फीफा द्वारा अमेरिकी स्ट्राइकर फोलेरिन बालोगन पर लगे एक मैच के प्रतिबंध को विश्व कप के नॉकआउट चरण से ठीक पहले निलंबित करने का फैसला विवादों में घिर गया है। बेल्जियम के मिडफील्डर निकोलस रस्किन ने स्वीकार किया कि इस फैसले के बाद उनकी टीम के भीतर 'अन्याय की भावना' घर कर गई थी, जिसने उन्हें मैदान पर अपना सब कुछ झोंक देने के लिए प्रेरित किया। 25 वर्षीय बालोगन को पिछले दौर में बोस्निया-हर्जेगोविना के डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक के खिलाफ एक फाउल के लिए सीधा रेड कार्ड दिखाया गया था, जिसके चलते उनका सिएटल में होने वाला अहम मुकाबला मिस करना तय लग रहा था।
मैदान पर दिखा आक्रोश
रविवार को फीफा द्वारा स्वतः लगने वाले प्रतिबंध को 12 महीनों के लिए स्थगित करने के निर्णय ने फुटबॉल जगत में हलचल मचा दी है। इस फैसले की तीखी आलोचना हुई है, जिसमें यूईएफए, इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल और बेल्जियम की टीम ने खुलकर नाराजगी जताई है। रस्किन ने कहा कि पिछले दो दिनों में मैदान के बाहर जो कुछ भी हुआ, उसने टीम को एकजुट किया। कप्तान यूरी टिलेमैन्स ने जोर देकर कहा कि इस पूरे प्रकरण ने उनकी टीम के आत्मविश्वास को और अधिक बढ़ाया है, जिसका असर मैच के दौरान देखने को मिला।
'ट्रंप डांस' और सोशल मीडिया का प्रहार
मैच के दौरान बेल्जियम के खिलाड़ियों का अंदाज काफी आक्रामक था। चौथे गोल के बाद, बेल्जियम के कई खिलाड़ियों को जश्न मनाते हुए देखा गया, जिसमें उन्होंने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति अभियान के दौरान मशहूर हुए 'ट्रंप डांस' की नकल की, जिसमें कूल्हों को हिलाना और हाथों को ऊपर-नीचे करना शामिल है। बेल्जियम की राष्ट्रीय टीम के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट ने भी इस घटना का मजाक उड़ाया, जिसमें स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू की एक तस्वीर पोस्ट की गई। उस तस्वीर में लुकाकू अपने कानों को ढके हुए थे और कैप्शन लिखा था 'इसे पलट कर दिखाओ' (overturn this)।
कोच और फीफा का रुख
बेल्जियम के मुख्य कोच रूडी गार्सिया ने बताया कि मैच के बाद बालोगन ने उनसे बातचीत की थी। गार्सिया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने खिलाड़ी से कहा कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। गार्सिया के अनुसार, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उनकी टीम की योजना और परिपक्वता थी। उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा कि उन्होंने फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से समीक्षा करने का आग्रह किया था क्योंकि उन्हें नहीं लगता था कि वह कोई फाउल था। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने किसी को प्रतिबंध हटाने का निर्देश नहीं दिया था, लेकिन यह सही फैसला था।
विवाद का व्यापक असर
ईरान ने भी इस पूरे वाकये पर तंज कसते हुए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बेल्जियम के साथ अपने ड्रॉ का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने संदेश लिखा कि अब पूरी दुनिया फुटबॉल के सामने राजनीति की अपमानजनक हार पर नाच रही है। रॉयल बेल्जियम फुटबॉल एसोसिएशन (RBFA) ने इस फैसले पर गहरा आश्चर्य जताया था, लेकिन उनकी अपील को फीफा की एक समिति ने यह कहकर खारिज कर दिया कि वे इस फैसले में कोई हितधारक नहीं हैं। इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल ने इसे एक खतरनाक मिसाल करार दिया, जबकि यूईएफए ने कहा कि यह कार्रवाई 'लाल रेखा' पार करने जैसा है। इतिहास में 189 रेड कार्ड के मामलों में केवल 1962 में ब्राजील के गैरिंचा को ऐसे प्रतिबंध से छूट मिली थी, जब स्वतः प्रतिबंध जैसी व्यवस्था लागू नहीं थी।











