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गाय-भैंस के गोबर से बनने वाली यह खाद बचा रही है किसानों का पैसा, जानें बनाने का पूरा तरीकाDIY
5 जुल॰ 2026, 6:47 am (115 दिन पहले)· 4

गाय-भैंस के गोबर से बनने वाली यह खाद बचा रही है किसानों का पैसा, जानें बनाने का पूरा तरीका

भीलवाड़ा में किसान और बागवानी के शौकीन एक बार फिर गोबर की खाद अपना रहे हैं, जिसे गाय-भैंस के गोबर से घर पर ही 45 से 60 दिनों में तैयार किया जा सकता है.

राजस्थान के भीलवाड़ा में रासायनिक खाद का इस्तेमाल जितना बढ़ा है, किसानों और बागवानी के शौकीन लोगों का रुझान उतनी ही तेजी से जैविक तरीकों की ओर लौट रहा है. इसी कड़ी में गोबर की खाद एक बार फिर सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है, क्योंकि यह गाय या भैंस के गोबर से घर पर ही बेहद कम खर्च में तैयार हो जाती है. यही जैविक खाद मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ पौधों की बढ़वार भी तेज करती है, इसलिए इसे खेतों से लेकर किचन गार्डन, गमलों और फलदार पौधों तक हर जगह इस्तेमाल किया जा रहा है.

किसान फिर क्यों अपना रहे हैं पुराना तरीका

लंबे समय तक रासायनिक खाद पर निर्भर रहने के बाद अब किसानों को इसके नुकसान समझ आने लगे हैं. मिट्टी की सेहत बिगड़ना और लगातार बढ़ता खर्च दो बड़ी वजहें हैं, जिनकी वजह से लोग दोबारा गोबर की खाद जैसे परंपरागत तरीकों की तरफ मुड़ रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ती, घर में मौजूद संसाधनों से ही यह तैयार हो जाती है.

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घर पर गोबर की खाद बनाने का तरीका

सबसे पहले एक गड्ढा खोदें या फिर एक बड़ा प्लास्टिक ड्रम ले लें. इसमें ताजा गोबर के साथ सूखी पत्तियां, भूसा, घास और रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा डालकर अच्छी तरह मिला दें. इसके बाद इस मिश्रण पर थोड़ा पानी छिड़कें ताकि यह नम बना रहे. इस दौरान एक बात का खास ख्याल रखना जरूरी है कि इसमें प्लास्टिक, कांच या किसी तरह का रासायनिक कचरा बिल्कुल न मिलाया जाए. खाद जल्दी और अच्छी तरह तैयार हो, इसके लिए हवा का संचार बना रहना भी उतना ही जरूरी है, इसलिए समय-समय पर इसे फावड़े से पलटते रहना चाहिए.

कैसे पहचानें कि खाद बनकर तैयार हो गई है

यह मिश्रण आमतौर पर 45 से 60 दिनों में पूरी तरह सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाता है. तैयार खाद पहचानने के तीन आसान संकेत हैं, इसका रंग गहरा भूरा या काला हो जाना, बदबू पूरी तरह गायब हो जाना और उसमें से मिट्टी जैसी हल्की खुशबू आना. इसके बाद इसे कुछ दिन छांव में सुखाकर किसी सुरक्षित जगह पर रख लेना चाहिए, जहां से जरूरत पड़ने पर इसे खेत, सब्जियों, फूलों या गमलों में डाला जा सकता है.

खेती और बागवानी को क्या फायदा मिलता है

गोबर की खाद का लगातार इस्तेमाल मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता को बढ़ा देता है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इसके साथ ही मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्म जीव भी सक्रिय बने रहते हैं, जो पौधों की जड़ों को मजबूती देते हैं. जड़ें मजबूत होने का सीधा असर फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर पड़ता है. एक और बड़ा फायदा यह है कि जब रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है तो खेती पर आने वाला कुल खर्च भी अपने आप कम हो जाता है. यही वजह है कि जैविक खेती करने वाले किसान गोबर की खाद को आज भी सबसे भरोसेमंद संसाधन मानते हैं.

सवाल-जवाब

गोबर की खाद बनाने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर यह मिश्रण 45 से 60 दिनों में पूरी तरह सड़कर तैयार खाद में बदल जाता है.
गोबर की खाद बनाने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?
ताजा गोबर, सूखी पत्तियां, भूसा, घास और रसोई का जैविक कचरा चाहिए, साथ ही एक गड्ढा या बड़ा प्लास्टिक ड्रम.
कैसे पता चलेगा कि खाद तैयार हो गई है?
खाद का रंग गहरा भूरा या काला हो जाता है, बदबू पूरी तरह खत्म हो जाती है और उसमें से मिट्टी जैसी खुशबू आने लगती है.
क्या इस मिश्रण में प्लास्टिक या कांच मिलाया जा सकता है?
नहीं, मिश्रण में प्लास्टिक, कांच या किसी तरह का रासायनिक कचरा बिल्कुल नहीं मिलाना चाहिए.
गोबर की खाद का इस्तेमाल कहां-कहां किया जा सकता है?
इसे खेतों, सब्जियों, फूलों, गमलों और फलदार पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
गोबर की खाद इस्तेमाल करने से क्या फायदा होता है?
इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, फायदेमंद सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं, पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और खेती की लागत भी घटती है.
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