क्रिप्टो बाजार में आई तेज गिरावट के बीच दिग्गज ट्रेडर बॉब लूकस ने निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है। उनका साफ कहना है कि अभी जो बिकवाली का तूफान दिख रहा है, वह कोई अंत नहीं, बल्कि 4 साल के चक्रीय मॉडल के भीतर होने वाली एक स्वाभाविक आखिरी सफाई है। उनके मुताबिक इस तूफान की सबसे बड़ी मार उन लोगों पर पड़ी है जिन्होंने लीवरेज लेकर सौदे खोले थे।
'बिटकॉइन मरा नहीं है'
लूकस का मानना है कि इस समय टाइमलाइन पर बिटकॉइन और क्रिप्टो को लेकर जो डर और नकारात्मक खबरें भर गई हैं, वे मंदी के इस पड़ाव पर पूरी तरह सामान्य बात हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि न तो बिटकॉइन मरा है और न ही क्रिप्टो। उनके शब्दों में:
टाइमलाइन पर भरी पड़ी बिटकॉइन और क्रिप्टो की सारी नकारात्मकता मंदी के इस चरण पर पूरी तरह सामान्य है। बिटकॉइन मरा नहीं है। क्रिप्टो भी नहीं मरा है। जो चीज़ कहीं ज़्यादा संभावना से मर चुकी है, वह है क्रिप्टो का वह भविष्य जो आपको सोशल मीडिया पर बेचा गया था।
स्ट्रैटेजी पर गिरावट का असर
इस गिरावट का सीधा असर कंपनियों की जेब पर भी पड़ा है। दाम टूटने से स्ट्रैटेजी के लिए पहले जैसी शर्तों पर नई पूंजी जुटाना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि क्रिप्टोक्वांट के विश्लेषकों ने स्ट्रैटेजी को सलाह दी है कि वह फिलहाल नई बिटकॉइन खरीद पर कुछ समय के लिए रोक लगाए, ताकि अपने नकद भंडार का संतुलन दोबारा बहाल कर सके।
जल्द रिकवरी की उम्मीद न रखें
हालांकि लूकस यह भी आगाह करते हैं कि कीमतों में तेज़ और जल्दी वापसी की उम्मीद लगाना जल्दबाज़ी होगी। उनके मुताबिक मंदी का यह दौर पूरी तरह खत्म होने के लिए बाजार को अभी 3 से 5 महीने और साइडवेज़ यानी सपाट कारोबार से गुज़रना होगा। एक नए चक्र की शुरुआत 2026 की पतझड़ के करीब होने की उम्मीद है।













