बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की बहुप्रतीक्षित फिल्म सूर्या को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म में चिकित्सा जगत और डॉक्टरों के पेशे को जिस अंदाज में पर्दे पर उतारा गया है, उस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह पूरा विवाद तब भड़का जब 19 अक्टूबर को इस फिल्म का टीजर इंटरनेट पर जारी किया गया। टीजर सामने आते ही मेडिकल बिरादरी में नाराजगी फैल गई और अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
टीजर में जिस तरह की कहानी की झलक दिखाई गई है, उसके केंद्र में सनी देओल का किरदार है। फुटेज के अनुसार, वह एक ऐसे व्यक्ति के रूप में नजर आते हैं जो मूल रूप से यह मानता था कि डॉक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका यह अटूट विश्वास उस समय डगमगाने लगता है जब उनका पाला स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौजूद कथित भ्रष्टाचार और कमियों से पड़ता है। इसके बाद कहानी एक ऐसे संघर्ष का रूप ले लेती है जहाँ नायक चिकित्सा क्षेत्र की उस व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो जाता है जिस पर संकट के समय में मरीजों और उनके परिजनों का शोषण करने का आरोप लगाया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने फिल्म सूर्या – अंत से आरंभ तक के निर्माताओं और तेवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संस्था ने इस सिलसिले में मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से सरकार से यह पुरजोर मांग की गई है कि फिल्म में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के चित्रण पर गंभीरता से विचार किया जाए। आईएमए ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि किस प्रकार फिल्म के दृश्यों में मेडिकल फील्ड की खामियों और कथित भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उछाला गया है। इसके अलावा उन विशेष दृश्यों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है जिनमें स्वास्थ्य पेशेवरों के विरुद्ध हिंसा को बढ़ावा देते हुए या उसे स्वीकार्य रूप में दिखाया गया है। एसोसिएशन की सीधी मांग है कि फिल्म के इन पहलुओं की गहराई से समीक्षा की जाए।
याद दिला दें कि अभिनेता सनी देओल के 69वें जन्मदिन के खास अवसर पर ही इस फिल्म का टीजर पब्लिक के बीच लाया गया था। आधिकारिक रूप से सामने आए विवरणों के मुताबिक, आईएमए ने मंत्री को भेजे गए अपने खत में स्पष्ट रूप से लिखा है कि फिल्म का यह प्रचार सामग्री जनता के मन में पूरे चिकित्सा पेशे की एक बहुत ही नकारात्मक छवि गढ़ सकती है। संगठन का मानना है कि इस तरह के चित्रण से समाज में डॉक्टरों के प्रति सम्मान कम होगा और आम जनता का स्वास्थ्य तंत्र से भरोसा उठ सकता है।
स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
आईएमए द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि वे फिल्म सूर्या – अंत से आरंभ तक में मेडिकल प्रोफेशन के प्रस्तुतिकरण को लेकर बेहद चिंतित हैं। बयान में कहा गया है कि फिल्म के प्रमोशनल विज्ञापनों और टीजर में जिस तरह से स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार को एक सामान्य बात की तरह पेश किया जा रहा है और डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को दर्शाया गया है, वह बेहद खतरनाक है। इससे न केवल आम जनता का डॉक्टरों पर से भरोसा कम होगा, बल्कि देश भर में अस्पतालों और क्लीनिकों में दिन-रात सेवा दे रहे हेल्थकेयर वर्करों की पर्सनल सिक्योरिटी के सामने भी गंभीर खतरे की स्थिति पैदा हो जाएगी।
20 नवंबर को सिनेमाघरों में उतरेगी फिल्म
फिल्म से जुड़े अन्य पहलुओं की बात करें तो यह प्रोजेक्ट मूल रूप से साल 2018 में रिलीज हुई एक सफल मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म जोसेफ का हिंदी रूपांतरण यानी अडेप्टेशन है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस फिल्म में सनी देओल एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी की भूमिका को जीवंत कर रहे हैं जो अनजाने में ही एक ऐसी गहरी जांच के घेरे में आ जाता है जिससे उनके अपने अतीत से जुड़े कई चौंकाने वाले राज परत दर परत बाहर आने लगते हैं। फिल्म के बारे में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि इसकी पटकथा कुछ हद तक सच्ची घटनाओं पर आधारित है और यह आगामी 20 नवंबर 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने पेश की जाएगी।


















