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नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेने के बाद पुराने स्टॉक पर टैक्स क्रेडिट कैसे बचाएं जानें फॉर्म ITC-01 फाइल करने के नियमगाइड
3 घंटे पहले· 5

नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेने के बाद पुराने स्टॉक पर टैक्स क्रेडिट कैसे बचाएं जानें फॉर्म ITC-01 फाइल करने के नियम

नया जीएसटी पंजीकरण कराने वाले या कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलने वाले करदाता फॉर्म ITC-01 का उपयोग करके अपने पुराने स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। समय पर सही फाइलिंग करने से कार्यशील पूंजी बचती है और भविष्य की कर देनदारी कम होती है।

Ravikash GuptaRavikash GuptaSenior Correspondent 12 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जब कोई व्यवसाय भारत की वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में कदम रखता है या अपने टैक्स रजिस्ट्रेशन की स्थिति में बदलाव करता है, तो उसके पास मौजूद स्टॉक का प्रबंधन एक गंभीर वित्तीय चिंता का विषय बन जाता है। भारत के GST ढांचे के भीतर, इस संक्रमणकालीन चरण को सुचारू बनाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है, जिसे फॉर्म ITC-01 कहा जाता है। यह डिक्लेरेशन फॉर्म एक वित्तीय लाइफलाइन की तरह काम करता है, जो नए पंजीकृत करदाताओं और स्थिति में बदलाव करने वाले व्यवसायों को उनके मौजूदा स्टॉक पर पहले चुकाए गए टैक्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूप में वापस पाने की अनुमति देता है। यदि यह व्यवस्थित प्रक्रिया उपलब्ध न हो, तो कच्चे माल, अर्ध-निर्मित माल और तैयार माल के स्टॉक में फंसा हुआ मूल्यवान टैक्स क्रेडिट हमेशा के लिए डूब जाएगा, जिससे नए पंजीकृत व्यवसायों पर भारी वित्तीय नुकसान का बोझ पड़ेगा।

GST व्यवस्था के तहत फॉर्म ITC-01 को समझना

फॉर्म GST ITC-01 एक आधिकारिक डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे करदाताओं को एक निश्चित कट-ऑफ तारीख पर अपने पास मौजूद स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए आधिकारिक GST पोर्टल पर दाखिल करना होता है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम की धारा 18(1) के तहत संचालित यह फॉर्म एक कानूनी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से पुराने इनपुट टैक्स को सीधे करदाता के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में ट्रांसफर किया जाता है।

जब भी कोई व्यवसाय GST सिस्टम में प्रवेश करता है या अपना टैक्स स्टेटस बदलता है, तो उसके पास कच्चे माल, अर्ध-निर्मित माल या पूरी तरह से तैयार उत्पादों का कुछ स्टॉक हमेशा मौजूद रहता है। चूंकि इन सामानों की खरीद के समय पहले ही कर का भुगतान किया जा चुका होता है, इसलिए फॉर्म ITC-01 यह सुनिश्चित करता है कि उन पहले से चुकाए गए टैक्स को आधिकारिक मान्यता मिले और उन्हें भविष्य की कर देनदारियों को चुकाने के लिए उपयोगी क्रेडिट में बदल दिया जाए।

फॉर्म ITC-01 का मुख्य उद्देश्य और इसकी अनिवार्यता

GST प्रणाली का मूल सिद्धांत टैक्स के ऊपर टैक्स (कैस्केडिंग इफेक्ट) लगने की व्यवस्था को समाप्त करना है। फॉर्म ITC-01 को विशेष रूप से इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। व्यावसायिक बदलाव के दौरान यह फॉर्म मुख्य रूप से तीन वजहों से आवश्यक है।

