ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में जारी भारी दबाव को कम करने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) की ओर से उठाए गए राहत भरे कदमों से गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। एशियाई इक्विटी बाजारों में आए इस सुधार में साउथ कोरिया का केओएसपीआई इंडेक्स सबसे आगे रहा, जिसने क्षेत्र के अन्य प्रमुख इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। लंबे समय की सरकारी देनदारियों पर प्रतिफल दरें (बॉन्ड यील्ड) कम होने से निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता में सुधार आया है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एफओएमसी मिनट्स के सख्त रुख और मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण बाजार में बनी इस तेजी पर कुछ हद तक सतर्कता का साया भी देखा जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक फैसला और वैश्विक बाजारों पर असर
अमेरिकी वित्त विभाग ने बॉन्ड बाजार में सरकारी उधार की बढ़ती लागत पर अंकुश लगाने और तरलता (लिक्विडिटी) को मजबूती देने के उद्देश्य से दीर्घकालिक सरकारी ऋण पत्रों की बायबैक प्रक्रिया को कम से कम दोगुना करने का ऐलान किया है। इस कदम से बॉन्ड बाजार में बनी भारी अनिश्चितता को काफी हद तक राहत मिली। नतीजतन, अमेरिका का 30 साल की अवधि वाला बॉन्ड यील्ड जून 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में आई इस स्थिरता का सीधा सकारात्मक असर ऑस्ट्रेलिया और जापान के बॉन्ड बाजारों पर भी देखा गया। यील्ड में गिरावट आने से निवेशकों का रुझान फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज से हटकर शेयर बाजार जैसी जोखिम वाली संपत्तियों की ओर बढ़ा है।
मुद्रा बाजार में हलचल: जीबीपी और यूरो ने दर्ज की रिकॉर्ड तेजी
अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव के चलते वैश्विक मुद्रा बाजार में भी अहम बदलाव दर्ज किए गए। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) जोड़ी में लगातार तेजी बनी रही और यह 1.3600 के स्तर को पार करते हुए मध्य मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। ब्रिटेन में जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.9% दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमानों के बिल्कुल अनुकूल रही। इसके साथ ही जुलाई में कोर सीपीआई बढ़कर 2.6% हो गई, जबकि बाजार को 2.5% रहने की उम्मीद थी। दूसरी ओर, यूरो/यूएसडी (EUR/USD) जोड़ी में भी तेज बढ़त देखी गई और यह बुधवार को 1.1650 के ऊपर कारोबार करती नजर आई, जो जून की शुरुआत के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
सोने की कीमतों में उछाल और क्रिप्टो मार्केट में हाइपरलिक्विड की छलांग
बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने का सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला। गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान सोना $4,500 के आसपास कारोबार करता दिखा। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सोने ने $4,528 का स्तर छूकर 11 हफ्तों के नए उच्चतम स्तर को दर्ज किया था। अमेरिकी ट्रेजरी के रिडेम्पशन प्लान से मिली राहत के बाद एशियाई निवेशकों की ओर से सोने की खरीदारी में तेजी आई। वहीं डिजिटल एसेट मार्केट की बात करें तो हाइपरलिक्विड (Hyperliquid) में बुधवार को 20% से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई। यह तेजी तब आई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (सीएफटीसी) इस डिसेंट्रलाइज्ड परपेचुअल फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म को अमेरिका के कानूनी दायरे में लाने के लिए काम कर रहा है।
मध्य पूर्व का तनाव और कच्चे तेल की मिली-जुली चाल
शेयर और मुद्रा बाजार में तेजी के बावजूद ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल रहा और कच्चे तेल की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। व्यापारी मध्य पूर्व के हालात और विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज) पर बने गतिरोध पर नजर बनाए हुए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक अभियान शुरू करने जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी देश ईरान पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ने में मदद करेगा या उसके साथ व्यापार करेगा, उसे गंभीर वित्तीय दंड भुगतना होगा। तनाव के इस माहौल ने कमोडिटी ट्रेडर्स को सतर्क कर दिया है।
एशियाई अर्थव्यवस्था की संरचना और प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स
विश्व की आर्थिक वृद्धि में एशियाई क्षेत्र लगभग 70% का योगदान देता है और यहां दुनिया के कई सबसे महत्वपूर्ण शेयर बाजार स्थित हैं। विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में जापान का निकेई 225 (Nikkei 225) इंडेक्स, जो टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज की 225 बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, और साउथ कोरिया का केओएसपीआई (KOSPI) बेहद अहम हैं। चीन में तीन प्रमुख बेंचमार्क हैं: हांगकांग का हैंगसेंग, शंघाई कंपोजिट और शेनज़ेन कंपोजिट। वहीं, एक प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का शेयर बाजार भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है, जहां सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) जैसे इंडेक्स में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी का निवेश हो रहा है।
क्षेत्रीय उद्योगों का वर्गीकरण और प्रमुख कारोबारी क्षेत्र
एशिया की मुख्य अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखती हैं। जापान, साउथ कोरिया और चीन के शेयर बाजार इंडेक्स में टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा है। इसके विपरीत, हांगकांग और सिंगापुर को वैश्विक वित्तीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है, इसलिए वहां के बाजारों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं अग्रणी भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा चीन और जापान में ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा आधार है। भारत और चीन जैसे देशों में बढ़ती मध्यवर्गीय आबादी के कारण रिटेल, उपभोक्ता वस्तुओं और ई-कॉमर्स कंपनियों की हिस्सेदारी भी बाजारों में तेजी से बढ़ रही है।
एशियाई शेयर बाजारों को संचालित करने वाले मुख्य कारक
एशियाई शेयर बाजारों की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका कंपनियों के तिमाही और वार्षिक वित्तीय नतीजों की होती है। इसके अलावा संबंधित देश के बुनियादी आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरों से जुड़े फैसले और सरकारों की वित्तीय नीतियां भी बाजार की चाल तय करती हैं। व्यापक तौर पर देखा जाए तो राजनीतिक स्थिरता, तकनीकी प्रगति, कानून का शासन और वॉल स्ट्रीट के ओवरनाइट आंकड़े एशियाई बाजारों का मूड तय करते हैं। इसके अतिरिक्त, फिक्स्ड इनकम के मुकाबले इक्विटी को अधिक जोखिम वाली संपत्ति माना जाता है, इसलिए वैश्विक बाजार की सामान्य रिस्क भावना भी निवेश की दिशा तय करती है।
एशियाई बाजारों में निवेश से जुड़े विशिष्ट जोखिम
एशियाई शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों को क्षेत्र-विशिष्ट जोखिमों का ध्यान रखना पड़ता है। एशियाई देशों में पूर्ण लोकतंत्र से लेकर तानाशाही तक अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियां हैं, जिससे कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और नियमों के पालन में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। व्यापारिक विवाद, क्षेत्रीय तनाव और प्राकृतिक आपदाएं बाजारों में अचानक उतार-चढ़ाव ला सकती हैं। इसके अलावा मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा पड़ता है, जहां स्थानीय मुद्रा के मजबूत होने से निर्यात को नुकसान होता है और कमजोर मुद्रा से विदेशी बाजारों में उत्पाद सस्ते होने का लाभ मिलता है।



















