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लाइव: अमेरिका के नए हमलों पर अन्य देशों के ऊर्जा क्षेत्रों को निशाना बनाने की ईरान ने दी चेतावनी — 2 अगस्त 2026लाइव
2 अग॰ 2026, 7:51 am (1 दिन पहले)· 2

लाइव: अमेरिका के नए हमलों पर अन्य देशों के ऊर्जा क्षेत्रों को निशाना बनाने की ईरान ने दी चेतावनी — 2 अगस्त 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि पश्चिम एशियाई सहयोगियों द्वारा शांति समझौते का ढांचा तैयार करने के बाद अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ नए हमले रोकेगी। वहीं, ईरान के मीडिया संस्थानों ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि तेहरान ने वॉशिंगटन से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था।

पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और संभावित बड़े युद्ध की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। खाड़ी क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के खतरे को देखते हुए क्षेत्रीय देशों ने युद्ध की ज्वाला को भड़कने से रोकने के लिए अमरीका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सऊदी अरब के प्रभावी शासक और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधी बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और अधिक बढ़ाता है, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं। तेहरान और अन्य क्षेत्रीय राजधानियों की ओर से मिली अपीलों के बाद अमरीकी प्रशासन ने इजराइल के साथ मिलकर अपनी नियोजित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने पर सहमति जताई है, हालांकि इसके लिए कठिन शर्तें रखी गई हैं।

सऊदी अरब की कूटनीतिक पहल और ऊर्जा सुरक्षा की चिंता

क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बात करके सैन्य संघर्ष को न बढ़ाने का आग्रह किया है। रियाद के नेतृत्व को गंभीर आशंका है कि यदि अमरीकी सेना ईरान के ऊर्जा नेटवर्क या अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर हमले करती है, तो ईरान इसका करारा जवाब देगा। तेहरान की प्रतिक्रिया के तहत सऊदी अरब और पड़ोसी खाड़ी देशों के तेल शोधक कारखानों, तरलीकृत प्राकृतिक गैस संयोजकों और निर्यात टर्मिनलों को सीधा निशाना बनाया जा सकता है।

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खाड़ी के तेल उत्पादक देश किसी भी स्थिति में 2019 जैसे हमलों की पुनरावृत्ति नहीं चाहते, जब ऊर्जा संयंत्रों पर हुए हमलों ने वैश्विक आपूर्ति को झकझोर कर रख दिया था। यही कारण है कि सऊदी अरब इस समय अमरीका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दे रहा है। सऊदी अधिकारियों का मानना है कि सैन्य टकराव में वृद्धि से न केवल मध्य पूर्व का आर्थिक ढांचा ध्वस्त होगा, बल्कि वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें अनियंत्रित स्तर पर पहुंच सकती हैं।

ट्रंप की शर्त और सैन्य कार्रवाई पर अस्थाई रोक

व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के खतरे के बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक संदेश जारी कर अमरीका और इजराइल की संयुक्त सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। अमरीकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमरीका के पास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली, अभूतपूर्व सैन्य बल और मारक क्षमता पूरी तरह से तैयार स्थिति में मौजूद है। इसके बावजूद, तेहरान और मध्य पूर्व के कई अन्य देशों द्वारा की गई बार-बार की अपीलों को ध्यान में रखते हुए हमलों को अस्थायी रूप से टालने का निर्णय लिया गया है।

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि सैन्य कार्रवाई को रोकने की यह सहमति केवल इस शर्त पर दी गई है कि ईरान के साथ बहुत जल्द एक व्यापक और टिकाऊ समझौता हो जाए। इजराइल भी इस कूटनीतिक प्रतिबद्धता में अमरीका के साथ पूरी तरह शामिल है। अमरीकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संभावित समझौते के तहत ईरान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत, पूरी तरह से और बिना किसी बाधा के अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोलना होगा। इसके साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उत्पन्न खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करना अमरीकी शर्तों का मुख्य हिस्सा है।