पहला, यह वैध क्रेडिट को डूबने से बचाता है। यदि यह फॉर्म उपलब्ध न हो, तो नया रजिस्ट्रेशन लेने से ठीक पहले खरीदे गए स्टॉक पर चुकाया गया टैक्स आपके व्यवसाय की लागत बन जाएगा और इसे कभी वापस नहीं पाया जा सकेगा। फॉर्म ITC-01 यह सुनिश्चित करता है कि आपका यह वैध टैक्स क्रेडिट सुरक्षित रहे।

दूसरा, यह शुरुआत से ही सही अनुपालन का आधार तैयार करता है। यह व्यवसायों को अपने शुरुआती स्टॉक के टैक्स क्रेडिट की घोषणा करने के लिए एक व्यवस्थित और कानूनी रूप से प्रमाणित तरीका देता है। इससे GST पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल क्रेडिट का विवरण और आपके पास मौजूद वास्तविक स्टॉक का मूल्य आपस में पूरी तरह मेल खाते हैं।

तीसरा, यह टैक्स की स्थिति में बदलाव के समय वित्तीय सुरक्षा देता है। बिजनेस लगातार बढ़ते और बदलते रहते हैं। यदि आप कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलकर रेगुलर GST स्कीम में आ रहे हैं, या आपके पहले से कर-मुक्त उत्पाद अब टैक्स के दायरे में आ गए हैं, तो फॉर्म ITC-01 आपके संचित टैक्स क्रेडिट को सुरक्षित रखने के लिए एक वित्तीय सेतु का काम करता है।

फॉर्म ITC-01 दाखिल करने के लिए कौन पात्र है?

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि फॉर्म GST ITC-01 कोई सामान्य फॉर्म नहीं है जिसे कोई भी पंजीकृत व्यवसाय कभी भी फाइल कर सके। GST पोर्टल पर इस फॉर्म को भरने की अनुमति केवल उन्हीं करदाताओं को मिलती है जो CGST अधिनियम की धारा 18(1) के तहत दी गई चार विशिष्ट परिस्थितियों में आते हैं। यदि आपका व्यवसाय इन चार कानूनी श्रेणियों में से किसी में नहीं आता है, तो पोर्टल आपके दावे को स्वतः ही खारिज कर देगा।

पहला परिदृश्य उन व्यवसायों का है जिन्हें अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होता है। जब किसी बिजनेस का सालाना टर्नओवर तय सीमा को पार कर जाता है, तो उसके लिए GST रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो जाता है। यदि ऐसा बिजनेस अपनी पात्रता शुरू होने के 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर देता है, तो वह फॉर्म ITC-01 दाखिल करने का हकदार होता है। इसके जरिए वह अपनी कर देनदारी शुरू होने की तारीख से ठीक एक दिन पहले के कच्चे माल, अर्ध-निर्मित माल और तैयार माल पर ITC का दावा कर सकता है।

दूसरा परिदृश्य स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन कराने वाले करदाताओं पर लागू होता है। कई छोटे व्यवसाय अपनी मर्जी से GST रजिस्ट्रेशन लेते हैं ताकि वे अपने B2B ग्राहकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दे सकें। ऐसे व्यवसायों को रजिस्ट्रेशन मिलने की आधिकारिक तारीख से ठीक एक दिन पहले के स्टॉक पर फॉर्म ITC-01 के माध्यम से क्रेडिट का दावा करने की अनुमति होती है।

तीसरा परिदृश्य उन करदाताओं पर लागू होता है जो कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलते हैं। कंपोजिशन स्कीम में आसान नियमों के साथ टैक्स भरने की सुविधा तो मिलती है, लेकिन करदाताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलता। जब कोई व्यवसाय कंपोजिशन स्कीम को छोड़कर रेगुलर स्कीम अपनाता है, तो उसे दोबारा ITC का अधिकार मिल जाता है। फॉर्म ITC-01 की मदद से ऐसे व्यवसाय स्कीम बदलने की तारीख से ठीक एक दिन पहले के स्टॉक और कैपिटल गुड्स दोनों पर इनपुट क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

