घर के गमलों और बगीचे में लगे पौधों की नियमित देखभाल करते समय सिर्फ पानी सींचना और खाद डालना ही पर्याप्त नहीं होता है। कई बार अच्छी देखभाल के बाद भी पौधों की पत्तियों पर अचानक कीट-पतंगों का हमला हो जाता है, जिससे पत्तियां मुड़ने और पीली पड़कर सूखने लगती हैं। इसके अलावा गमले की मिट्टी में फंगस पनपने की वजह से पौधों का विकास पूरी तरह रुक जाता है और कुछ ही दिनों में पौधा बेजान होकर सूख जाता है। ऐसे में पौधों की सेहत बनाए रखने के लिए समय-समय पर कीट नियंत्रक उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है। यदि आप अपने पेड़-पौधों में बाजार में मिलने वाले रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहते, तो आपकी रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें एक बेहतरीन जैविक विकल्प बन सकती हैं।
जैविक स्प्रे तैयार करने की आवश्यक सामग्री और अनुपात
पौधों के लिए यह शक्तिशाली जैविक मिश्रण तैयार करना बेहद आसान है। 15 लीटर पानी की क्षमता वाले स्प्रे टैंक या बर्तन के हिसाब से घोल तैयार करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की जरूरत होती है
- दूध: 250 ग्राम
- हल्दी पाउडर: 10 ग्राम
- हींग: 5 ग्राम
- गुड़: 20 ग्राम
घोल बनाने के लिए सबसे पहले 15 लीटर पानी लें और उसमें 250 ग्राम दूध, 10 ग्राम हल्दी पाउडर, 5 ग्राम हींग और 20 ग्राम गुड़ को अच्छी तरह मिला लें ताकि सभी सामग्रियां पानी में पूरी तरह घुल जाएं। इस तैयार तरल को एक स्प्रे बोतल में भर लें। पौधे के ऊपरी हिस्से यानी पत्तियों और तनों पर इस घोल का छिड़काव करें। इसके साथ ही बचे हुए घोल को पौधों की जड़ों के आसपास की मिट्टी में भी सींचें ताकि जड़ों को भी सुरक्षा मिल सके।
मिश्रण में शामिल हर सामग्री का वैज्ञानिक लाभ
यह देसी घोल पौधों के लिए एक संपूर्ण टॉनिक की तरह काम करता है, जिसके पीछे इसमें मौजूद सामग्रियों के खास गुण हैं
- दूध: दूध में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह पौधों और मिट्टी के पीएच बैलेंस में सुधार लाकर उन्हें मजबूती देता है।
- हल्दी: हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जिसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो मिट्टी और पत्तियों को बीमारियों से बचाते हैं।
- हींग: हींग की तेज और तीखी गंध हानिकारक कीटों और कीड़ों को पौधों के आसपास फटकने से रोकती है।
- गुड़: गुड़ का मुख्य काम पत्तियों पर मौजूद मित्र सूक्ष्मजीवों का पोषण करना है। पौधों की पत्तियों पर हजारों तरह के माइक्रोब्स होते हैं, जिनमें कुछ नुकसानदेह होते हैं और कुछ फायदेमंद। जब स्वस्थ पौधे पर इस घोल का छिड़काव किया जाता है, तो गुड़ और दूध में मौजूद पोषक तत्व लाभदायक माइक्रोब्स की संख्या को तेजी से बढ़ाते हैं। ये मित्र माइक्रोब्स नुकसानदेह बैक्टीरिया और फंगस को पनपने नहीं देते।
सावधानी: कब न करें इस घोल का इस्तेमाल
इस प्राकृतिक उपाय का इस्तेमाल करते समय एक बेहद महत्वपूर्ण सावधानी रखना जरूरी है। यदि किसी पौधे पर पहले से ही फंगस या बैक्टीरिया का गंभीर हमला हो चुका है और पौधा बीमार है, तो उस पर इस घोल का छिड़काव बिल्कुल न करें। ऐसा करने से गुड़ और दूध में मौजूद पोषक तत्व नुकसानदेह फंगस और बैक्टीरिया का पोषण करने लगेंगे, जिससे संक्रमण और तेजी से फैलेगा और पौधा पूरी तरह नष्ट हो सकता है। यह घोल केवल स्वस्थ या शुरुआती सुरक्षा वाले पौधों पर ही असरदार रहता है।
उपयोग की समयावधि और मिलने वाले नतीजे
इस देसी जैविक घोल का इस्तेमाल महीने में केवल 1 बार करना ही काफी होता है। नियमित रूप से महीने में एक बार इसका छिड़काव करने से पौधे की पत्तियां बड़ी और चमकदार होती हैं, नई शाखाएं फूटती हैं और पौधा लगातार हरा-भरा बना रहता है।



















