राजस्थान के जालोर जिले के सायला क्षेत्र स्थित मेंगलवा गांव से शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी से परेशान छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का सब्र मंगलवार को टूट गया और उन्होंने विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़कर प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। लंबे समय से पढ़ाई ठप पड़ी होने और व्यवस्था में कोई सुधार न होने से नाराज विद्यार्थियों ने साफ कर दिया कि अब वे किसी भरोसे पर टिके रहने को तैयार नहीं हैं।
25 पद स्वीकृत, कार्यरत सिर्फ 7 शिक्षक
तालाबंदी कर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि इस पीएम श्री विद्यालय में शिक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए कुल 25 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन असल हालात इससे कोसों दूर हैं। वर्तमान में यहां 25 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 7 शिक्षक ही कार्यरत हैं। यही मुट्ठी भर शिक्षक विद्यालय के 350 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जाहिर है कि इतने कम स्टाफ के सहारे न तो सभी विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से लग पा रही हैं और न ही बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे छात्रों को समय पर सही मार्गदर्शन मिल पा रहा है।
सेकंड ग्रेड का एक भी शिक्षक नहीं, इतिहास के अध्यापक के कंधों पर प्रिंसिपल की जिम्मेदारी
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने स्कूल की बदहाल स्थिति खुलकर सामने रखी। एक छात्रा ने रोष जताते हुए बताया कि विद्यालय में सेकंड ग्रेड का एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। प्रथम श्रेणी के सिर्फ दो शिक्षक ही यहां कार्यरत हैं, जिनमें से एक हिंदी विषय पढ़ाते हैं और दूसरे इतिहास विषय के अध्यापक हैं। प्रशासनिक कुव्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतिहास पढ़ाने वाले इन्हीं शिक्षक को फिलहाल विद्यालय के प्रिंसिपल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालना पड़ रहा है। प्रिंसिपल के तौर पर प्रशासनिक कामकाज में उलझे रहने के कारण उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए समय ही नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से उनके विषयों का पाठ्यक्रम बुरी तरह अधूरा पड़ा हुआ है।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, लेकिन ग्रामीणों को आश्वासन पर भरोसा नहीं
छात्रों और ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते स्कूल परिसर का पूरा माहौल बदल गया और नियमित पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह ठप हो गई। मामला बिगड़ता देख मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नेमाराम चौधरी और एएसआई राजाराम भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने छात्रों और आक्रोशित ग्रामीणों से लंबी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें जल्द ही उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएंगी और खाली पड़े पदों को भरने की कोशिश की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों और छात्रों ने दोटूक कह दिया कि अब वे शिक्षा विभाग के खोखले आश्वासनों पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक उनका आंदोलन और स्कूल की तालाबंदी लगातार जारी रहेगी।











