दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलज' वर्तमान में एक बड़े विवाद का केंद्र बनी हुई है। यह फिल्म सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्षों को दर्शाती है, जिसे लेकर काफी बहस छिड़ी है। फिल्म बिना किसी विशेष शोर-शराबे के ओटीटी प्लेटफॉर्म 'जी5' पर रिलीज की गई थी, लेकिन मात्र 48 घंटे के भीतर ही इसे वहां से हटा दिया गया। इस घटना के बाद जम्मू की जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने इस कदम का पुरजोर विरोध करने का फैसला किया है। समिति के ट्रेजरर सरदार जगपाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि ओटीटी से फिल्म को हटाए जाने के बावजूद, वे इसे लोगों के सामने लाकर रहेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि जम्मू के विभिन्न गुरुद्वारों में बकायदा प्रोजेक्टर लगाकर संगत को यह फिल्म दिखाई जाएगी।
स्क्रीनिंग की योजना और शेड्यूल
जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने फिल्म के प्रदर्शन के लिए एक व्यवस्थित कार्यक्रम तैयार किया है। पहले चरण में इसे जम्मू के चार प्रमुख गुरुद्वारों में प्रदर्शित किया जा रहा है। इसका पहला प्रदर्शन शुक्रवार को गुरु नानक नगर के गुरुद्वारे में संपन्न हुआ। इसके बाद शनिवार को अखनूर के गुरुद्वारा साहब और रविवार को खोर ब्रायस पुरा में फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई। इस कड़ी में अंतिम प्रदर्शन 14 जुलाई को तलाब टिल्लो स्थित गुरुद्वारा सदन में किया जाएगा। सरदार जगपाल सिंह के अनुसार, जैसे-जैसे अन्य कमेटियों का समर्थन मिलेगा, इस फिल्म को जम्मू के अन्य गुरुद्वारों में भी बड़े स्तर पर दिखाया जाएगा।
सच दबाने की कोशिश पर जताई नाराजगी
सरदार जगपाल सिंह ने फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि फिल्म में जो कुछ भी दर्शाया गया है, वह कड़वी और ऐतिहासिक सच्चाई है। उन्होंने उन ताकतों और व्यवस्था की कड़ी आलोचना की, जिनके दबाव में यह निर्णय लिया गया। जगपाल सिंह ने टिप्पणी की कि हमारा देश विविध विचारों और संस्कृतियों का एक सुंदर गुलदस्ता है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनिवार्य है। उनका मानना है कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते सच को दबाना अत्यंत खेदजनक है।
न्यायिक और तार्किक सवाल
फिल्म पर उठे विवाद के बीच सरदार जगपाल सिंह ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि फिल्म के तथ्य गलत थे, तो सीबीआई ने इसकी जांच क्यों नहीं की? जब मामला अदालत तक पहुँचा था, तो दोषियों को सजा क्यों नहीं सुनाई गई? उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही यह रहस्य बना हुआ है कि फिल्म हटाने के पीछे किसका हाथ है, लेकिन सच्चाई को जनता तक पहुँचने से रोकना एक बड़ा पाप है। ओटीटी से हटाए जाने के बाद फिल्म 'सतलज' के प्रति लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है और गुरुद्वारों में होने वाली स्क्रीनिंग को लेकर सिख समाज सहित आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है।











