दिल्ली के मुखमेलपुर गांव की उत्तराखंड कॉलोनी में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शनिवार की शाम को लगभग 5 बजकर 30 मिनट का समय था, जब कॉलोनी में रहने वाले तीन बच्चे अपने घरों के पास स्थित खेतों में खेल रहे थे। इसी दौरान, वे खेत से जल निकासी के लिए खोदे गए आठ फीट गहरे गड्ढे के करीब पहुंच गए। दुर्भाग्यवश, खेलते समय दो बच्चे संतुलन खोकर पानी से भरे उस गड्ढे में जा गिरे। उनके साथ मौजूद तीसरा बच्चा यह मंजर देख घबरा गया और फौरन दौड़कर गांव की ओर भागा, जहां उसने ग्रामीणों को इस भयावह हादसे की सूचना दी।
सूचना मिलते ही आसपास के लोग और कॉलोनी के निवासी बड़ी संख्या में घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। करीब आठ लोगों ने मिलकर उन बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास किया। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब दोनों को पानी से बाहर निकाला गया, तो एक बच्चे की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि दूसरा बच्चा अत्यंत नाजुक स्थिति में था। बाद में उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान सात वर्षीय आयुष, जो मोती चंद के पुत्र थे, और आठ वर्षीय नितेश, जो कन्हैया के पुत्र थे, के रूप में हुई है। इस घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे और शोक में डाल दिया है। दिल्ली में बारिश के पानी में डूबने से बच्चों की मृत्यु का यह कोई पहला मामला नहीं है, क्योंकि मात्र तीन दिन पूर्व भी इसी तरह की एक अन्य दुखद घटना सामने आई थी।
गड्ढे के चारों ओर सुरक्षा का अभाव
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि खेत का पानी निकालने के लिए जो गड्ढा खोदा गया था, उसे असुरक्षित छोड़ दिया गया था। वहां किसी भी प्रकार की घेराबंदी या सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके चलते यह गहरा गड्ढा मासूम बच्चों के लिए जानलेवा जाल साबित हुआ। बिना किसी चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग के इस तरह के गहरे गड्ढे का खुला रहना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।
दमकल विभाग की कार्रवाई
दिल्ली अग्निशमन सेवा को इस हादसे की सूचना भोरगढ़ फायर स्टेशन के माध्यम से प्राप्त हुई। आपातकालीन कॉल मिलने पर विजय दहिया की देखरेख में एक दमकल की गाड़ी और बचाव दल तुरंत हिरंकी रोड स्थित घटनास्थल पर पहुंचे। दमकल विभाग के अनुसार, जब तक उनकी टीम वहां पहुंची, तब तक स्थानीय निवासी बच्चों को बाहर निकाल चुके थे। सुरक्षा बलों ने फौरन बच्चों को सीएटीएस एम्बुलेंस में डालकर राजा हरिश्चंद अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विभाग के पास उपलब्ध शुरुआती सूचना के अनुसार, ये बच्चे बारिश के पानी से भरे उस गड्ढे में नहाने के प्रयास में उतरे थे और गहराई का अंदाजा न होने के कारण डूब गए।











