हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर (HPC) और फैंटम ने एक संयुक्त पत्र के माध्यम से अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) से अनुरोध किया है कि वे ऑनचेन बाजारों के लिए अपने विनियामक ढांचे में बदलाव लाएं। इन संस्थाओं का मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा नियम मुख्य रूप से पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जहां बिचौलिए या कस्टोडियन संस्थाएं ग्राहकों की संपत्ति पर नियंत्रण रखती हैं। वर्तमान नियमों के तहत, यह ढांचा ऑनचेन प्रोटोकॉल की कार्यप्रणाली के साथ मेल नहीं खाता है, जो सॉफ्टवेयर कोड के माध्यम से चलते हैं।
परंपरागत वित्त बनाम ऑनचेन प्रणाली
पत्र में विस्तार से बताया गया है कि पारंपरिक वित्त में ग्राहकों को एक लंबी बिचौलियों की श्रृंखला पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें एक ब्रोकर ऑर्डर लेता है, एक एक्सचेंज उसे मैच करता है, और अंत में एक क्लियरिंगहाउस व्यापार की सुरक्षा और निपटान सुनिश्चित करता है। इस पूरी प्रक्रिया में मार्जिन जमा करना और हर कदम पर संपत्ति का प्रबंधन किसी तीसरे पक्ष के हाथों में होता है। इसके विपरीत, ऑनचेन बाजार पूरी तरह से अलग तरह से काम करते हैं, जहां स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का उपयोग करके सीधे पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग की जाती है।
नियामक छूट की आवश्यकता
HPC और फैंटम ने आयोग को सुझाव दिया है कि ऑनचेन सॉफ्टवेयर विकसित करने वाले डेवलपर्स को पारंपरिक एक्सचेंजों और क्लियरिंगहाउस पर लागू होने वाली पंजीकरण आवश्यकताओं से छूट मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि कोई डेवलपर ऐसा प्रोटोकॉल बनाता है जिस पर उसका नियंत्रण नहीं रहता, तो उसे एक्सचेंज के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने आयोग से आग्रह किया है कि वे ऐसी स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी करें जिससे CFTC द्वारा विनियमित संस्थाएं ऑनचेन इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर लाभ उठा सकें।
प्रक्रियात्मक सरलता पर जोर
एक महत्वपूर्ण मांग यह भी है कि CFTC फैंटम को दी गई अपनी नो-एक्शन लेटर वाली राहत को एक स्थायी नियम के रूप में तब्दील करे। वर्तमान स्थिति में वॉलेट प्रदाताओं और फ्रंट-एंड डेवलपर्स को हर बार व्यक्तिगत रूप से राहत के लिए आवेदन करना पड़ता है। इसे एक व्यवस्थित नियम बनाने से ऑनचेन बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी और बार-बार के कानूनी अनुरोधों की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। पिछले महीने CFTC और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा जारी सूचना अनुरोध (RFI) के जवाब में यह संयुक्त प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य फिनटेक कंपनियों और विनियमित संस्थाओं के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना है।
उद्योग में विवाद
यह सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब उद्योग के भीतर ही नियमन को लेकर मतभेद गहरा रहे हैं। हाल ही में CME ग्रुप ने CFTC के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। यह कानूनी लड़ाई अमेरिका में परपेचुअल फ्यूचर्स की अनुमति देने को लेकर है, जहां CME ग्रुप चाहता है कि इन उत्पादों को स्वैप के रूप में वर्गीकृत किया जाए, न कि परपेचुअल फ्यूचर्स के रूप में। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि ऑनचेन और पारंपरिक बाजार संरचनाओं के बीच तालमेल बिठाना नियामकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य बना हुआ है।











