कोच्चि स्थित केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में वायनाड में हुई भीषण भूस्खलन त्रासदी के पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त की है। जस्टिस ए. के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए. के. की खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, अदालत ने घटना में घायल हुए लोगों के इलाज और उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी किसी भी प्रकार की देरी न करने को कहा है।
मुआवजे और राहत कार्यों पर अदालत की सख्ती
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अनुग्रह राशि और घायलों के उपचार का खर्च फिलहाल सुरंग परियोजना के खाते से निकाला जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि इस खर्च की अंतिम भरपाई किससे की जाएगी, इस पर फैसला बाद में लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया कि मृतकों के शवों को बिना किसी अनावश्यक देरी के उनके परिवारों को सौंप दिया जाए। सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता जाजू बाबू ने अदालत को जानकारी दी कि दलदल और भारी कीचड़ के कारण प्रशिक्षित श्वान दस्ते शवों को खोजने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इस कारण से, अब लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष रूप से मानव श्रम का उपयोग किया जा रहा है।
काम रोकने के दावों पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल कार्यस्थल पर मौजूद श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर उठा। सरकार ने अपने बचाव में तर्क दिया कि 25 मई के आदेश के अनुसार बाहरी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया था और बाद में 5 जुलाई को स्थल पर निर्माण से जुड़ी सभी गतिविधियों को पूरी तरह रोकने का आदेश दिया गया था। सरकार का दावा है कि यदि 5 जुलाई को वायनाड जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर समय रहते काम बंद नहीं किया गया होता, तो इस आपदा में मरने वालों की संख्या वर्तमान आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती थी।
हालांकि, इस तर्क पर पीठ ने तीखी टिप्पणी की और सवाल उठाया कि यदि कार्यस्थल पर काम रोकने के आदेश जारी कर दिए गए थे, तो घटना के समय वहां श्रमिक क्या कर रहे थे? अदालत ने सरकार से इस विरोधाभास पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
परियोजना स्थल और सुरक्षा नियमों की अनदेखी
अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी कोंकण रेलवे को बार-बार निर्देश दिए गए थे कि खुदाई के कारण जमा हुई मिट्टी को वहां से हटा दिया जाए ताकि किसी भी तरह के खतरे को टाला जा सके। उल्लेखनीय है कि अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना का उद्देश्य वायनाड और कोझिकोड जिलों के बीच संपर्क मार्ग तैयार करना है, लेकिन 7 जुलाई को इसी स्थल पर हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। शुक्रवार को एक और शव बरामद होने के बाद इस विशेष परियोजना स्थल पर हुए हादसे में मरने वालों की कुल संख्या सात तक पहुंच गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे हैं।





