फिल्म जगत में अपने बयानों और प्रोजेक्ट्स को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले फिल्ममेकर सनोज मिश्रा ने अब अपनी खुद की जिंदगी पर आधारित एक नई फिल्म बनाने की घोषणा कर दी है। उनकी इस आगामी फिल्म का शीर्षक 'सनोज तन्हा सफर' रखा गया है, जिसकी जानकारी एक औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी गई। इस मूवी के जरिए निर्देशक के जीवन के उन तमाम संघर्षों और कानूनी पचड़ों को जनता के सामने लाया जाएगा, जिनसे वह पिछले कुछ वर्षों के दौरान जूझते रहे हैं।
महाकुंभ की वायरल गर्ल से जुड़े विवाद की दास्तां
बता दें कि सन वही निर्देशक हैं जो महाकुंभ के दौरान चर्चा में आई दातून बेचने वाली मोनालिसा को अपनी फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' के माध्यम से अभिनय की दुनिया में लाने वाले थे। हालांकि, कानूनी अड़चनों और तमाम विवादों के कारण उस प्रोजेक्ट का काम बीच में ही रोकना पड़ गया था। अब उनकी नई फिल्म 'सनोज तन्हा सफर' में उसी पूरे घटनाक्रम और विवाद के पीछे के सच को उजागर किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से कुंभ की वायरल गर्ल को ब्रेक मिलने से लेकर उनके केरल जाने तक के सफर के अनछुए पहलुओं को दिखाया जाएगा।
कानूनी मुकदमों और साजिशों के गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फिल्ममेकर ने कई सनसनीखेज खुलासे किए और अपने ऊपर लगे आरोपों को एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में साझा किया कि मोनालिसा उन्हें अपने पिता की तरह मानती थी, लेकिन कुछ बातों पर असहमति जताने के बाद स्थिति बदल गई। उनके अनुसार, उन पर छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए केरल में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया था। इसके साथ ही उन्होंने शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और अपने पुराने निर्माता वसीम रिजवी पर भी तीखा हमला बोला। सनोज का कहना है कि वह वसीम रिजवी के खिलाफ पहले ही तीन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवा चुके हैं। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि 'द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल' के निर्माण के वक्त भी उनके खिलाफ कई फर्जी मुकदमे थोपे गए थे और उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश भी हुई थी। उन्होंने याद किया कि उस बेहद कठिन दौर में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत उनके समर्थन में खुलकर सामने आई थीं।
निर्देशकों द्वारा सच्चाई को पर्दे पर उतारने की पहल
अब इस पूरे घटनाक्रम और सनोज के जीवन के संघर्षों को बड़े पर्दे पर लाने की जिम्मेदारी निर्देशक कृपा शंकर सरोज और अभिलाष एस. गुप्ता ने उठाई है, जो पहले उनके साथ एसोसिएट के तौर पर काम कर चुके हैं। इन दोनों निर्देशकों ने सनोज के साथ रहकर जो असलियत और अनुभव देखे, उन्हीं के आधार पर इस फिल्म को तैयार किया जा रहा है। इस फिल्म के जरिए यह दर्शाने का प्रयास किया जाएगा कि किस प्रकार एक साजिश के तहत एक लड़की को बहलाकर सनोज मिश्रा को फंसाया गया और बाद में उसी लड़की ने अदालत में यह स्वीकार किया कि उसने पैसे लेकर झूठे आरोप लगाए थे। इसके बाद अदालत ने सनोज को बरी करते हुए इस तरह के झूठे मामलों पर सवाल उठाए थे, जिससे न्याय प्रणाली पर जनता के भरोसे पर असर पड़ता है।
मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के विचार
अपने जीवन के सबसे बुरे दौर को याद करते हुए सनोज ने बताया कि लगातार मिल रही चुनौतियों के कारण उनकी मानसिक स्थिति बेहद बिगड़ चुकी थी। उन्होंने यहां तक कहा कि कई मौकों पर उनके मन में आत्महत्या करने के विचार आने लगे थे, और इस सबकी वजह से उनकी माता जी भी भयंकर मानसिक तनाव से गुजर रही थीं। यह फिल्म उनके कुल पैंतीस साल के संघर्षपूर्ण करियर का दस्तावेज है। उन्होंने बचपन से ही फिल्म इंडस्ट्री में आने का सपना देखा था और उनका कहना है कि वह पैंतीस साल पहले भी इस सफर में अकेले थे और आज भी तन्हा ही हैं। उन्होंने मोनालिसा को अपनी बेटी का दर्जा दिया था और उसके परिवार के साथ काफी समय भी बिताया था, लेकिन उसके कदमों ने उनके करियर को भारी नुकसान पहुंचाया।
निडर होकर सच्चाई सामने लाने का संकल्प
जीवन में इतने सारे आरोप झेलने के बाद अब निर्देशक का कहना है कि उनके मन से हर प्रकार का डर पूरी तरह निकल चुका है। उन्होंने खुद को एक साधु और आध्यात्मिक स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनकी जिंदगी एक खुली किताब की तरह है और यह फिल्म उसी किताब का एक अहम अध्याय है। वह इस मूवी में खुद मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि फिल्ममेकिंग उनके लिए कोई व्यावसायिक धंधा नहीं है, बल्कि वह एक फकीर की तरह जीवन जीते हैं। उनकी यह कहानी जनता तक पहुंचनी चाहिए, इसलिए इसे पर्दे पर लाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में भरपूर ग्लैमर के साथ-साथ बेहतरीन संगीत का दायरा भी रखा गया है।
दिसंबर में शुरू होगी शूटिंग और निर्माण टीम
यह फिल्म आशिकॉम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाई जा रही है, जिसकी निर्माण कमान एक अनुभवी टीम के हाथों में सौंपी गई है। फिल्म की पटकथा और संवाद दीपक सूथा लिख रहे हैं, जबकि संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी अधीर दत्ता संभाल रहे हैं। इसके अलावा सिनेमैटोग्राफी इकबाल सिंह मेहरोक और संपादन योगेश पांडेय के जिम्मे है। निर्माताओं ने कलाकारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आने वाले इसी साल के दिसंबर महीने में यह फिल्म फ्लोर पर आ जाएगी। खास बात यह है कि इस मूवी की ज्यादातर शूटिंग कृत्रिम सेट की बजाय वास्तविक और रियल लोकेशन पर ही पूरी की जाएगी।



