तेहरान का कड़ा रुख और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर गतिरोध

अमरीकी राष्ट्रपति के बयानों के विपरीत, ईरान के सैन्य और प्रशासनिक हलकों ने वाशिंगटन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने आधिकारिक बयानों के जरिए स्पष्ट किया कि तेहरान द्वारा अमरीका से हमलों को टालने की मिन्नत करने की बात पूरी तरह से मनगढ़ंत और एक नया दुष्प्रचार है। ईरानी सशस्त्र बलों ने दोहराया कि उनके सभी सैन्य ठिकाने और रक्षा प्रणालियां सर्वोच्च सतर्कता की स्थिति में हैं और देश किसी भी प्रकार की सैन्य चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

इसके साथ ही, ईरानी वार्ताकारों के करीब माने जाने वाले सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमरीका अपनी आक्रामक और शत्रुतापूर्ण नीतियों को बंद नहीं करता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य का मार्ग बंद ही रहेगा। वर्तमान सैन्य संघर्ष की शुरुआत से ही ईरान ने इस संकरे लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग पर अपना कड़ा नियंत्रण बना रखा है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए ईरानी नौसेना से पूर्व अनुमति लेना और निर्धारित आवाजाही शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य बना दिया गया है।

ईरानी नेतृत्व में आंतरिक रणनीति और वैचारिक मतभेद

अमरीकी और सहयोगी देशों के बढ़ते दबाव के बीच ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने रणनीति के स्तर पर एकजुटता दिखाने का प्रयास किया है। तेहरान का प्राथमिक उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि ईरानी गणराज्य अपने विरोधियों की तुलना में कहीं अधिक लंबे समय तक कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव को सहन करने की क्षमता रखता है। हालांकि, इस जाहिर एकजुटता के पीछे तेहरान के सत्ता के गलियारों में भावी रणनीति और अंतिम लक्ष्य को लेकर गहरा वैचारिक विभाजन भी उभरकर सामने आया है।

ईरान के भीतर कट्टरपंथी धड़ा, जिसे फारसी भाषा में पायदारी अथवा स्थिरता आंदोलन कहा जाता है, अमरीका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते का सख्त विरोधी है। यह गुट पूर्ण सैन्य विजय और देश के भीतर इस्लामिक शासन प्रणाली के कड़े नियंत्रण को बनाए रखने की वकालत कर रहा है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़ का मानना है कि सैन्य शक्ति और दबाव का उपयोग केवल वाशिंगटन के साथ सम्मानजनक और बेहतर कूटनीतिक समझौता करने के लिए किया जाना चाहिए। यह व्यावहारिक धड़ा देश की जर्जर होती अर्थव्यवस्था और सामाजिक बदलावों की मांग को ध्यान में रखकर नीति बनाने पर जोर दे रहा है।

सैन्य तत्परता और इस्लामाबाद समझौते को बहाल करने की कोशिशें

ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मजीद इब्न अल-रेजा ने देश की सैन्य स्थिति पर बोलते हुए कहा कि तेहरान अपने शत्रुओं की ओर से आने वाली हर छोटी-बड़ी धमकी को वास्तविक और बेहद गंभीर मानकर अपनी रणनीति बनाता है। उन्होंने कहा कि चाहे विरोधी केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन ईरान न तो किसी सरप्राइज हमले से चकित होगा और न ही खामोश बैठेगा। ईरान इन धमकियों का इस्तेमाल अपनी सैन्य तैयारियों को नई धार देने, रक्षात्मक तकनीकों को उन्नत करने और अपनी निरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए कर रहा है।

