बरसात के दिनों में घरों में सीलन के साथ-साथ फर्नीचर में दीमक का खतरा काफी बढ़ जाता है। दीमक का आकार भले ही बहुत छोटा होता है, लेकिन यह लकड़ी के अलमारियों, दरवाजों, खिड़कियों और अन्य कीमती सामान को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जब तक इसका असर सामने आता है, तब तक फर्नीचर काफी हद तक बर्बाद हो चुका होता है।
दीमक के संकेतों को कैसे पहचानें
चूंकि दीमक लकड़ी के भीतर या जमीन की मिट्टी में छिपकर पनपती है, इसलिए इन्हें जल्दी देख पाना मुमकिन नहीं होता। अगर आप अपनी लकड़ी की वस्तुओं को दबाकर देखें और वह कमजोर या खोखली महसूस हो, तो समझ लीजिए कि अंदर दीमक मौजूद है। इसके अलावा, दीवारों के किनारों या फर्श पर मिट्टी की पतली रेखाएं या सुरंगें दिखाई देना भी इनके होने का पुख्ता प्रमाण है। बारिश के मौसम में अगर आपको पंख वाली दीमकें उड़ती हुई दिखें, तो यह चेतावनी है कि आपके घर के आसपास इनका बसेरा बन चुका है।
लकड़ी क्यों बन जाती है इनका आहार
दीमक मुख्य रूप से लकड़ी में पाए जाने वाले सेल्यूलोज नामक तत्व को अपना भोजन बनाती हैं। नमी, पुरानी या टूटी-फूटी लकड़ी इनकी पसंदीदा जगह होती है। जो फर्नीचर सीधे जमीन के संपर्क में रहता है, उसमें दीमक लगने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। मानसून की सीलन इनके पनपने के लिए सबसे अनुकूल स्थिति पैदा करती है।
दीमक खत्म करने के आसान घरेलू उपाय
अगर फर्नीचर में दीमक का प्रकोप दिख रहा है, तो कुछ प्राकृतिक चीजों का उपयोग इसे जड़ से खत्म कर सकता है। नीम का तेल, लौंग का तेल और केरोसिन को दीमक का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। रुई की मदद से इन तेलों को प्रभावित हिस्सों में ठीक तरह से लगाएं। अगर आप इसका इस्तेमाल लगातार कुछ दिनों तक करेंगे, तो दीमक का खात्मा होना निश्चित है।
फर्नीचर की सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स
- अपने लकड़ी के फर्नीचर को समय-समय पर धूप दिखाते रहें।
- घर के अंदर नमी और सीलन को बिल्कुल भी पनपने न दें।
- हवा के आवागमन के लिए फर्नीचर को दीवारों से थोड़ा हटाकर रखें।
- लकड़ी के टुकड़ों या सामान को हमेशा सूखी और हवादार जगह पर ही स्टोर करें।
- मानसून के दौरान नियमित रूप से घर के सभी लकड़ी के सामान की गहन जांच करते रहें।











