फुटबॉल के मैदान पर अपनी कलाकारी से जादू बिखेरने वाले लियोनेल मेसी का सफर किसी भी इंसान को प्रेरित करने के लिए काफी है। एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास उनके इलाज के लिए पैसे जुटाना तक मुश्किल हो गया था, लेकिन आज वह दुनिया के दूसरे सबसे अमीर फुटबॉलर हैं जिनकी अनुमानित नेटवर्थ लगभग 1.1 अरब डॉलर है। उनके नाम पर कुल 46 टीम ट्रॉफियां और 8 बैलन डी’ओर दर्ज हैं। उनका जन्म 24 जून 1987 को अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में हुआ था। उनके पिता जॉर्ज मेसी एक स्टील प्लांट में नौकरी करते थे और मां सेलिया भी काम करती थीं। घर के हालात ऐसे नहीं थे कि खेलकूद पर बेतहाशा पैसा खर्च किया जा सके, लेकिन मेसी में फुटबॉल के प्रति जो नैसर्गिक लगन थी, वह उन्हें बाकी बच्चों से बिल्कुल जुदा करती थी।
नानी की जिद और मैदान पर पहला कदम
महज चार साल की उम्र में उन्होंने स्थानीय क्लब ग्रांडोली के साथ अपने खेल की शुरुआत की थी। उनकी नानी सेलिया ही उन्हें सबसे पहले मैदान पर लेकर गई थीं। शुरुआत में कोच को उनका कद बहुत छोटा लगा और उन्हें खेलने का मौका देने को लेकर संशय था, लेकिन नानी के अड़ियल और मजबूत समर्थन के बाद उन्हें मैदान पर उतरने दिया गया। खेल शुरू होते ही मेसी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। आज भी उनके हर गोल के बाद आसमान की तरफ दोनों हाथ उठाने के पीछे अपनी दिवंगत नानी को याद करने की भावना जुड़ी होती है।
बचपन के शुरुआती रिकॉर्ड और बीमारी का संकट
छह साल की उम्र में उन्होंने न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज क्लब का दामन थाम लिया और युवा टीम ला माकीना डेल 87 का हिस्सा बने। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने इस युवा टीम के लिए 176 मुकाबलों में 234 गोल दागे। हालांकि कुछ अन्य सूत्रों में विभिन्न युवा प्रतियोगिताओं को मिलाकर 500 गोल तक का जिक्र मिलता है, लेकिन 234 गोल का आंकड़ा सबसे पुख्ता माना जाता है। इसी दौरान उनके जीवन में एक बहुत बड़ी चिकित्सीय बाधा आ गई। करीब दस साल की उम्र में उन्हें ग्रोथ हार्मोन की कमी होने की बात सामने आई। इस बीमारी से उबरने के लिए नियमित तौर पर हार्मोन के इंजेक्शन लगवाने जरूरी थे, जिसका खर्च लगभग 1,000 डॉलर प्रति माह बैठता था। एक साधारण स्टील वर्कर के लिए इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना असंभव सा प्रतीत होता था।
अर्जेंटीना में बंद हुए दरवाजे और स्पेन का रुख
शुरुआत में न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज क्लब ने इलाज में कुछ मदद की, लेकिन लंबे समय तक पूरा खर्च उठा पाने में वे असमर्थ रहे। रिवर प्लेट क्लब ने भी उनकी प्रतिभा को परखा, मगर उनके इलाज का वित्तीय बोझ उठाने से हाथ खड़े कर दिए। यहीं से उनके पेशेवर जीवन का सबसे बड़ा निर्णायक मोड़ आया। साल 2000 में जब वह 13 वर्ष के थे, तब उन्हें स्पेन के बार्सिलोना में ट्रायल का बुलावा मिला। क्लब के तत्कालीन स्पोर्टिंग डायरेक्टर कार्लेस रेक्साक उनकी अद्भुत प्रतिभा से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने 14 दिसंबर 2000 को एक टेनिस क्लब के नैपकिन पर ही मेसी को साइन करने की बात लिखित रूप में दर्ज कर दी। यह साधारण सा नैपकिन आगे चलकर फुटबॉल के इतिहास का सबसे अमूल्य और ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया। बार्सिलोना ने उनके हार्मोन इलाज का पूरा खर्च उठाने का बीड़ा उठाया और उनके परिवार के लिए स्पेन जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