चौथा परिदृश्य तब लागू होता है जब पहले से कर-मुक्त सामान या सेवाएं टैक्स के दायरे में आ जाती हैं। यदि कोई व्यवसाय पहले केवल ऐसी वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री करता था जिन पर GST नहीं लगता था, तो वह अपनी खरीदारी पर इनपुट क्रेडिट का दावा नहीं कर सकता था। लेकिन यदि सरकार की अधिसूचना के कारण या बिजनेस मॉडल बदलने की वजह से वे सामान टैक्स के दायरे में आ जाते हैं, तो वह व्यवसाय फॉर्म ITC-01 दाखिल कर सकता है। इससे उन नए कर-योग्य सामानों से संबंधित इनपुट और कैपिटल गुड्स पर पहले से अटका हुआ इनपुट क्रेडिट अनलॉक हो जाता है।

फॉर्म ITC-01 के तहत किस प्रकार के क्रेडिट का दावा किया जा सकता है?

फॉर्म ITC-01 के माध्यम से केवल कुछ खास श्रेणियों के इनपुट टैक्स क्रेडिट का ही दावा किया जा सकता है, और इसके लिए सख्त नियमों व दस्तावेजी प्रमाणों की आवश्यकता होती है। इन श्रेणियों को समझकर आप अपने वैध दावों को सुरक्षित कर सकते हैं और पोर्टल द्वारा नामंजूर किए जाने से बच सकते हैं।

स्टॉक में मौजूद इनपुट

  • कट-ऑफ तारीख पर आपके पास जो कच्चा माल बिना इस्तेमाल के पड़ा है, आप उस पर क्रेडिट ले सकते हैं।
  • इसके लिए आपके पास वैध टैक्स इनवॉइस होने चाहिए जो जारी होने की तारीख से एक वर्ष से अधिक पुराने न हों।
  • यह कच्चा माल केवल कर-योग्य सामान बनाने के लिए इस्तेमाल होना चाहिए।

अर्ध-निर्मित या तैयार माल में शामिल इनपुट

  • कई बार कच्चा माल उत्पादन प्रक्रिया में चला जाता है और वह आधा तैयार या पूरी तरह से तैयार होकर गोदाम में रखा होता है।
  • आप इन सामानों पर भी इनपुट क्रेडिट का दावा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको इन उत्पादों में इस्तेमाल हुए कच्चे माल की टैक्स वैल्यू की सही गणना करनी होगी।
  • व्यवसाय के पास ऐसे दस्तावेज़ होने चाहिए जो इन तैयार या अर्ध-तैयार सामानों में लगे कच्चे माल को उनके मूल इनवॉइस से जोड़कर साबित कर सकें।

कैपिटल गुड्स पर क्रेडिट

  • कैपिटल गुड्स पर ITC का दावा केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जैसे जब कोई करदाता कंपोजिशन स्कीम से रेगुलर स्कीम में जा रहा हो, या फिर उसकी कर-मुक्त वस्तुएं टैक्स के दायरे में आ गई हों।
  • इस दावे पर डेप्रिसिएशन के नियम लागू होते हैं, जिसके तहत इनवॉइस की तारीख से प्रति तिमाही या उसके किसी हिस्से के लिए क्रेडिट में 5% की कटौती की जाती है।
  • पहले इस्तेमाल की गई अवधि के आधार पर अधिकतम दावा योग्य क्रेडिट कम हो जाता है।

ध्यान दें: किसी भी प्रकार की सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स का दावा फॉर्म ITC-01 के माध्यम से नहीं किया जा सकता है। यह प्रतिबंध पूरी तरह से लागू है, चाहे सेवाएं कभी भी ली गई हों या उनका आपके वर्तमान स्टॉक से कितना भी गहरा संबंध क्यों न हो।

