क्रिप्टो बाजार की सुस्ती और XRP पर इसका असर
बीते आठ महीनों से डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में छाई मंदी ने रिपल के टोकन XRP को भी अपनी चपेट में ले लिया है। अक्टूबर 2025 में क्रिप्टो बाजार को लगे बड़े झटके के बाद से यह पूरा क्षेत्र अपनी पुरानी रफ्तार हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। साल 2025 में शानदार तेजी दिखाने वाले XRP की चमक अब कुछ फीकी पड़ती दिख रही है। लगातार जारी दबाव के कारण इसका कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) गिरकर लगभग 72 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में बाजार के जानकार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह टोकन फिर से अपनी पुरानी चमक हासिल कर पाएगा और क्या मौजूदा कीमतें नए निवेशकों के लिए सही एंट्री पॉइंट हैं।
200 अरब डॉलर का मार्केट कैप हासिल करने की राह
इतिहास पर नजर डालें तो जुलाई 2025 में XRP ने 3.65 डॉलर का अपना सर्वकालिक उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) छुआ था। इस तेजी की शुरुआत साल 2024 के आखिरी महीनों में ही हो गई थी, जब अमेरिकी नियामक SEC और रिपल के बीच लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद के सुलझने के संकेत मिले थे। साल 2025 में जैसे ही यह मुकदमा आधिकारिक तौर पर समाप्त हुआ, निवेशकों के बीच उत्साह बढ़ गया और XRP का मार्केट कैप 226 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया था।
हालांकि, बाजार में टोकन की उपलब्धता समय के साथ बदलती रहती है। प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में XRP की सर्कुलेटिंग सप्लाई करीब 62 अरब कॉइन्स की है। इस मौजूदा सप्लाई को ध्यान में रखते हुए, यदि टोकन के मार्केट कैप को दोबारा 200 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंचना है, तो प्रत्येक कॉइन की कीमत को कम से कम 3.22 डॉलर के स्तर पर जाना होगा। यानी सर्कुलेटिंग सप्लाई बढ़ने की स्थिति में यह टोकन अपने ऑल-टाइम हाई प्राइस पर पहुंचे बिना भी 200 अरब डॉलर का मार्केट कैप हासिल कर सकता है।
वैश्विक परिस्थितियां और मूल्य के समीकरण
फिलहाल क्रिप्टो बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। तकनीकी स्तर पर XRP को 1.15 डॉलर से 1.18 डॉलर के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, बीते 16 जून को इस टोकन ने तेजी दिखाते हुए 1.29 डॉलर के स्तर को छुआ था, लेकिन वह इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और वापस अपने सपोर्ट स्तर पर आ गया।
इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का वह फैसला रहा, जिसमें ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, मई 2026 में अमेरिका की महंगाई दर उम्मीद से अधिक बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। इस बढ़ती महंगाई के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल को मुख्य वजह माना गया।
लेकिन अब वैश्विक परिदृश्य में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक शांति समझौता हो चुका है, जिस पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कूटनीतिक सफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट देखी जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि तेल की कीमतें घटने से महंगाई के आंकड़ों में नरमी आएगी। यदि महंगाई घटती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का कदम उठा सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी बढ़ेगी और XRP की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है।