नई दुनिया में अकेलापन और संघर्ष
अपनी मातृभूमि अर्जेंटीना को छोड़कर तेरह साल की कच्ची उम्र में स्पेन पहुंचना एक बच्चे के लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन था। उन्हें अपने पुराने दोस्तों और परिवार से दूर होना पड़ा। अनजान भाषा, नया देश और पूरी तरह बदला हुआ परिवेश उनके सामने था। इन सारी कठिनाइयों के बीच उन्होंने फुटबॉल को ही अपना इकलौता हमसफर बनाया। बार्सिलोना की अकादमिक व्यवस्था के भीतर उन्होंने तेजी से तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं। साल 2004 में मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने मुख्य सीनियर टीम के लिए अपना पहला मैच खेला और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बार्सिलोना के साथ अपने कार्यकाल में उन्होंने 10 ला लीगा और 4 चैंपियंस लीग की ट्रॉफियां अपने नाम कीं। इसके अलावा उन्होंने 2012 के एक ही कैलेंडर वर्ष के दौरान 91 गोल दागकर एक ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया।
कमजोरी को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत
इस महान खिलाड़ी की जीवनी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस छोटे कद को कभी उनकी सबसे बड़ी कमजोरी समझा जाता था, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। कम कद और बेहद निचले सेंटर ऑफ ग्रेविटी की वजह से उनका गेंद पर असाधारण नियंत्रण रहता था, जिसे रोकना विरोधी डिफेंस के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों की फेहरिस्त भी लंबी होती गई। वह आठ बार प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर अपने नाम कर चुके हैं। अपने देश अर्जेंटीना के लिए खेलते हुए उन्होंने 2021 और 2024 का कोपा अमेरिका, 2022 का फाइनलिस्टिमा और सबसे अहम 2022 का फीफा विश्व कप जीता। साल 2022 का यह विश्व कप वह ट्रॉफी थी जिसके लिए उन्हें अपने करियर के अंतिम पड़ाव तक लंबा इंतजार करना पड़ा था। साल 2026 तक उनके नाम कुल 46 टीम ट्रॉफियां हो चुकी हैं। इंटर मियामी क्लब ने उन्हें खेल इतिहास का सबसे ज्यादा ट्रॉफियां जीतने वाला खिलाड़ी करार दिया है।
फुटबॉल से वैश्विक व्यापार और अरबपतियों की सूची तक
मेसी की कुल संपत्ति केवल मैदान पर मिलने वाली सैलरी तक ही सीमित नहीं है। फोर्ब्स पत्रिका के आंकड़ों के मुताबिक उनके पूरे करियर की ऑन और ऑफ फील्ड कुल कमाई लगभग 1.8 अरब डॉलर आंकी गई है। उनके पास खेल सामान बनाने वाली दिग्गज कंपनी एडिडास के साथ लाइफटाइम डील मौजूद है। इसके अलावा मास्टरकार्ड, पेप्सीको और लोव्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ उनकी व्यावसायिक साझेदारियां रही हैं। इंटर मियामी के साथ उनका वर्तमान अनुबंध 2028 के एमएलएस सीजन के समापन तक का है। फोर्ब्स के मुताबिक साल 2026 में उनकी मैदान के भीतर की कमाई लगभग 70 मिलियन डॉलर और मैदान के बाहर की कमाई भी करीब 70 मिलियन डॉलर आंकी गई है। इस अनुबंध पैकेज में क्लब में भविष्य की हिस्सेदारी हासिल करने का विकल्प भी शामिल है। उनके इंटर मियामी से जुड़ने के बाद इस क्लब के मूल्यांकन में भी जबरदस्त उछाल आया है और 2026 के आकलन में क्लब की कुल वैल्यू लगभग 1.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।



