महत्वपूर्ण कट-ऑफ तारीख और समय सीमा

कट-ऑफ तारीख वह निश्चित समय बिंदु है जिसके आधार पर आपके भौतिक स्टॉक का मूल्यांकन और दस्तावेजीकरण किया जाता है। यह तारीख आपके रजिस्ट्रेशन की स्थिति पर निर्भर करती है। अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराने वालों के लिए, यह उनकी टैक्स देनदारी शुरू होने की तारीख से ठीक एक दिन पहले की तारीख होती है। स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन करने वालों के लिए, यह रजिस्ट्रेशन मिलने की तारीख से ठीक एक दिन पहले की तारीख होती है। इसी तरह कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलने वालों के लिए, यह स्कीम बदलने से ठीक एक दिन पहले की तारीख होती है। यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी से तय होता है कि आपके कौन से इनवॉइस और स्टॉक इनपुट क्रेडिट के लिए पात्र माने जाएंगे।

फॉर्म ITC-01 को दाखिल करने की समय सीमा बहुत सख्त है। करदाताओं को पात्रता की तारीख से 30 दिनों के भीतर यह फॉर्म जमा करना होता है। यदि आप इस 30 दिनों की अवधि के भीतर फॉर्म दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो आप इनपुट क्रेडिट का दावा करने का अधिकार पूरी तरह से खो देंगे। GST नियमों में इस अवधि को बढ़ाने या देरी से फॉर्म जमा करने का कोई विकल्प नहीं दिया गया है।

फॉर्म ITC-01 दाखिल करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

फॉर्म ITC-01 भरने के लिए बहुत सावधानी और सटीक आंकड़ों की आवश्यकता होती है। GST पोर्टल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से फॉर्म भरने की सुविधा देता है। आप अपनी सुविधा और इनवॉइस की संख्या के आधार पर सही तरीका चुन सकते हैं।

GST पोर्टल पर ऑनलाइन फाइलिंग

  • सबसे पहले अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके पोर्टल पर जाएं।
  • इसके बाद सर्विसेज मेनू में जाएं, फिर रिटर्न्स पर क्लिक करें और वहां ITC फॉर्म्स के विकल्प में जाकर फॉर्म ITC-01 को चुनें।
  • यहाँ आप फॉर्म को ऑनलाइन तैयार कर सकते हैं या ऑफलाइन टूल से तैयार की गई फाइल को अपलोड कर सकते हैं।
  • इसके बाद आपको कट-ऑफ तारीख के अनुसार स्टॉक, इनवॉइस विवरण और टैक्स की सही राशि दर्ज करनी होगी।
  • पूरी जानकारी भरने के बाद विवरण की अच्छी तरह से जांच कर लें और फॉर्म को फ्रीज कर दें ताकि उसमें कोई गलती से बदलाव न हो सके।
  • अंत में, DSC या EVC का उपयोग करके फॉर्म को जमा करें।

ऑफ़लाइन यूटिलिटी टूल का उपयोग करके फाइलिंग

  • पोर्टल से ऑफलाइन टूल डाउनलोड करें और बिना इंटरनेट के अपने कंप्यूटर पर सभी स्टॉक और इनवॉइस का विवरण भरें।
  • डेटा की जांच करने के बाद यह टूल एक JSON फाइल तैयार करेगा जिसे आपको सुरक्षित रखना होगा।
  • इसके बाद GST पोर्टल पर लॉगिन करें, इस JSON फाइल को फॉर्म ITC-01 में अपलोड करें, डेटा को सत्यापित करें और फिर DSC या EVC के जरिए फॉर्म को फाइल कर दें।
  • यह तरीका उन व्यवसायों के लिए सबसे उपयुक्त है जिनके पास बहुत सारे इनवॉइस हैं या जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है।

क्या आप जानते हैं? यदि फॉर्म ITC-01 के माध्यम से दावा किया जा रहा कुल इनपुट टैक्स क्रेडिट ₹2,00,000 से अधिक है, तो करदाता को किसी अभ्यास कर रहे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या कॉस्ट अकाउंटेंट (CMA) से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इस सर्टिफिकेट को अपलोड किए बिना पोर्टल पर फॉर्म सबमिट नहीं होगा।

