ब्रिटिश सिनेमा और टेलीविजन जगत में अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता ऐशले वॉल्टर्स अब एक नई भूमिका में दर्शकों के सामने आ रहे हैं। संगीत समूह सो सॉलिड क्रू के दिनों से लेकर चर्चित धारावाहिकों में अपनी दमदार अदाकारी तक, वॉल्टर्स का सफर कई उतार चढ़ाव से भरा रहा है। अब वह अपनी पहली फीचर फिल्म एलिमोल के साथ बतौर निर्देशक अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं। यह फिल्म एक संवेदनशील और कठिन जेल ड्रामा है, जिसके केंद्र में एक अप्रत्याशित प्रेम कहानी मौजूद है।
अपनी इस नई यात्रा और जीवन के पिछले अनुभवों पर बात करते हुए वॉल्टर्स ने बताया कि निर्देशन का विचार उनके मन में तब आया जब उन्हें बताया गया कि वह ऐसा नहीं कर सकते। उस समय वह टॉप बॉय और बुलेटप्रूफ जैसे धारावाहिकों में बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जुड़े हुए थे। उन्होंने अपने अनुबंध में एक एपिसोड निर्देशित करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रोडक्शन कंपनियों ने विनम्रता से यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। यही वह मोड़ था जिसने उन्हें बतौर निर्देशक खुद को साबित करने के लिए प्रेरित किया। सेट पर हमेशा से ही उनका ध्यान निर्देशकों के काम करने के तरीके और उनकी तकनीकों पर रहता था।
निर्देशन की बारीकियां और निजी दृष्टिकोण
वॉल्टर्स ने फीचर फिल्म बनाने से पहले एकले ब्रिज और अ थाउजेंड ब्लोस के कुछ एपिसोड्स का निर्देशन किया था। उन्होंने साझा किया कि शुरुआत में अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में थोड़ी झिझक होती थी क्योंकि सेट पर दशकों का अनुभव रखने वाले छायाकार और तकनीशियन मौजूद होते थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने यह सीखा कि स्थापित तौर तरीकों से अलग हटकर अपनी सोच को लागू करना ही स्क्रीन पर जादू पैदा करता है। उनके लिए निर्देशन की पूरी प्रक्रिया बेहद खास है, जहां लिखी हुई पटकथा निर्देशक के पास आकर एक नया रूप लेती है, फिर संपादन के बाद दर्शकों तक पहुंचकर अपनी नई व्याख्या पाती है।
फिल्म एलिमोल की कहानी निक लव द्वारा लिखी गई है, जिसमें वॉल्टर्स ने अपने निजी अनुभवों को गहराई से पिरोया है। फिल्म के समलैंगिक पहलू के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यही तत्व उन्हें इस प्रोजेक्ट की ओर खींच लाया। उन्होंने स्वीकार किया कि वह ऐसे माहौल में बड़े हुए थे जहां ऐसी बातों को लेकर गलत धारणाएं थीं। लेकिन जेल में बिताए समय और बाद में फिल्म उद्योग में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों के संघर्ष को देखा और अपनी पुरानी सोच को पीछे छोड़ दिया। उनके लिए इस मानवीय कहानी को पर्दे पर उतारना बेहद जरूरी था।
जेल की यादें और दृश्यों की प्रामाणिकता
वॉल्टर्स के अनुसार, फिल्म में जेल का दृश्य, रंग और वातावरण पूरी तरह से उनकी अपनी यादों पर आधारित है। जेल में बंदियों के स्तर को दर्शाने वाले आर्म बैंड का विचार भी उनका ही था। मुख्य किरदार ट्रॉय के जरिए उन्होंने जेल में एक अनजान और कमजोर स्थिति में पहुंचने की भावना को उभारा है। जब वॉल्टर्स खुद जेल गए थे, तब मीडिया में उनकी एक अलग छवि थी और वहां अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें ताकत और मर्दानगी का दिखावा करना पड़ता था।
पारंपरिक ब्रिटिश जेल और शहरी फिल्मों के मुकाबले इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी काफी अलग नजर आती है। आमतौर पर ऐसी फिल्मों में दिखने वाले निराशाजनक और स्लेटी रंगों के बजाय, वॉल्टर्स ने उन स्थानों को वैसे दिखाया जैसा वहां रहने वाले लोग महसूस करते हैं। पेकहम में बड़े होते हुए उन्होंने उस परिवेश की जीवंतता और रंगों को देखा था, और वही अहसास वह पर्दे पर भी लाना चाहते थे।
रूढ़िवादिता और किरदारों की वास्तविकता पर नजरिया
करियर के शुरुआती दौर में कई अपराध और थ्रिलर आधारित प्रोजेक्ट्स में काम करने के बाद वॉल्टर्स ने अभिनय के दायरे को बढ़ाने का फैसला किया था। इसी दौरान उन्हें टॉप बॉय का प्रस्ताव मिला, जिसकी पटकथा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। धारावाहिक में युवा अश्वेत पुरुषों के चित्रण और रूढ़िवादिता से जुड़े सवालों पर उनका मानना है कि उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा एक प्रामाणिक कहानी कहना था, जो वास्तविक लोगों के जीवन से जुड़ी हो।
उनका कहना है कि जब दशकों से हाशिए पर रहे समुदायों को अपनी आवाज उठाने का मौका मिलता है, तो वे पहले अपने संघर्षों और वास्तविकताओं के बारे में ही बात करते हैं। इसके बाद ही वे रोमांटिक कॉमेडी, एक्शन और सुपरहीरो जैसी अन्य विधाओं में आगे बढ़ते हैं। सिनेमा में हर तरह की कहानियों को जगह मिलनी चाहिए और रचनाकारों को आगे बढ़ने की आजादी होनी चाहिए।
स्टीफन ग्राहम के साथ साझेदारी और आगामी फिल्में
फिल्म में स्टीफन ग्राहम एक जेल सोशल वर्कर की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों कलाकारों का परिचय 2004 के एक सिटकॉम टॉप बजर के दौरान हुआ था। इसके बाद दोनों ने नेटफ्लिक्स के लोकप्रिय धारावाहिक एडोलसेंस और अ थाउजेंड ब्लोस में साथ काम किया। वॉल्टर्स ग्राहम के समर्पण और काम के प्रति उनके आत्मविश्वास की काफी सराहना करते हैं।
वॉल्टर्स की सिनेमाई प्रेरणाओं में द गूनीज, स्टैंड बाय मी, फ्लाइट ऑफ द नेविगेटर और द माइटी डक्स जैसी क्लासिक फिल्में शामिल हैं। वह आने वाले समय में खादिजा मेलाह के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी पर काम कर रहे हैं, जिन्होंने घुड़दौड़ में मैगनोलिया कप जीतकर इतिहास रचा था।
बतौर अभिनेता वह एम. नाइट श्यामलन की आगामी फिल्म रीमेन में जेक गिलेनहाल और फोबे डायनेवर के साथ दिखाई देंगे। यह एक अलौकिक प्रेम कहानी है जिसमें वॉल्टर्स ने एक हास्य प्रधान भूमिका निभाई है। अपने जीवन के उतार चढ़ाव को लेकर वॉल्टर्स का मानना है कि हर दिन बेहतर इंसान बनने की कोशिश करना और सम्मान के साथ काम करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।


















