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रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से बड़ा हादसा, मलबे में दबे मालिक राहुल दुआ समेत कई लोगदिल्ली
8 जुल॰ 2026, 8:12 pm (45 दिन पहले)· 1

रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से बड़ा हादसा, मलबे में दबे मालिक राहुल दुआ समेत कई लोग

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 में एक निर्माणाधीन इमारत ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिनमें इमारत के मालिक भी शामिल हैं।

देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 से एक बेहद दुखद हादसा सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बुधवार दोपहर बाद हुए इस भयानक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन से चार अन्य लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। मानसून की भारी बारिश के बीच प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर राहत कार्यों में जुटी हुई हैं ताकि मलबे में दबे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।

हादसे की सूचना और बचाव कार्य की स्थिति

दमकल विभाग को इस दर्दनाक घटना की जानकारी शाम को करीब 4:20 बजे मिली। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां और बचाव दल तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना हो गए। जैसे ही इमारत गिरी, उसकी तेज आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में वहां इकट्ठा हो गए। स्थानीय निवासियों ने प्रशासनिक टीमों के पहुंचने से पहले ही अपनी तरफ से मलबे को हटाने और फंसे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे के नीचे जो लोग दबे हुए हैं, उनमें इस निर्माणाधीन इमारत के मालिक राहुल दुआ भी शामिल हैं। बचावकर्मी मलबे को सावधानीपूर्वक हटाते हुए राहुल दुआ और अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। मौके पर भारी भीड़ जमा होने के कारण पुलिस बल को भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है।

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लगातार हो रही बारिश का प्रभाव

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस मानसूनी बारिश के कारण कई इलाकों में पानी भर गया है, जिससे मिट्टी ढीली हो जाती है और निर्माणाधीन ढांचों की नींव कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। वे खराब मौसम के बीच लगातार मलबे को हटाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कीमती जिंदगियों को बचाया जा सके।

दिल्ली में पहले भी हुए हैं ऐसे बड़े हादसे

दिल्ली में इमारतों के ढहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले डेढ़ दशक के दौरान ऐसे कई दर्दनाक हादसे हुए हैं, जिन्होंने प्रशासन की तैयारियों और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

करोल बाग हादसा (17 अप्रैल, 2026)

अभी कुछ समय पहले ही, 17 अप्रैल 2026 को मध्य दिल्ली के करोल बाग के देव नगर इलाके में एक बहुत पुरानी और जर्जर तीन मंजिला इमारत अचानक जमींदोज हो गई थी। इस हादसे ने तीन लोगों की जान ले ली थी, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में हुई जांच में पता चला कि इमारत की दीवारों और नींव में लंबे समय से हो रहे पानी के रिसाव के कारण ढांचा बेहद कमजोर हो चुका था।

कबीर नगर हादसा (23 मार्च, 2024)

इससे पहले, 23 मार्च 2024 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कबीर नगर इलाके में एक दो मंजिला पुरानी इमारत की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया था। इस इमारत में जींस बनाने की एक कपड़ा फैक्ट्री चल रही थी। हादसे के समय वहां काम कर रहे दो मजदूरों की मलबे में दबकर मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।

सब्जी मंडी हादसा (सितंबर 2021)

सितंबर 2021 में उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी इलाके में एक तीन मंजिला पुरानी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। इस दिल दहला देने वाले हादसे में दो मासूम बच्चों सहित तीन लोगों की जान चली गई थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इमारत के भूतल पर बिना किसी सुरक्षा आकलन के मरम्मत का काम चल रहा था, जिसने पूरी इमारत के ढांचे को अस्थिर कर दिया था।

अशोक विहार हादसा (सितंबर 2018)

सितंबर 2018 में उत्तर-पश्चिम दिल्ली के अशोक विहार के सावन पार्क इलाके में एक 20 साल पुरानी जर्जर तीन मंजिला इमारत के गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें चार बच्चे और एक महिला शामिल थे। एमसीडी ने इस इमारत को पहले ही रहने के लिए असुरक्षित और खतरनाक घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद लोग वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण इसमें रहने को मजबूर थे।

इंद्रलोक हादसा (जून 2014)

उत्तरी दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में जून 2014 में एक चार मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में चार बच्चों समेत दस लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे की मुख्य वजह बगल के खाली प्लॉट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर अवैध रूप से की जा रही बेसमेंट की खुदाई को माना गया था, जिससे इस इमारत की नींव खिसक गई थी।

ललिता पार्क हादसा (नवंबर 2010)

दिल्ली के इतिहास के सबसे भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसों में से एक नवंबर 2010 में पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित ललिता पार्क इलाके में हुआ था। यहां एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत पूरी तरह से ढह गई थी। इस भीषण त्रासदी में 67 लोगों की मौत हो गई थी और 130 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। बारिश के पानी का बेसमेंट में जमा होना और कमजोर बुनियाद पर अवैध मंजिलें बनाना इस हादसे का मुख्य कारण था।

सवाल-जवाब

रोहिणी में इमारत गिरने का हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 में स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में हुआ। दमकल विभाग को इसकी सूचना शाम करीब 4:20 बजे मिली।
इस हादसे में कितने लोग हताहत हुए हैं?
इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन से चार लोग मलबे में दबे हुए हैं।
क्या इमारत का मालिक भी मलबे में फंसा हुआ है?
हाँ, निर्माणाधीन इमारत के मालिक राहुल दुआ भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
इस हादसे के पीछे मौसम का क्या प्रभाव माना जा रहा है?
दिल्ली और एनसीआर में पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे मिट्टी ढीली होने और नींव कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा इमारत हादसा कौन सा था?
नवंबर 2010 में लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क में हुआ पांच मंजिला इमारत का हादसा दिल्ली का सबसे बड़ा हादसा था, जिसमें 67 लोगों की जान चली गई थी।
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