दाखिला खारिज होने से बचने के लिए इन गलतियों से दूर रहें

फॉर्म ITC-01 दाखिल करते समय की गई छोटी सी भूल भी आपका पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट रद्द करवा सकती है। इसलिए व्यवसायों को इन आम गलतियों से बचना चाहिए:

  • 30 दिनों की समय सीमा के बाद फॉर्म दाखिल करना: इसके परिणामस्वरूप पात्र ITC का स्थायी नुकसान होता है और देर से दाखिल करने के लिए कोई विकल्प नहीं मिलता है।
  • सेवाओं पर क्रेडिट का दावा करना: इस फॉर्म के तहत सेवाओं को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है, इसलिए सेवाओं के इनवॉइस शामिल करने पर पूरा दावा खारिज हो सकता है।
  • इनवॉइस की अधूरी या गलत जानकारी देना: यदि इनवॉइस नंबर, तारीख या टैक्स की राशि में कोई गड़बड़ी होती है, तो आपका दावा अटक सकता है या खारिज हो सकता है।
  • CA या कॉस्ट अकाउंटेंट का सर्टिफिकेट अपलोड न करना: ₹2 लाख से अधिक के दावों पर यदि सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया गया, तो फॉर्म प्रोसेस नहीं हो पाएगा।
  • अपात्र सामानों को शामिल करना: व्यक्तिगत उपयोग की चीजें, टैक्स-फ्री सामान बनाने में इस्तेमाल होने वाला स्टॉक या धारा 17(5) के तहत प्रतिबंधित सामानों पर क्रेडिट का दावा न करें।
  • कट-ऑफ तारीख की गलत गणना करना: यदि आप अपने बिजनेस के अनुसार सही संदर्भ तारीख का उपयोग नहीं करते हैं, तो आपका पूरा दावा अमान्य हो सकता है।

सही तरीके से फॉर्म ITC-01 फाइल करने के व्यावसायिक फायदे

यदि आप सही नियमों के साथ समय पर फॉर्म ITC-01 दाखिल करते हैं, तो इससे आपके व्यवसाय को कई महत्वपूर्ण फायदे होते हैं:

  • वैध टैक्स क्रेडिट की सुरक्षा: रजिस्ट्रेशन से पहले स्टॉक पर चुकाया गया टैक्स आपके बिजनेस की एक बड़ी पूंजी होती है। इस फॉर्म को सही से भरने पर वह पैसा आपको वापस मिल जाता है जिससे व्यावसायिक लागत कम होती है।
  • शुरुआती क्रेडिट बैलेंस की सही शुरुआत: इससे आपके इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में शुरुआती क्रेडिट बैलेंस बिल्कुल सही दर्ज होता है। यह साफ-सुथरी शुरुआत भविष्य के टैक्स रिटर्न और मिलान को बहुत आसान बना देती है।
  • भविष्य की कर देनदारियों में कमी: दावा किया गया क्रेडिट आपकी भविष्य की टैक्स देनदारी को सीधे कम कर देता है। आपको अपनी जेब से नकद टैक्स देने के बजाय इस संचित क्रेडिट का उपयोग करने की सुविधा मिलती है।
  • कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) का सुचारू होना: पहले से चुकाए गए टैक्स के रूप में फंसी हुई पूंजी वापस मिलने से व्यवसाय के पास पर्याप्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध हो जाती है, जिससे दैनिक कार्यों का संचालन आसान हो जाता है।
  • कर अधिकारियों के सामने बेहतर साख: नियमों के अनुसार की गई फाइलिंग और सीए सर्टिफिकेट कर अधिकारियों के सामने आपके व्यवसाय की साख को मजबूत करते हैं। इससे टैक्स ऑडिट या विभाग की ओर से जांच नोटिस आने की आशंका काफी कम हो जाती है।

