राजस्थान में एक ऐसा गांव है, जहां आम मकान नहीं बल्कि भव्य हवेलियां बसती हैं। यहां घरों के दरवाजे इतने ऊंचे और चौड़े बनाए गए हैं कि गांव के मुख्य प्रवेश द्वार के नीचे से सड़कें तक निकल जाती हैं। इस गांव को बेस्ट विलेज का अवॉर्ड भी मिल चुका है। यह गांव राजस्थान के झुंझुनूं जिले में शेखावाटी इलाके में बसा मंडावा है, जिसे हवेलियों का गांव और राजस्थान की फिल्म सिटी भी कहा जाता है। वजह साफ है, यहीं बॉलीवुड की दो ऐसी फिल्मों की शूटिंग हुई थी जो आगे चलकर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुईं।
मंडावा को क्यों कहा जाता है शेखावाटी का ताज
मंडावा को शेखावाटी का ताज कहा जाता है, और इसी गांव से निकलकर कई बड़े बिजनेसमैन देश-विदेश में मशहूर हुए हैं। कहा जाता है कि इस इलाके में सबसे पहले मांडू जाट आकर बसा था, इसी वजह से गांव का नाम पहले मांडूवास पड़ा। समय के साथ यह नाम बदलता गया, पहले मांडुआ हुआ, फिर मंडवा कहलाया और आखिर में मंडावा के नाम से मशहूर हो गया। यह गांव फतेहपुर (शेखावाटी) रेलवे स्टेशन से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंडावा को राजस्थान की ओपन आर्ट गैलरी भी कहा जाता है, क्योंकि यहां की भव्य हवेलियां, दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी और खूबसूरत पेंटिंग्स ने इस कस्बे को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई है। गांव में करीब 350 हवेलियां हैं, और इनमें से ज्यादातर अब होटल-रेस्टोरेंट में तब्दील हो चुकी हैं, जहां देश-विदेश से पर्यटक ठहरने आते हैं।
2014-15 में बॉलीवुड को मिलीं दो ऐतिहासिक हिट फिल्में
बॉलीवुड के इतिहास में 2014 और 2015 का साल बेहद खास माना जाता है। इसी दो साल के अंतराल में आमिर खान की पीके और सलमान खान की बजरंगी भाईजान रिलीज हुई थीं, और दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया था। दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्मों की शूटिंग मंडावा गांव और यहां से महज 3 किलोमीटर दूर बसे तेतरा गांव में हुई थी। यानी एक ही इलाके ने दो साल के भीतर बॉलीवुड को दो ऐसी फिल्में दीं, जो आगे चलकर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुईं।
पीके में मंडावा की गलियां और चर्चित डांसिंग कार का सीन
पीके फिल्म 19 दिसंबर 2014 को रिलीज हुई थी, जिसमें आमिर खान, संजय दत्त और अनुष्का शर्मा लीड रोल में नजर आए थे। इस फिल्म में संजय दत्त ने भैरों सिंह का किरदार निभाया था, जो बैंड बजाने का काम करता है। भैरों सिंह के गांव वाले सीन तेतरा गांव में फिल्माए गए थे, और फिल्म के कई अहम हिस्से इसी गांव में शूट हुए थे। इसके अलावा पीके के कुछ सीन मंडावा गांव में भी फिल्माए गए। फिल्म के शुरुआती हिस्से में दिखने वाली गलियां असल में मंडावा गांव की ही हैं, और फिल्म का चर्चित डांसिंग कार वाला सीन भी यहीं फिल्माया गया था। महज 122 करोड़ रुपये के बजट में बनी पीके ने दुनियाभर में 616 करोड़ रुपये का कारोबार किया, और इस तरह यह फिल्म एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई। इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार हिरानी ने किया था।
बजरंगी भाईजान का पाकिस्तान भी मंडावा में ही बना
ठीक ऐसा ही संयोग साल 2015 में आई सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान के साथ भी बना। यह फिल्म 17 जुलाई 2015 को रिलीज हुई थी, और इसका निर्देशन कबीर खान ने किया था। फिल्म में सलमान खान, करीना कपूर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और हर्षाली मल्होत्रा यानी मुन्नी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। इस फिल्म की भी शूटिंग मंडावा और तेतरा गांव में हुई थी। तेतरा गांव में फिल्म के लिए पाकिस्तान का पुलिस स्टेशन दिखाया गया था, जबकि पाकिस्तान से जुड़े ज्यादातर सीन मंडावा गांव में ही फिल्माए गए। ओमपुरी का मदरसा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी को पुलिस वाले का उसके घर तक छोड़कर जाना और सलमान खान का पुलिस से भागना, ये सारे मशहूर सीन मंडावा की गलियों में ही शूट हुए थे। 125 करोड़ रुपये के बजट में बनी बजरंगी भाईजान ने वर्ल्डवाइड 600 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था।
दोनों फिल्मों ने मिलकर कमाए 1200 करोड़, यूनिट 60 दिन रही गांव में
इस तरह पीके और बजरंगी भाईजान, दोनों फिल्मों की शूटिंग मंडावा और तेतरा गांव में हुई, और ये दोनों गांव एक-दूसरे से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। दोनों फिल्मों ने मिलकर करीब 1200 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। दिलचस्प यह भी है कि दोनों फिल्मों की यूनिट गांव में 30-30 दिन तक रुकी थी, यानी दोनों फिल्मों की यूनिटें मिलाकर कुल 60 दिन इस छोटे से गांव में ठहरी रहीं।