कूटनीतिक मोर्चे पर, रविवार 2 अगस्त 2026 को ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता हसन गशगावी ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ एक बार फिर दोनों देशों को मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। तीसरे पक्ष के मध्यस्थ मुख्य रूप से 14-सूत्रीय इस्लामाबाद समझौते को फिर से लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसने जून के महीने में अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष को अस्थाई रूप से रोक दिया था। गशगावी ने स्वीकार किया कि बातचीत में शामिल सभी पक्ष जानते हैं कि इस समय सबसे जटिल और संवेदनशील मुद्दा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का है, और इसे सुलझाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर गहन विचार-विमर्श जारी है।

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  1. ईरानी सांसद का दावा: जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को बहाल करने में जुटे मध्यस्थ

    रविवार (2 अगस्त 2026) को ईरान के एक सांसद ने जानकारी दी कि मध्यस्थ उस समझौते को फिर से लागू करने का प्रयास कर रहे हैं जिसने जून में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष को कुछ समय के लिए थाम दिया था। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता हसन गशगावी ने एक वीडियो साक्षात्कार में बताया कि "तीसरे पक्ष के मध्यस्थों द्वारा मुख्य रूप से 14-सूत्रीय इस्लामाबाद समझौते को दोबारा प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में शामिल पक्ष समझते हैं कि इस समय सबसे मुख्य मुद्दा होर्मुज़ जलडमरूमध्य का है, और इसे लेकर दोनों पक्षों में विचारों का आदान-प्रदान चल रहा है।
  2. ईरानी प्रेस ने अमेरिका से हमले रोकने के अनुरोध वाले ट्रंप के दावे को किया खारिज

    ईरान की मेहर समाचार एजेंसी ने रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि इस्लामिक गणराज्य ने अमेरिका से नए हमले न करने का आग्रह किया है। सैन्य अधिकारियों के हवाले से एजेंसी ने कहा कि यह आरोप "एक नए झूठ के अलावा कुछ नहीं" था और ईरानी सशस्त्र बल "हाई अलर्ट पर हैं तथा किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं"। इससे पहले शनिवार को, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका "इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार" था, लेकिन तेहरान और मध्य पूर्व के अन्य देशों ने उनसे नए हमलों को टालने का अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनका यह फैसला ईरान के साथ किसी समझौते तक पहुंचने की शर्त पर आधारित था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि इस समझौते के तहत "होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत, पूरी तरह से और संपूर्ण रूप से खोलना होगा तथा ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना होगा"। दूसरी तरफ रविवार को, ईरानी वार्ताकारों के करीबी एक सूत्र के हवाले से ईरान की फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि "जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां जारी रखेगा, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा"। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान ने होर्मुज़ जलमार्ग को बाधित कर रखा है, जिसके तहत इस समुद्री मार्ग का उपयोग करने से पहले जहाजों को अनुमति लेना और आवाजाही शुल्क चुकाना अनिवार्य है।
  3. विरोधी देशों की हर धमकी को 'वास्तविक और गंभीर' मानता है ईरान: कार्यकारी रक्षा मंत्री

    सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के कार्यकारी रक्षा मंत्री मजीद इब्न अल-रेजा ने रविवार को कहा कि तेहरान अपने विरोधियों की ओर से आने वाली हर धमकी को 'वास्तविक और गंभीर' मानकर चलता है, भले ही वह महज मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान न तो अचानक किए गए हमलों से चकित होगा और न ही चुप बैठा रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि तेहरान इन धमकियों का उपयोग अपनी सैन्य तत्परता बढ़ाने, निरोधक क्षमता को मजबूत करने और अपनी रक्षात्मक क्षमताओं को विस्तार देने के लिए करेगा।
  4. युद्ध की रणनीति पर एकजुट दिखा ईरान का नेतृत्व, लेकिन अंतिम लक्ष्य को लेकर उभरे मतभेद