निष्कर्ष

फॉर्म ITC-01 भारतीय GST व्यवस्था के तहत एक बहुत ही फायदेमंद साधन है जो नए और बदलाव करने वाले व्यवसायों को उनके पुराने इनपुट टैक्स क्रेडिट को सुरक्षित रखने का अवसर देता है। हालांकि, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए नियमों की सही समझ, समय सीमा का पालन और सटीक दस्तावेजीकरण आवश्यक है। यदि आप सामान्य गलतियों से बचते हुए ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीकों से सही ढंग से फाइलिंग करते हैं, तो आप अपने बिजनेस को GST के अनुपालन के साथ-साथ एक मजबूत वित्तीय मजबूती भी प्रदान कर सकते हैं।

इसका आप पर असर

  • व्यवसायों के लिए: नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेने वाले कारोबारी अपने पुराने स्टॉक पर चुकाए गए टैक्स को फॉर्म ITC-01 के जरिए वापस पा सकते हैं, जिससे उनका वर्किंग कैपिटल ब्लॉक होने से बचता है।
  • वित्तीय बचत: यदि आपका दावा ₹2 लाख से अधिक है, तो समय पर चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाण पत्र प्राप्त कर इसे फाइल करने से आपकी भविष्य की टैक्स देनदारी सीधे कम हो जाती है।

सवाल-जवाब

फॉर्म ITC-01 क्या है?
फॉर्म ITC-01 एक जीएसटी घोषणा फॉर्म है जिसका उपयोग नया रजिस्ट्रेशन लेने वाले या अपनी टैक्स स्थिति बदलने वाले करदाता अपने पास मौजूद स्टॉक पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करने के लिए करते हैं।
फॉर्म ITC-01 कौन दाखिल कर सकता है?
यह फॉर्म चार श्रेणियों के करदाता भर सकते हैं: अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराने वाले (30 दिनों के भीतर आवेदन करने पर), स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन कराने वाले, कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलने वाले, और वे करदाता जिनकी कर-मुक्त वस्तुएं अब कर-योग्य हो गई हैं।
फॉर्म ITC-01 दाखिल करने की समय सीमा क्या है?
इस फॉर्म को संबंधित पात्रता मिलने (जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलने या कंपोजिशन स्कीम से बाहर निकलने) की तारीख से 30 दिनों के भीतर दाखिल करना अनिवार्य है।
क्या मैं सेवाओं (सर्विसेज) पर चुकाए गए टैक्स का दावा ITC-01 के जरिए कर सकता हूं?
नहीं, फॉर्म ITC-01 केवल भौतिक वस्तुओं जैसे कच्चे माल, अर्ध-निर्मित माल और तैयार माल के स्टॉक पर क्रेडिट के दावे के लिए है। इसमें सेवाओं को शामिल करने की अनुमति नहीं है।
क्या फॉर्म ITC-01 फाइल करने के लिए सीए (CA) सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है?
हाँ, यदि आपके द्वारा दावा किया जा रहा कुल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) से अधिक है, तो चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट का प्रमाण पत्र अपलोड करना आवश्यक होता है।
यदि मैं 30 दिनों की समय सीमा के भीतर फॉर्म दाखिल नहीं कर पाता हूं तो क्या होगा?
यदि आप 30 दिनों की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आप उस इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने का अधिकार स्थायी रूप से खो देंगे। जीएसटी नियमों के तहत इसके लिए कोई विलंब शुल्क देकर देर से दाखिल करने की व्यवस्था नहीं है।
#गाइड#जीएसटीरजिस्ट्रेशन#इनपुटटैक्सक्रेडिट#जीएसटीपोर्टल#टैक्सगाइड#बिजनेसटैक्सअनुपालन#फॉर्मआईटीसी01

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