तैयार कर रही हैं। इसमें एक जीवंत और सक्रिय सीमा पार बाजार का समर्थन किया गया है। बयान में कहा गया है कि पेमेंट स्टेबलकॉइन कम से कम एक-के-बदले-एक के आधार पर, यानी पूरी तरह, ऊंची गुणवत्ता वाली तरल संपत्तियों से बैक्ड होने चाहिए। ये सिद्धांत अमेरिका के GENIUS एक्ट से मेल खाते हैं, जो पिछले साल पास हुआ संघीय स्टेबलकॉइन कानून है। पांचवां सुझाव यह कहता है कि दोनों पक्ष इस बात के लिए दबाव बनाएं कि बेसल कमेटी बैंकों के क्रिप्टो एक्सपोजर को किस तरह देखती है, इसकी एक तकनीक के लिहाज से तटस्थ समीक्षा हो।
यूरोप को पकड़ने की होड़
यह तालमेल की कोशिश उस वक्त सामने आई है, जब दोनों देश अपने-अपने ढांचे भी खड़े कर रहे हैं। अमेरिका GENIUS एक्ट को 2027 की प्रभावी तारीख से पहले लागू करने में जुटा है, वहीं ब्रिटेन का अपना क्रिप्टोएसेट ढांचा अक्टूबर 2027 में लागू होना है। दोनों ही यूरोपीय संघ को पकड़ने की कोशिश में हैं, जिसके MiCA नियम 2024 के आखिर से पूरी तरह लागू हैं और जिन्हें 2027 में संशोधित किया जाना है। हालांकि ये सुझाव आपसी मान्यता तक नहीं पहुंचते। इसका मतलब है कि एक देश में लाइसेंस पाए स्टेबलकॉइन को दूसरे देश में काम करने के लिए वहां के नियमों पर भी खरा उतरना होगा।
क्रिप्टो कंपनियों ने किया स्वागत
क्रिप्टो कंपनियों ने इस दिशा का स्वागत किया है। कॉइनबेस में यूरोप के लिए पॉलिसी की प्रमुख केटी हैरीज ने इन सुझावों को 'अटलांटिक के आर-पार सहयोग का एक निर्णायक पल' बताया। उन्होंने कहा कि यह दोनों वित्तीय केंद्रों के लिए 'टोकनाइजेशन के जरिए वैश्विक कैपिटल मार्केट को नए सिरे से गढ़ने' का मौका है।
ब्रिटेन के लिए ये सुझाव दोनों देशों के बीच की रुकावटों को कम करने की उस महत्वाकांक्षा पर आधारित हैं, जिसका जिक्र ट्रेजरी की इकोनॉमिक सेक्रेटरी लूसी रिग्बी ने मई में किया था। तब उन्होंने कहा था कि यह 'किसी न किसी रूप में मान्यता या तालमेल की शक्ल ले सकता है।' रिग्बी ने उस वक्त कहा था कि डिजिटल एसेट्स में देश के बाजारों के 'पूरी तरह कायापलट' की क्षमता है, क्योंकि सरकार स्टेबलकॉइन नियम, FCA की चलाई एक स्टेबलकॉइन सैंडबॉक्स और पारंपरिक तथा टोकनाइज्ड भुगतान के लिए एक साझा ढांचे पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ा रही है।











