क्रैश डाइट से 15 दिन में घटाया 20 किलो वजन, महिला शिकार हुई गंभीर मस्तिष्क विकार और संतुलन की समस्या कीयूएस डॉलर और विदेशी संपत्तियों में स्थिरता के बीच पीसीई आंकड़ों पर टिकी बाजार की निगाहेंनरेंद्र मोदी के दैनिक आहार से जुड़ी 5 पौष्टिक देसी खान-पान की चीजें जो स्वास्थ्य के लिए हैं फायदेमंदबाजार से आलू खरीदते समय न खाएं धोखा, फिरोजाबाद के कृषि वैज्ञानिक ने बताए मीठा आलू पहचानने के टिप्सअमेरिका के महंगाई आंकड़ों से पहले यूरो में दबाव, जानिए EUR/USD के अहम सपोर्ट लेवल और बाजार का रुझानजापानी येन में आई मजबूती, अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले 20-डे मूविंग एवरेज के नीचे अटका USD/JPYमेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में डॉपलर वेदर रडार प्रोजेक्ट जमीन विवाद में अटकाराजस्थान में नई गौशाला की स्थापना और गोपालन विभाग से सहायता राशि लेने का ऑनलाइन तरीकाउत्तर प्रदेश और बिहार के लिए ट्रेन टिकट न मिलने पर दिल्ली से बस यात्रा का आसान विकल्प, जानें रूट, बस अड्डे और ऑनलाइन बुकिंग की पूरी प्रक्रियास्वयं पोर्टल से जुड़े ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 4 नए पीजी कोर्स, 31 अगस्त तक आवेदन का मौका
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज, जानिए क्या बोले जस्टिस सूर्यकांतदिल्ली
12 जुल॰ 2026, 7:16 am (45 दिन पहले)· 5

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज, जानिए क्या बोले जस्टिस सूर्यकांत

दिल्ली दंगा मामले में आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम को अदालत से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले में देरी और UAPA के कड़े प्रावधानों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

दिल्ली दंगा मामले में लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर कानूनी राहत नहीं मिल सकी है। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनके जेल से बाहर आने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। इन दोनों पर यूएपीए (UAPA) जैसे गंभीर कानूनों के तहत मामला दर्ज है, जिसके कारण उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

कानूनी प्रक्रिया और देरी की समस्या

भारत में न्याय प्रणाली की धीमी गति पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, और मौजूदा मामले में भी यही देखने को मिला है। निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लाखों मामले लंबित हैं, जिसके चलते आम नागरिकों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा न होना एक बड़ी चुनौती है। यदि सुनवाई में इसी प्रकार की लेट-लतीफी होती रही, तो न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ये भी पढ़ें

UAPA और जमानत के कड़े प्रावधान

उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में यूएपीए (UAPA) के प्रावधान जमानत मिलने की प्रक्रिया को काफी कठिन बना देते हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में जमानत मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें साक्ष्यों की गंभीरता और कानून की धाराएं किसी भी आरोपी के लिए राहत पाने में बड़ी बाधा साबित होती हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने सार्वजनिक रूप से इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की है कि कैसे कठोर कानून और अदालती प्रक्रिया में देरी मिलकर विचाराधीन कैदियों के जीवन को प्रभावित करते हैं। सात साल से अधिक समय तक जेल में बिताने के बाद भी इन आरोपियों को अभी तक जमानत नहीं मिल पाई है, जो इस पूरे न्यायिक विवाद की गंभीरता को दर्शाता है।

सवाल-जवाब

उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत क्यों नहीं मिल रही है?
इन दोनों पर यूएपीए (UAPA) के तहत गंभीर आरोप हैं, जिसके कारण जमानत मिलना कानूनी रूप से बहुत कठिन हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने क्या कहा?
उन्होंने अदालती मामलों में होने वाली देरी और समयबद्ध निपटारे की कमी पर चिंता व्यक्त की है।
ये मामला किस घटना से संबंधित है?
यह मामला 2020 के दिल्ली दंगा मामले से जुड़ा है।
क्या इन आरोपियों को कभी जमानत मिली है?
अदालत ने केवल एक बार, मानवीय आधार पर अस्पताल जाने के लिए उमर खालिद को सीमित समय की अनुमति दी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR