बरसात के दिनों में घर की छत, बालकनी या आंगन में रखे पौधों की देखभाल करना अक्सर चुनौती बन जाता है। मूसलाधार बारिश के चलते गमलों में लगातार पानी इकट्ठा होता रहता है, जिससे मिट्टी हर वक्त गीली बनी रहती है। जब गमलों में लंबे समय तक पानी ठहरा रहता है, तो जड़ों तक हवा और ऑक्सीजन की पहुंच पूरी तरह बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पौधों की जड़ें धीरे-धीरे सड़ने लगती हैं, पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगती हैं और हरा-भरा पौधा अचानक मुरझाकर सूख जाता है। भीलवाड़ा जैसे क्षेत्रों में गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोगों के लिए इस समस्या से बचने का एक आसान और किफायती देसी उपाय उपलब्ध है, जिसे बारिश का मौसम शुरू होने से पहले अपनाया जा सकता है।
पानी निकासी और ऑक्सीजन संचार के लिए बजरी का महत्व
ज्यादातर लोग गमले भरते समय केवल काली मिट्टी या सामान्य बगीचे की मिट्टी का उपयोग करते हैं। ऐसी भारी मिट्टी में नमी को लंबे समय तक रोके रखने का गुण होता है, जो सामान्य दिनों में तो ठीक रहता है लेकिन बारिश के मौसम में यह पौधों के लिए नुकसानदेह साबित होता है। इस समस्या के समाधान के लिए गमले की मिट्टी तैयार करते समय उसमें लगभग 20 से 30 प्रतिशत मोटी नदी की रेत या बजरी मिला देनी चाहिए। बजरी मिलाने से मिट्टी हल्की, भुरभुरी और छिद्रयुक्त बन जाती है। इससे गमले में गिरने वाला बारिश का अतिरिक्त पानी तुरंत नीचे निकल जाता है और जड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती रहती है, जिससे पौधा स्वस्थ बना रहता है।
रेत के चुनाव और मिट्टी की तैयारी में रखें ये सावधानियां
बजरी या रेत का इस्तेमाल करते समय कुछ खास बातों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। हमेशा साफ और मोटी नदी की रेत ही चुनें। अत्यधिक बारीक, धूल भरी या गंदी रेत का प्रयोग करने से मिट्टी भुरभुरी होने के बजाय और ज्यादा सख्त हो सकती है, जिससे जल निकासी का रास्ता बंद हो सकता है। इसके अलावा, रेत के साथ मिट्टी में थोड़ी सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक कम्पोस्ट भी मिलाना चाहिए। चूंकि बजरी मिलाने से पानी तेजी से बाहर निकलता है, इसलिए खाद मिलाने से पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की कमी महसूस नहीं होती। साथ ही, गमले के निचले हिस्से में मौजूद जल निकासी वाले छेद को हमेशा खुला रखें। अगर यह छेद बंद रहेगा तो रेत मिलाने के बावजूद पानी बाहर नहीं निकल पाएगा।
किन-किन पौधों और सब्जियों के लिए उपयोगी है यह तरीका
यह आसान गार्डनिंग तकनीक लगभग हर प्रकार के पौधों के लिए बेहद कारगर मानी जाती है। सजावटी और फूलों वाले पौधों जैसे कि गुलाब, गेंदा, गुड़हल, चमेली, तुलसी, एलोवेरा, स्नेक प्लांट और मनी प्लांट में इसका बेहतरीन परिणाम दिखाई देता है। इसके साथ ही, होम गार्डन या किचन गार्डन में उगाई जाने वाली सब्जियों जैसे टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया, मेथी और पालक के पौधों को भी इस विधि से बारिश के प्रकोप से बचाया जा सकता है। बजरी मिली मिट्टी में फफूंदी और रूट रॉट जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है, जिससे पौधे पूरे मानसून के दौरान बिना किसी रुकावट के बढ़ते रहते हैं।
मानसून के दौरान पौधों की सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स
मिट्टी में रेत मिलाने के अलावा बारिश के मौसम में पौधों की नियमित देखभाल भी जरूरी है। जब बारिश लगातार हो रही हो, तो पौधों में ऊपर से अतिरिक्त पानी देने से बचें। गमलों को ऐसी जगहों पर रखें जहां पानी का भराव न होता हो या छत के परनालों का सीधा पानी गमलों पर न गिरे। समय-समय पर पौधों की सूखी, सड़ी या पीली हो चुकी पत्तियों को छांटकर अलग करते रहें ताकि संक्रमण न फैले। गमले की ऊपरी मिट्टी की हल्की-हल्की गुड़ाई करते रहने से जड़ों तक ताजी हवा आसानी से पहुंचती है। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने बगीचे को पूरे बारिश के मौसम में हरा-भरा रखा जा सकता है।



















