सिंगापुर के नेशनल डे रैली 2026 में लॉरेंस वोंग के भाषण पर डीबीएस की रिपोर्ट के मुख्य बिंदुअमेरिकी डॉलर में जोरदार वापसी, ईरान प्रतिबंधों के चलते सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ीअमेरिका की सख्ती से ईरान के वित्त और वैश्विक शिपिंग पर मंडराया संकट, भारत पर भी असर की आशंकाफ्रांस और सऊदी अरब के बीच 6 अरब यूरो का बड़ा समझौता, पेरिस के पास बनेंगे तीन नए थीम पार्कसालमोनेला के खतरे से बचना है आसान, रसोई में इस एक गैजेट का होना है जरूरीएशियाई मुद्रा बाजार में हलचल, बैंक ऑफ थाईलैंड और कोरियाई केंद्रीय बैंक के फैसलों पर निवेशकों की नजरई20 पेट्रोल और वाहनों के जोखिम पर अरविंद केजरीवाल ने गोवा से की महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंसकुरुक्षेत्र में पत्नी ने की पति की निर्मम हत्या, शव के अंदरूनी अंग निकालकर बैग में रखने से इलाके में दहशतऑडिजी मैक्सवेल 2 एएनसी रिव्यू (2026): एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन और दमदार बैटरी वाला गेमिंग हेडसेटब्रह्मास्त्र 2 से बाहर हुईं दीपिका पादुकोण, इस नई अभिनेत्री की एंट्री के साथ आलिया भट्ट का किरदार होगा बड़ा
वायनाड भूस्खलन: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, आदेश के बाद भी कार्यस्थल पर मजदूर क्यों थे?केरल
10 जुल॰ 2026, 10:15 pm (45 दिन पहले)· 2

वायनाड भूस्खलन: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, आदेश के बाद भी कार्यस्थल पर मजदूर क्यों थे?

केरल हाईकोर्ट ने वायनाड भूस्खलन पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि काम रोकने के आदेश के बाद भी श्रमिक वहां क्यों मौजूद थे।

कोच्चि स्थित केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में वायनाड में हुई भीषण भूस्खलन त्रासदी के पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त की है। जस्टिस ए. के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए. के. की खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, अदालत ने घटना में घायल हुए लोगों के इलाज और उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी किसी भी प्रकार की देरी न करने को कहा है।

मुआवजे और राहत कार्यों पर अदालत की सख्ती

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अनुग्रह राशि और घायलों के उपचार का खर्च फिलहाल सुरंग परियोजना के खाते से निकाला जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि इस खर्च की अंतिम भरपाई किससे की जाएगी, इस पर फैसला बाद में लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया कि मृतकों के शवों को बिना किसी अनावश्यक देरी के उनके परिवारों को सौंप दिया जाए। सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता जाजू बाबू ने अदालत को जानकारी दी कि दलदल और भारी कीचड़ के कारण प्रशिक्षित श्वान दस्ते शवों को खोजने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इस कारण से, अब लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष रूप से मानव श्रम का उपयोग किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

काम रोकने के दावों पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल कार्यस्थल पर मौजूद श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर उठा। सरकार ने अपने बचाव में तर्क दिया कि 25 मई के आदेश के अनुसार बाहरी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया था और बाद में 5 जुलाई को स्थल पर निर्माण से जुड़ी सभी गतिविधियों को पूरी तरह रोकने का आदेश दिया गया था। सरकार का दावा है कि यदि 5 जुलाई को वायनाड जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर समय रहते काम बंद नहीं किया गया होता, तो इस आपदा में मरने वालों की संख्या वर्तमान आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती थी।

हालांकि, इस तर्क पर पीठ ने तीखी टिप्पणी की और सवाल उठाया कि यदि कार्यस्थल पर काम रोकने के आदेश जारी कर दिए गए थे, तो घटना के समय वहां श्रमिक क्या कर रहे थे? अदालत ने सरकार से इस विरोधाभास पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

परियोजना स्थल और सुरक्षा नियमों की अनदेखी

अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी कोंकण रेलवे को बार-बार निर्देश दिए गए थे कि खुदाई के कारण जमा हुई मिट्टी को वहां से हटा दिया जाए ताकि किसी भी तरह के खतरे को टाला जा सके। उल्लेखनीय है कि अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना का उद्देश्य वायनाड और कोझिकोड जिलों के बीच संपर्क मार्ग तैयार करना है, लेकिन 7 जुलाई को इसी स्थल पर हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। शुक्रवार को एक और शव बरामद होने के बाद इस विशेष परियोजना स्थल पर हुए हादसे में मरने वालों की कुल संख्या सात तक पहुंच गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे हैं।

सवाल-जवाब

केरल हाईकोर्ट ने वायनाड भूस्खलन को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह पीड़ितों को समय पर अनुग्रह राशि दे और शवों को बिना देरी परिवारों को सौंपे।
सरकार ने कार्यस्थल पर काम रोकने को लेकर क्या कहा?
सरकार का दावा है कि 5 जुलाई को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर काम रोक दिया गया था, जिससे बड़ी जनहानि टली।
अदालत का सरकार से मुख्य सवाल क्या था?
अदालत ने सरकार से पूछा है कि यदि काम रोकने के आदेश दे दिए गए थे, तो कार्यस्थल पर मजदूर क्या कर रहे थे।
अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना में कितने लोगों की मौत हुई है?
इस विशिष्ट परियोजना स्थल पर हुए लैंडस्लाइड में अब तक कुल सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR