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बिना पक्के कॉन्ट्रैक्ट काम करने से मंदाकिनी को 16-17 फिल्मों की फीस आज तक नहीं मिलीमनोरंजन
19 सित॰ 2026, 10:52 pm (38 दिन पहले)· 0

बिना पक्के कॉन्ट्रैक्ट काम करने से मंदाकिनी को 16-17 फिल्मों की फीस आज तक नहीं मिली

फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' फेम मंदाकिनी ने 80 के दशक के सिनेमाई तौर-तरीकों को याद करते हुए बताया कि पक्की कागजी कार्रवाई न होने और आपसी भरोसे के चलते उन्हें करीब 16-17 फिल्मों का मेहनताना कभी नहीं मिला.

फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से व्यापक लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री मंदाकिनी ने अपने आरंभिक फिल्मी सफर और अस्सी के दशक की कार्यशैली से जुड़े कई अनसुने अनुभव साझा किए हैं. उन्होंने उस दौर की फिल्म निर्माण प्रक्रिया पर खुलकर चर्चा करते हुए बताया कि उस समय हिंदी सिनेमा जगत का माहौल आज की तुलना में बेहद अलग और घरेलू हुआ करता था. जहां एक ओर सेट पर कलाकारों और कर्मियों के बीच गहरा अपनापन रहता था, वहीं दूसरी ओर औपचारिक समझौतों की कमी के चलते आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था. इसी क्रम में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने अपने करियर में लगभग 16 से 17 ऐसी फिल्मों में अभिनय किया, जिनका पारिश्रमिक उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुआ.

अस्सी के दशक के फिल्म सेट का घरेलू माहौल

मंदाकिनी ने अपने शुरुआती दिनों की यादें ताजा करते हुए बताया कि उन्हें फिल्मों की शूटिंग के दौरान काम करने में बहुत आनंद आता था. उस समय सह-कलाकारों और क्रू सदस्यों का व्यवहार अत्यधिक सहयोगी रहता था, जिससे सेट पर किसी पेशेवर कार्यस्थल के बजाय घर जैसा अहसास होता था. पुराने सिनेमाई दौर की आधुनिक दौर से तुलना करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि 1980 के दशक में फिल्म सेट पर बातचीत करने अथवा मिलने-जुलने के लिए किसी भी तरह की औपचारिकताओं या कड़े सुरक्षा घेरे की आवश्यकता नहीं पड़ती थी.

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उस दौर में कलाकारों और पर्दे के पीछे काम करने वाली तकनीकी टीम के बीच कोई कृत्रिम दूरी नहीं होती थी. भोजन के समय सभी लोग एक साथ बैठकर खाना खाते थे. किसी भी अभिनेता अथवा अभिनेत्री से संवाद करने के लिए पहले से समय लेने या औपचारिक इजाजत मांगने का कोई चलन मौजूद नहीं था. लोग बिना किसी हिचकिचाहट के एक-दूसरे के कमरों में चले जाते थे और खुलकर बातचीत करते थे. अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि उस समय की यह सहजता और भाईचारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से बेहद प्रिय था.

कागजी कार्रवाई के बजाय आपसी रिश्तों पर निर्भरता

उस युग की कार्यप्रणाली पर रोशनी डालते हुए मंदाकिनी ने बताया कि तब फिल्मों के अनुबंध बहुत ही सामान्य और अनौपचारिक प्रकृति के होते थे. वास्तविक कानूनी दस्तावेजों या विस्तृत समझौतों के स्थान पर लोग आपसी विश्वास और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर काम करते थे. कई बार निर्माता या सहयोगी कलाकार केवल यह कहते हुए आ जाते थे कि फिल्म साइन कर लीजिए, और मौखिक सहमति पर काम शुरू हो जाता था.

अनुबंधों में कड़ाई न होने के कारण भुगतान की व्यवस्था भी अनिश्चित बनी रहती थी. कई मौकों पर पैसे समय पर मिल जाते थे, तो कभी भुगतान में भारी विलंब होता था या वह अटक जाता था. इसके अलावा, कई बार साथी कलाकार या फिल्म निर्माता केवल 15 दिनों के संक्षिप्त काम के लिए मदद का अनुरोध करते थे. ऐसे मौकों पर वह आपसी रिश्तेदारी और सहयोग की भावना में बिना किसी तय फीस के ही काम करने के लिए हामी भर देती थीं.

16 से 17 फिल्मों का बकाया मेहनताना और उसके कारण

मंदाकिनी ने स्पष्ट किया कि हालांकि उन्हें अपने करियर की अधिकांश फिल्मों का पारिश्रमिक नियमानुसार मिल गया था, परंतु लगभग 16-17 ऐसी फिल्में रहीं जिनका कोई भुगतान उन्हें कभी नहीं मिला. इस बकाया मेहनताने के पीछे उन्होंने कई प्रमुख परिस्थितियों का उल्लेख किया.

अभिनेत्री के अनुसार, इनमें से कुछ परियोजनाएं आर्थिक या अन्य कारणों से निर्माण के बीच में ही बंद हो गईं, जिसके चलते परियोजना पूरी नहीं हो सकी. कुछ ऐसी फिल्में भी थीं जिनकी शूटिंग पूरी होने के बावजूद वे सिनेमाघरों में रिलीज का मुंह नहीं देख पाईं. वहीं कुछ मामलों में पूरी शूटिंग सफलतापूर्वक संपन्न हो जाने के बाद भी निर्माताओं द्वारा अंतिम भुगतान अथवा फाइनल क्लीयरेंस रोक दिया गया. इस प्रकार बिना औपचारिक अनुबंधों के काम करने का खामियाजा कई बार कलाकारों को आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ा.

सवाल-जवाब

मंदाकिनी को कितनी फिल्मों का मेहनताना नहीं मिला?
मंदाकिनी के अनुसार उन्हें अपने करियर में करीब 16 से 17 फिल्मों की फीस कभी नहीं मिली.
मंदाकिनी को किस फिल्म से व्यापक पहचान मिली थी?
मंदाकिनी को राज कपूर निर्देशित फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से घर-घर में पहचान मिली थी.
80 के दशक में फिल्मों के अनुबंध कैसे होते थे?
उस दौर में फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट्स बहुत ही साधारण होते थे और कागजी कार्रवाई के बजाय आपसी रिश्तों और मौखिक भरोसे पर काम होता था.
फिल्मों का भुगतान न मिलने के मुख्य कारण क्या रहे?
कुछ फिल्में बीच में ही बंद हो गईं, कुछ रिलीज नहीं हो सकीं, और कुछ में पूरी शूटिंग के बाद निर्माताओं ने फाइनल क्लीयरेंस रोक दिया.
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