    पिछले एक सप्ताह में अमेरिकी ठिकानों और उसके मित्र देशों पर तेज़ होते हमलों के बीच, ईरान का नेतृत्व अपनी सैन्य रणनीति पर काफी एकजुटता दिखा रहा है। उनका प्रमुख मकसद यह साबित करना है कि ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगियों की तुलना में कहीं अधिक समय तक दबाव झेलने में सक्षम है। हालांकि, तेहरान के सत्ता गलियारों में इस बात को लेकर गहरे मतभेद हैं कि इस संघर्ष का अंतिम परिणाम क्या होना चाहिए। एक तरफ ऐसे कट्टरपंथी नेता हैं जो अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता का विरोध करते हैं और युद्ध में पूर्ण विजय की मांग कर रहे हैं। 'पायदारी' (फारसी में अर्थ 'स्थिरता') आंदोलन के रूप में जाने जाने वाले ये विचारधारा-समर्थक देश के भीतर इस्लामिक गणराज्य के कड़े नियंत्रण को बनाए रखना चाहते हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और प्रभावशाली संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़—जो मुख्य वार्ताकार की भूमिका में भी हैं—के समर्थक सैन्य दबाव का उपयोग वॉशिंगटन के साथ बेहतर समझौते तक पहुंचने के लिए करना चाहते हैं। यह धड़ा देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे विपरीत असर और सामाजिक बदलावों के अनुरूप ढलने की आवश्यकता से भी प्रेरित है।
  5. ट्रंप बोले: अमेरिका और इज़राइल ईरान पर हमले फिलहाल रोकने के लिए सहमत

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि तेहरान और क्षेत्र के अन्य देशों की अपील पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को फिलहाल रोकने का फैसला किया है, बशर्ते जल्द ही कोई समझौता हो जाए। अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक संदेश साझा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक के सबसे अभूतपूर्व सैन्य बल, शक्ति और क्षमता के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आगे लिखा, "इसके बावजूद, हमसे ईरान और मध्य पूर्व के अन्य देशों ने किसी भी हमले को टालने का आग्रह किया है। इस निवेदन के आधार पर, मैं त्वरित समझौता होने की शर्त पर हमले को रद्द करने के लिए सहमत हो गया हूँ। इज़राइल भी इस प्रतिबद्धता में मेरे साथ शामिल है।"
  6. सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से ईरान के साथ सैन्य संघर्ष न बढ़ाने का किया आग्रह

    सऊदी अरब के प्रभावी शासक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा संभावित रूप से तनाव बढ़ाने को लेकर चिंता जताई है। इस बातचीत से वाकिफ एक व्यक्ति ने यह जानकारी दी। सबसे पहले एक्सियोस द्वारा रिपोर्ट की गई यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नए सिरे से हमले करने का मूल्यांकन कर रहे हैं। बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्र के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व को आशंका है कि यदि अमेरिका ईरान के ऊर्जा नेटवर्क या अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर बड़े हमले करता है, तो जवाब में तेहरान सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।

सवाल-जवाब

सऊदी अरब ने अमरीका-ईरान तनाव में क्या रुख अपनाया है?
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करके सैन्य संघर्ष न बढ़ाने की अपील की है, क्योंकि सऊदी अरब को डर है कि ईरान खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले रोकने के लिए क्या शर्त रखी है?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमरीका और इजराइल ने हमले टाल दिए हैं, लेकिन ईरान को तुरंत होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलना होगा और अपने परमाणु खतरे को समाप्त करना होगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का क्या कहना है?
ईरान के सूत्रों के मुताबिक, जब तक अमरीका अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी रखेगा, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा और जहाजों को गुजरने के लिए अनुमति व शुल्क देना होगा।
ईरानी राजनीति में युद्ध और वार्ता को लेकर क्या मतभेद हैं?
ईरान में पायदारी आंदोलन जैसे कट्टरपंथी नेता बातचीत का विरोध कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़ अमरीका के साथ बेहतर समझौते के लिए कूटनीति के पक्ष में हैं।
मध्यस्थ किस समझौते को दोबारा बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं?
तीसरे पक्ष के मध्यस्थ जून में अमरीका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय इस्लामाबाद समझौते को फिर से लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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