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हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर और फैंटम ने CFTC से ऑनचेन मार्केट नियमों को बदलने की मांग कीक्रिप्टो
2 घंटे पहले· 2

हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर और फैंटम ने CFTC से ऑनचेन मार्केट नियमों को बदलने की मांग की

हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर और फैंटम ने नियामक CFTC से आग्रह किया है कि वे पारंपरिक वित्त के पुराने नियमों को डिजिटल ऑनचेन बाजारों पर लागू न करें। उनका कहना है कि कोड पर आधारित विकेंद्रीकृत प्रणालियां कस्टोडियल बिचौलियों से पूरी तरह अलग काम करती हैं।

रविकाश गुप्तारविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर (HPC) और फैंटम ने एक संयुक्त पत्र के माध्यम से अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) से अनुरोध किया है कि वे ऑनचेन बाजारों के लिए अपने विनियामक ढांचे में बदलाव लाएं। इन संस्थाओं का मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा नियम मुख्य रूप से पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जहां बिचौलिए या कस्टोडियन संस्थाएं ग्राहकों की संपत्ति पर नियंत्रण रखती हैं। वर्तमान नियमों के तहत, यह ढांचा ऑनचेन प्रोटोकॉल की कार्यप्रणाली के साथ मेल नहीं खाता है, जो सॉफ्टवेयर कोड के माध्यम से चलते हैं।

परंपरागत वित्त बनाम ऑनचेन प्रणाली

पत्र में विस्तार से बताया गया है कि पारंपरिक वित्त में ग्राहकों को एक लंबी बिचौलियों की श्रृंखला पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें एक ब्रोकर ऑर्डर लेता है, एक एक्सचेंज उसे मैच करता है, और अंत में एक क्लियरिंगहाउस व्यापार की सुरक्षा और निपटान सुनिश्चित करता है। इस पूरी प्रक्रिया में मार्जिन जमा करना और हर कदम पर संपत्ति का प्रबंधन किसी तीसरे पक्ष के हाथों में होता है। इसके विपरीत, ऑनचेन बाजार पूरी तरह से अलग तरह से काम करते हैं, जहां स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का उपयोग करके सीधे पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग की जाती है।

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नियामक छूट की आवश्यकता

HPC और फैंटम ने आयोग को सुझाव दिया है कि ऑनचेन सॉफ्टवेयर विकसित करने वाले डेवलपर्स को पारंपरिक एक्सचेंजों और क्लियरिंगहाउस पर लागू होने वाली पंजीकरण आवश्यकताओं से छूट मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि कोई डेवलपर ऐसा प्रोटोकॉल बनाता है जिस पर उसका नियंत्रण नहीं रहता, तो उसे एक्सचेंज के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने आयोग से आग्रह किया है कि वे ऐसी स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी करें जिससे CFTC द्वारा विनियमित संस्थाएं ऑनचेन इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर लाभ उठा सकें।

प्रक्रियात्मक सरलता पर जोर

एक महत्वपूर्ण मांग यह भी है कि CFTC फैंटम को दी गई अपनी नो-एक्शन लेटर वाली राहत को एक स्थायी नियम के रूप में तब्दील करे। वर्तमान स्थिति में वॉलेट प्रदाताओं और फ्रंट-एंड डेवलपर्स को हर बार व्यक्तिगत रूप से राहत के लिए आवेदन करना पड़ता है। इसे एक व्यवस्थित नियम बनाने से ऑनचेन बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी और बार-बार के कानूनी अनुरोधों की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। पिछले महीने CFTC और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा जारी सूचना अनुरोध (RFI) के जवाब में यह संयुक्त प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य फिनटेक कंपनियों और विनियमित संस्थाओं के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना है।

उद्योग में विवाद

यह सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब उद्योग के भीतर ही नियमन को लेकर मतभेद गहरा रहे हैं। हाल ही में CME ग्रुप ने CFTC के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। यह कानूनी लड़ाई अमेरिका में परपेचुअल फ्यूचर्स की अनुमति देने को लेकर है, जहां CME ग्रुप चाहता है कि इन उत्पादों को स्वैप के रूप में वर्गीकृत किया जाए, न कि परपेचुअल फ्यूचर्स के रूप में। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि ऑनचेन और पारंपरिक बाजार संरचनाओं के बीच तालमेल बिठाना नियामकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य बना हुआ है।

इसका आप पर असर

भारत में: निवेशकों को यह समझना चाहिए कि अमेरिका में नियमों के बदलाव का वैश्विक डिजिटल परिसंपत्ति बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।

व्यापक स्तर पर: यह पहल ऑनचेन ट्रेडिंग के लिए भविष्य में अधिक कानूनी स्पष्टता और सुरक्षा प्रदान कर सकती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए प्रवेश आसान हो सकता है।

सवाल-जवाब

हाइपरलिक्विड पॉलिसी सेंटर और फैंटम CFTC से क्या चाहते हैं?
वे चाहते हैं कि CFTC ऑनचेन सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए पारंपरिक एक्सचेंजों वाली पंजीकरण आवश्यकताओं को समाप्त करे और उन नियमों को अपडेट करे जो कस्टोडियल सिस्टम के लिए बने थे।
पारंपरिक वित्त और ऑनचेन बाजार में क्या अंतर है?
पारंपरिक वित्त में बिचौलिए जैसे ब्रोकर और क्लियरिंगहाउस ग्राहकों की संपत्ति पर नियंत्रण रखते हैं, जबकि ऑनचेन बाजार कोड के माध्यम से पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग की सुविधा देते हैं।
नो-एक्शन लेटर को नियम में बदलने की मांग क्यों की गई है?
ताकि वॉलेट प्रदाताओं को हर बार अलग से राहत मांगने की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और वे विनियमित बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें।
CME ग्रुप ने CFTC के खिलाफ क्यों मुकदमा किया है?
CME ग्रुप अमेरिका में परपेचुअल फ्यूचर्स की मंजूरी को चुनौती दे रहा है और चाहता है कि इन्हें 'स्वैप' के रूप में वर्गीकृत किया जाए।
रविकाश गुप्ता
लेखक के बारे मेंरविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताभारत समाचार, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार, क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट न्यूज़, स्टार्टअप, आर्थिक रुझान, डिजिटल एसेट्स, निवेश अंतर्दृष्टि

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत की ख़बरों, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार और क्रिप्टोकरेंसी को कवर करते हैं। वे आर्थिक रुझानों, क्रिप्टो घटनाक्रमों और दुनियाभर की बड़ी बाज़ार-हलचल वाली घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं।

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत-केंद्रित रिपोर्टिंग और बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार व क्रिप्टोकरेंसी की वैश्विक कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, आर्थिक घटनाक्रम, कॉर्पोरेट मामले, शेयर बाज़ार, ब्लॉकचेन नवाचार और आधुनिक वित्तीय तंत्र को आकार देने वाले डिजिटल एसेट रुझान कवर करते हैं। स्पष्टता, विश्लेषण और समय पर रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ रविकाश वैश्विक आर्थिक बदलावों, उभरती तकनीकों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और बदलते क्रिप्टो परिदृश्य की अंतर्दृष्टि देते हैं। उनका काम व्यापक आर्थिक रुझानों को वास्तविक बाज़ार असर से जोड़ता है और पाठकों को पारंपरिक वित्त व डिजिटल एसेट्स की तेज़ी से बदलती दुनिया — दोनों समझने में मदद करता है।

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