जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों और आतंकवाद के गठजोड़ पर सुरक्षाबलों ने चौतरफा कानूनी शिकंजा कस दिया है। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के कड़े कानूनी प्रावधानों का सहारा लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस क्षेत्र में फैले अवैध तंत्र की कमर तोड़ने में बड़ी कामयाबी पाई है। महज छह महीनों के भीतर चलाए गए सघन अभियान के दौरान सक्रिय और फरार आतंकवादियों के साथ-साथ ड्रग सिंडिकेट से जुड़े लोगों की अचल संपत्तियों को आतंकवाद से अर्जित आय घोषित कर कानूनी तौर पर जब्त कर लिया गया है। इस निर्णायक कदम के साथ केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस अवैध संपत्तियों की जब्ती और मामलों के त्वरित निस्तारण के मामले में पूरे देश में शीर्ष पर पहुंच गई है।
डीजीपी नलिन प्रभात ने साझा किए व्यापक कार्रवाई के आंकड़े
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने आतंकवाद और नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही इस व्यापक मुहिम का ब्योरा सामने रखा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस बल ने अब तक ₹138 करोड़ से अधिक मूल्य की कुल 288 संपत्तियों को कुर्क किया है। इस तरह के वित्तीय और बुनियादी ढांचे पर प्रहार के मामलों में जम्मू-कश्मीर का स्थान देश में पहला है। नार्को-टेरर गठजोड़ को जड़ से उखाड़ने के लिए दर्ज किए गए 3,257 मामलों में 4,000 से ज्यादा आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से नशीली खेप गिराने वाले अत्याधुनिक मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया है और उसमें शामिल मुख्य गुर्गों को हिरासत में लिया है।
छह महीनों के रिकॉर्ड अभियान में त्वरित निपटारा और दोषसिद्धि
पिछले छह महीनों के दौरान दर्ज अपराधों के विस्तृत विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पुलिस ने न सिर्फ नए मामले दर्ज किए, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी बेहद तेज गति से आगे बढ़ाया। कुल 3,257 दर्ज मामलों में से 2,500 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है। इन ठोस कानूनी कार्यवाहियों के चलते अब तक 170 आरोपियों को अदालत द्वारा दोषी भी ठहराया जा चुका है।
संपत्ति जब्ती के मोर्चे पर पुलिस की कार्रवाई बेहद सख्त रही है, जिसमें ₹178 करोड़ से अधिक मूल्य की कुल 288 अचल संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इसके अलावा विभिन्न छापों और तलाशी अभियानों के दौरान ₹80 लाख से अधिक की नकदी भी बरामद की गई है। नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम से जुड़े विशेष कानून, यानी PIT-NDPS एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन में भी यह बल देश के अन्य राज्यों से काफी आगे निकल चुका है, जिसके तहत 144 कुख्यात तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
श्रीनगर में अंतर-राज्यीय सिंडिकेट पर चोट और करोड़ों की संपत्ति अटैच
श्रीनगर पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एक अंतर-राज्यीय नार्को-टेरर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस विशेष अभियान के तहत ₹7.11 करोड़ की चार प्रमुख अचल संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई पूरी की गई। राजधानी श्रीनगर में पुलिस की यह रणनीति उन सभी वित्तीय माध्यमों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर केंद्रित है, जिनके जरिए ड्रग्स के काले कारोबार का पैसा देश विरोधी गतिविधियों तक पहुंचता है।
श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीवी संदीप इस संपूर्ण अभियान की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हम उन आरोपियों की पहचान करेंगे और उन्हें पकड़ेंगे जो बाहर से ड्रग्स लाकर यहां जमा करते हैं, और हम उन्हें जल्द से जल्द आपके और कोर्ट के सामने पेश करेंगे। इसके अलावा, ऐसे लोगों के खिलाफ न सिर्फ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उनकी संपत्तियाँ भी जब्त की जाएंगी।"
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के नशा-मुक्ति अभियान को जनसमर्थन
जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा शुरू की गई नशा-मुक्ति मुहिम को अब पूरे क्षेत्र में व्यापक जनभागीदारी मिल रही है। आम नागरिकों, स्कूली छात्रों, महाविद्यालयों के युवाओं और स्थानीय धर्मगुरुओं ने इस सामाजिक व सुरक्षा पहल में सक्रिय भागीदारी निभाई है। घाटी से लेकर जम्मू संभाग तक नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए एक साझा संकल्प दिखाई दे रहा है, जिसके जमीनी परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उप-राज्यपाल के नेतृत्व में चल रही इस व्यापक प्रशासनिक व पुलिस कार्रवाई की समाज के हर तबके में सराहना हो रही है।
राजनीतिक सहमति और सीमावर्ती निगरानी बढ़ाने की मांग
इस निर्णायक कानूनी प्रहार का जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने भी खुला स्वागत किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने ही जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के इस कड़े रुख का समर्थन किया है। राजनीतिक नेतृत्व ने ड्रग माफिया के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर संतोष जताया है, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा है कि आतंकवाद और ड्रग्स के इस गठजोड़ को पूरी तरह समाप्त करने के लिए निरंतर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। ड्रग्स के अवैध व्यापार से होने वाले मुनाफे का सीधा इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण में होता है, और इसे पूरी तरह रोके बिना क्षेत्र को नशा-मुक्त नहीं बनाया जा सकता।
दूसरी ओर, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक रैलियों और विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे बड़ा दायित्व धार्मिक विद्वानों पर भी है। विशेषज्ञों ने भौगोलिक स्थिति को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों का स्थानीय उत्पादन नहीं होता, बल्कि इनकी सारी आपूर्ति पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सतत निगरानी को और अधिक मजबूत करना ही इस संकट के स्थाई समाधान की मुख्य कुंजी है।





















