पटना के सिनेमाघरों में शुक्रवार को अजय देवगन और रितेश देशमुख अभिनीत फिल्म धमाल-4 ने दस्तक दी। फिल्म की ओपनिंग कुछ सुस्त रही, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही दर्शकों की संख्या में सुधार देखा गया। पटना के रिजेंट सिनेमा में पहला शो लगभग 60 दर्शकों के साथ शुरू हुआ, लेकिन दोपहर और शाम के शो तक यह संख्या 250 से 300 के बीच पहुंच गई। फिल्म देखकर बाहर निकलने वाले दर्शकों ने धमाल-4 के प्रति काफी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं।
फिल्म का मिला-जुला असर
थिएटर से बाहर आने वाले लोगों की राय काफी बंटी हुई नजर आई। जहां कई दर्शकों ने अजय देवगन की जोरदार एंट्री और रवि किशन की शानदार कॉमिक टाइमिंग की प्रशंसा की, वहीं अन्य लोगों को फिल्म की कहानी में नयापन नहीं दिखा। विशेष रूप से आदि मानव का किरदार कई दर्शकों को खूब पसंद आया। हालांकि, एक आम राय यह रही कि फिल्म हंसाती तो है, लेकिन धमाल के पहले के भागों जैसा जादुई असर पैदा करने में विफल रही है। कुछ लोग इसे एक बार देखने योग्य मान रहे हैं, जबकि कई इसे अनिवार्य रूप से सिनेमाघर में देखने की श्रेणी में नहीं रखते।
दर्शकों की निजी राय और स्टार रेटिंग
निहाल नामक एक दर्शक ने इसे औसत बताते हुए कहा कि फिल्म में कॉमेडी तो है लेकिन पटकथा कमजोर है। उन्होंने कलाकारों के अभिनय की सराहना तो की, लेकिन कहा कि यह फिल्म पुराने भागों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है। उन्होंने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए। दूसरी तरफ, शुभेंदु पाठक ने फिल्म को 5 में से 4 स्टार देते हुए कहा कि क्लाइमैक्स ने उनका दिल जीत लिया। उन्होंने भोजपुरी गाने 'फुलौरी बिना चटनी कईसे बनी' का जिक्र करते हुए कहा कि इसने स्थानीय दर्शकों के साथ एक गहरा जुड़ाव बनाया है।
कलाकारों का प्रदर्शन और भोजपुरी तड़का
बिक्की कुमार ने फिल्म को मनोरंजन से भरपूर बताया और अजय देवगन के एंट्री सीन पर थिएटर में बजी सीटियों का जिक्र किया। उनके अनुसार, फिल्म बीच में कुछ धीमी जरूर हुई, लेकिन रवि किशन की कॉमेडी ने माहौल को फिर से जीवंत कर दिया। उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार के साथ इसे देखने की सलाह दी। रोहित ने भी फिल्म को कॉमेडी के लिहाज से अच्छा बताया, हालांकि उन्होंने साफ किया कि इसकी तुलना फ्रेंचाइजी के पिछले हिस्सों से नहीं की जा सकती क्योंकि उनका अपना अलग ही स्तर था।
कहानी में नयापन न होने की निराशा
कुछ दर्शकों को फिल्म में मौलिकता की कमी महसूस हुई। शंकर ने तर्क दिया कि मेकर्स ने पुरानी कहानी और खजाने के उसी घिसे-पिटे कॉन्सेप्ट को दोबारा पेश किया है। उनके अनुसार, फिल्म में भोजपुरी गाने का समावेश केवल बिहार और उत्तर प्रदेश के दर्शकों को लुभाने के लिए किया गया था। शंकर ने इसे 10 में से 4 स्टार दिए। हर्ष कुमार का मानना है कि फिल्म 'मस्ट वॉच' नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मोबाइल स्क्रीन या ओटीटी पर भी उतना ही मनोरंजन देगी जितना सिनेमाघर में, क्योंकि इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिसे बड़े पर्दे पर देखना अनिवार्य हो। फिल्म का अंत प्रेडिक्टेबल है, इसलिए यदि आप परिवार के साथ खाली समय बिताना चाहते हैं, तभी इसे देखने का विचार करें।











