फुटबॉल की बात हो और लियोनेल मेसी का नाम न आए, ऐसा मुमकिन ही नहीं. मैदान पर उनकी उपलब्धियों ने दुनियाभर के फैंस को इतना दीवाना बना दिया है कि हर कोई अपने बच्चे में उनकी झलक देखना चाहता है. यही वजह है कि कई मां-बाप बच्चों का नाम भी इस महान फुटबॉलर के नाम पर रखना चाहते हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुद मेसी के गृहनगर रोसारियो में बच्चों का नाम मेसी रखना कानूनन बंद है.
2014 के बाद रोसारियो में नहीं जन्मा कोई नया मेसी
साल 2014 के बाद से अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में किसी बच्चे का आधिकारिक नाम मेसी नहीं रखा जा सका है. जरूरी नहीं कि यह कानून मेसी को अपमानित करने या खास सम्मान देने के लिए बनाया गया हो. असल वजह बेहद व्यावहारिक है. रोसारियो में मेसी के नाम पर इतने ज्यादा बच्चे पैदा होने लगे कि प्रशासन को मजबूरन एक स्थानीय नियम बनाना पड़ा, ताकि इस चलन पर लगाम लगाई जा सके.
सरनेम को फर्स्ट नेम बनाने पर क्यों है रोक
यह फैसला अर्जेंटीना के राष्ट्रीय कानून सिविल स्टेटस रजिस्ट्रेशन एक्ट 1969 की धारा 3.3 के तहत लिया गया है. इस धारा के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के सरनेम को बच्चे के फर्स्ट नेम के तौर पर रखना अवैध माना गया है. इसके पीछे मकसद सिर्फ इतना है कि सरकारी रिकॉर्ड में किसी तरह की उलझन या भ्रम पैदा न हो. चूंकि मेसी असल में एक सरनेम है, इसलिए इसे किसी बच्चे के पहले नाम के रूप में इस्तेमाल करना कानूनी रूप से मान्य नहीं है. यह नियम पूरे अर्जेंटीना में लागू है, लेकिन रोसारियो में इसे और भी सख्ती से लागू किया जाता है, क्योंकि यहीं मेसी का घर है और यहीं उनके नाम की मांग सबसे ज्यादा रहती है.
2018 में बढ़ी चिंता, प्रशासन ने कसी नकेल
रोसारियो के सिविल रजिस्ट्री अधिकारी समय-समय पर सार्वजनिक बयान जारी करते रहे हैं, जिनमें साफ कहा जाता है कि लोग अपने बच्चों का नाम मेसी न रखने की कोशिश करें. साल 2018 के आसपास शहर में मेसी नाम वाले बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि स्थानीय प्रशासन के लिए यह चिंता का विषय बन गया. एक ही शहर में सैकड़ों बच्चों का नाम मेसी होने से स्कूल, अस्पताल, बैंक और तमाम सरकारी दस्तावेजों में पहचान से जुड़ी परेशानियां खड़ी होने लगी थीं. यही वजह रही कि प्रशासन ने इस पर सख्ती से रोक लगाने का फैसला किया.
जब एक फैन ने कानूनी लड़ाई में मात दे दी
सख्त कानून के बावजूद कुछ जिद्दी मेसी प्रेमी इसे तोड़ने में कामयाब भी हुए हैं. 2014 विश्व कप के ठीक बाद रियो नेग्रो प्रांत में एक कट्टर फैन ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अपने बेटे का नाम मेसी डेनियल वरेला रखने की अनुमति हासिल कर ली. उस वक्त यह मामला खूब चर्चा में रहा था. हालांकि यह छूट सिर्फ उसी एक परिवार के लिए मिली थी, पूरे देश में सरनेम को फर्स्ट नेम बनाने पर रोक का नियम आज भी पहले जैसा ही लागू है.
मेसी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा सबूत
अर्जेंटीना में सरनेम को बच्चे के पहले नाम के तौर पर रखने से स्कूल, अस्पताल, बैंक और सरकारी दस्तावेजों में लगातार गड़बड़ी और भ्रम की स्थिति बन रही थी. एक ही शहर में सैकड़ों मेसी होने से हर किसी की अलग पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता, इसलिए सरकार ने समय रहते इस पर रोक लगाने का फैसला लिया. असल में यह पूरा मामला खुद मेसी की अपार लोकप्रियता का जीता-जागता सबूत है. अर्जेंटीना के लाखों मां-बाप अपने बच्चे में मेसी जैसा जुनून, जज्बा और प्रतिभा देखना चाहते थे, लेकिन कानून ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. आज भी मेसी के दीवाने चुपके-चुपके यह नाम रखने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में रजिस्ट्री अधिकारी साफ इनकार कर देते हैं.











