बिहार के मिथिलांचल इलाके में सर्दियों की नकदी फसल फूलगोभी पर इस बार अज्ञात कीट का साया मंडरा रहा है। दरभंगा के साथ-साथ समस्तीपुर और मधुबनी जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में किसानों ने बड़े रकबे पर फूलगोभी के नए पौधे लगाए थे। बाजार में अच्छी कीमत की आस लगाए बैठे इन किसानों के सामने अब पौधों को बचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। हाल ही में रोपे गए छोटे पौधों पर एक विचित्र कीट हमला कर रहा है, जो दिन का उजाला और धूप खिलते ही पूरी तरह गायब हो जाता है। इस वजह से खेतों में नुकसान तो साफ दिख रहा है, लेकिन नुकसान पहुंचाने वाला जीव दोपहर में कहीं नजर नहीं आता।
भोर में खेतों में डेरा डाल रहे किसान
कीट के इस रहस्यमयी व्यवहार ने उत्पादकों की नींद उड़ा रखी है। स्थानीय काश्तकारों का अनुभव है कि यह कीट केवल भोर के समय ही पत्तियों पर डेरा जमाए दिखता है। जैसे ही सूरज की किरणें तेज होती हैं, यह पौधों से हटकर कहीं छिप जाता है। इसी कारण काश्तकार अंधेरे में ही टार्च लेकर खेतों की ओर दौड़ रहे हैं ताकि रोशनी फैलने से पहले इसकी गतिविधियों को पकड़ सकें। लगातार निगरानी रखने के बाद भी छोटे पौधे तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं, जिससे पूरी पौधशाला और फसल के चौपट होने की आशंका गहरा गई है।
पत्तियों के निचले हिस्से की जांच जरूरी
इस संकट के बीच डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एस. के. सिंह ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने का मशविरा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोर के वक्त खेतों में जाकर पौधों के पत्तों को उलटकर देखना चाहिए, क्योंकि सुबह के समय यह परजीवी अक्सर पत्ती के पिछले हिस्से पर चिपका रहता है। कीट की शारीरिक बनावट और प्रजाति सुनिश्चित किए बिना खेत में किसी भी रसायन का इस्तेमाल करना व्यर्थ साबित होगा।
दुकानदारों के कहने पर कीटनाशक डालने से बचें
कृषि वैज्ञानिक ने खाद-बीज विक्रेताओं की मौखिक सलाह पर अंधी दवाइयां छिड़कने के चलन पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सचेत किया कि केवल विक्रेता के सुझाव पर अंधाधुंध कीटनाशक डालना आर्थिक नुकसान देने के साथ पौधों को भी झुलसा सकता है। सही तरीका यही है कि किसान कीट का नमूना लेकर या उसकी स्पष्ट तस्वीर कृषि विशेषज्ञों को दिखाएं और कीट की पुष्टि के बाद ही अनुशंसित रसायन का संतुलित उपयोग करें। फिलहाल मिथिलांचल के किसान अपनी मेहनत को सुरक्षित रखने के लिए भोर की पहली किरण के साथ खेतों में डटे हुए हैं।



















