रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने भारत में बॉक्स ऑफिस के सभी पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए 1800 करोड़ रुपये का विशाल कलेक्शन दर्ज किया है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस एक्शन फ्रेंचाइजी ने वैश्विक स्तर पर भी 3100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर अपनी धाक जमाई है। इस जबरदस्त सफलता के बाद फिल्म को अब जापान के सिनेमाघरों में रिलीज किया गया है, जहां इसका मुकाबला ‘दंगल’, ‘आरआरआर’, ‘साहो’, ‘कल्कि 2898 AD’, ‘पठान’, ‘सालार’, ‘जवान’, ‘रंगस्थलम’, ‘देवरा’, ‘बाहुबली 2’ और ‘टाइगर 3’ जैसी बड़ी भारतीय फिल्मों से है।
जापान में धीमी रही धुरंधर की एंट्री
हालांकि भारत में फिल्म का जलवा किसी सुनामी जैसा था, लेकिन जापान में फिल्म की शुरुआत काफी फीकी रही है। फिल्म को जापान भर में कुल 80 स्क्रीन्स पर दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया गया था। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर नजर रखने वाली संस्था ‘मिमोरिन’ के अनुसार, रिलीज के पहले दिन दोपहर 2 बजे तक मात्र 57 स्थानों पर 449 टिकट ही बिक सके थे। दिन भर की कुल बिक्री का आंकड़ा करीब 900 टिकट तक ही पहुंच पाया। यह प्रदर्शन निर्माताओं की उम्मीदों से काफी दूर रहा है।
टॉप-25 चार्ट से बाहर
फिल्म की शुरुआती सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के शुरुआती तीन दिनों में भी यह फिल्म जापान के टॉप-25 बॉक्स ऑफिस चार्ट में अपनी जगह सुरक्षित नहीं कर पाई। जापानी बाजार में किसी भी भारतीय फिल्म के लिए मजबूत शुरुआत का पैमाना पहले दिन का अच्छा खासा फुटफॉल माना जाता है। सलमान खान की ‘टाइगर 3’ ने इस मामले में 1300 से अधिक एडमिशन्स के साथ टॉप-10 की सूची में जगह बनाई थी, जबकि ‘धुरंधर: द रिवेंज’ इस आंकड़े को पार करने में भी पूरी तरह विफल रही।
रिकॉर्ड्स की दौड़ में पीछे
जापान में भारतीय फिल्मों की ओपनिंग की बात करें, तो एसएस राजामौली की ‘आरआरआर’ अभी भी 8230 दर्शकों के साथ पहले नंबर पर बनी हुई है। उसके बाद ‘साहो’ (6510), ‘कल्कि 2898 AD’ (3700), ‘पठान’ (2220), ‘सालार’ (2200) और ‘जवान’ (1960) का स्थान आता है। ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के अलावा हाल ही में ‘पुष्पा 2’ भी जापान के टॉप-10 शुरुआती ओपनिंग चार्ट में शामिल होने से वंचित रह गई थी।
उम्मीदें अभी बाकी हैं
फिलहाल यह फिल्म जापानी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मेकर्स को अब भी पूरी उम्मीद है कि फिल्म की जासूसी आधारित कहानी आने वाले दिनों में ‘वर्ड ऑफ माउथ’ के जरिए लोकप्रिय होगी। जापानी बाजार में सांस्कृतिक पैठ बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और फिल्म की आगे की राह पूरी तरह से दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।











