बॉलीवुड के इतिहास में एक ही नाम से कई बार फिल्में बनाई जाती रही हैं। लेकिन साल 1983 में रिलीज हुई जितेंद्र की फिल्म हिम्मतवाला ने बॉक्स ऑफिस पर जो इतिहास रचा, उसकी बराबरी करना आसान नहीं था। उस दौर में सिनेमाघरों में इस फिल्म के टिकट पाने के लिए दर्शकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। कहानी और संगीत के दम पर यह फिल्म उस जमाने में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। श्रीदेवी के लिए यह फिल्म उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बन गई थी, क्योंकि यह उनकी पहली बड़ी हिंदी फिल्म थी।
श्रीदेवी और जितेंद्र की यादगार जोड़ी
साल 1983 में 25 फरवरी को जब हिम्मतवाला पर्दे पर उतरी, तो इसने जितेंद्र और श्रीदेवी दोनों के डूबते करियर को एक नई संजीवनी दी थी। इससे एक साल पहले यानी 1982 में जितेंद्र की फिल्म 'दीदार-ए-यार' बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी, जिससे वे काफी तनाव में थे। लेकिन 'हिम्मतवाला' की शानदार सफलता ने उन्हें फिर से बुलंदियों पर पहुँचा दिया। उस समय की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म ने 11 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी, जो उस दशक के हिसाब से बहुत बड़ी उपलब्धि थी। फिल्म की सफलता के बाद श्रीदेवी की मांग इतनी बढ़ गई कि उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे और जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी ने आगे चलकर दस से ज्यादा हिट फिल्में दीं।
30 साल बाद की विफलता
करीब तीन दशक बाद, साल 2013 में इसी शीर्षक हिम्मतवाला को दोबारा पेश किया गया। इस बार मुख्य भूमिका में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया नजर आए। साजिद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म पुरानी फिल्म का रीमेक थी। दर्शकों और ट्रेड एक्सपर्ट्स को उम्मीद थी कि यह फिल्म भी अपनी पुरानी विरासत को दोहराएगी और बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाएगी। हालांकि, ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। अजय देवगन जैसे सुपरस्टार के होने के बावजूद फिल्म दर्शकों को प्रभावित करने में नाकाम रही।
फिल्म का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन
2013 की 'हिम्मतवाला' में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया के अलावा परेश रावल और महेश मांजरेकर जैसे कलाकार भी शामिल थे, लेकिन पटकथा दर्शकों को जोड़ नहीं पाई। बॉक्स ऑफिस आंकड़ों की बात करें तो भारत में इस फिल्म ने 58.34 करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि इसका वैश्विक कलेक्शन 65.79 करोड़ रुपये रहा। आज के दौर में यह आंकड़े बड़े लग सकते हैं, लेकिन फिल्म के बजट और अपेक्षाओं के मुकाबले यह एक बड़ी डिजास्टर साबित हुई। इस तरह 30 साल के अंतराल में एक ही नाम के दो अलग-अलग सफर बॉलीवुड की अनिश्चितताओं को बयां करते हैं।











