तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की युवा इकाई के अध्यक्ष उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को तंजावुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी कानूनी कार्रवाई सत्ताधारी तमिझगा वेत्री कज़गम (टीवीके) के एक कार्यकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई उस शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उदयनिधि स्टालिन ने एक दिन पहले यानी सोमवार, 3 अगस्त 2026 को तंजावुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान एक प्रसिद्ध अभिनेत्री को निशाना बनाते हुए अत्यंत आपत्तिजनक, अभद्र और द्विअर्थी भाषा का प्रयोग किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए तंजावुर जिले के सेंगीपट्टी थाने ले गई, जहां उनसे डेढ़ घंटे तक सघन पूछताछ की गई। इसी बीच मद्रास उच्च न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल द्वारा दिए गए वक्तव्य को संज्ञान में लेते हुए न्यायमूर्ति जी.के. इलानथिरैयन ने पुलिस को निर्देश दिया कि पूछताछ पूरी होते ही उन्हें उसी दिन स्टेशन जमानत पर रिहा कर दिया जाए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया और वह तिरुचि हवाई अड्डे से चेन्नई के लिए रवाना हो गए।
आपत्तिजनक भाषण और दर्ज एफआईआर की कानूनी धाराएं
तंजावुर में आयोजित जनसभा के दौरान दिए गए भाषण को लेकर विवाद तब गहरा गया जब टीवीके पार्टी के एक सदस्य ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उदयनिधि स्टालिन ने अपने सार्वजनिक संबोधन में मर्यादा की सभी सीमाओं को लांघते हुए एक अभिनेत्री के प्रति अभद्र और द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग किया, जिससे महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंची है। इस शिकायत के आधार पर तंजावुर ईस्ट पुलिस स्टेशन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीएमके नेता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 196, धारा 192, धारा 352, धारा 79, धारा 296(b), धारा 61 और धारा 351(2) को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के प्रति अमर्यादित आचरण को रोकने के लिए बनाए गए तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम (टीएनपीएचडब्ल्यू एक्ट) की धारा 4 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67 के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। इन धाराओं के तहत केस दर्ज होने के बाद पुलिस की एक विशेष टीम ने मंगलवार को उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में ले लिया और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए तिरुचि के रास्ते तंजावुर की ओर ले जाया गया।
मद्रास उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत पर सुनवाई और कोर्ट का आदेश
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही उनके कानूनी दल ने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया और न्यायमूर्ति जी.के. इलानथिरैयन की एकल पीठ के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। याचिका में उदयनिधि स्टालिन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति, चाहे वह मुख्यमंत्री हों या कोई अभिनेत्री, के खिलाफ कोई अपमानजनक या अशोभनीय बयान नहीं दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि भाषण के दौरान किसी भी महिला की गरिमा को आहत करने का उनका कोई इरादा नहीं था और राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से सत्ताधारी दल द्वारा उनके भाषण के अंशों को संदर्भ से बाहर निकालकर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का पक्ष रखा। एडवोकेट जनरल ने अदालत को सूचित किया कि पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर तंजावुर जरूर ले जाया है, लेकिन पुलिस की उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने या जेल भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य केवल उनसे मामले के संबंध में पूछताछ करना है। न्यायमूर्ति जी.के. इलानथिरैयन ने राज्य सरकार की इस दलील को आधिकारिक रिकॉर्ड पर लिया और अपना फैसला सुनाते हुए पुलिस प्रशासन को स्पष्ट आदेश जारी किया कि वह पूछताछ की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार को ही स्टेशन जमानत पर रिहा कर दे। इसके साथ ही न्यायाधीश ने विपक्ष के नेता को निर्देश दिया कि वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करें और जब भी पूछताछ के लिए आवश्यकता हो, प्रस्तुत हों।
सेंगीपट्टी थाने में पूछताछ और तिरुचि से चेन्नई रवानगी
पुलिस का काफिला उदयनिधि स्टालिन को लेकर जब तिरुचिरापल्ली से तंजावुर के लिए निकला तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। तंजावुर शहर और तंजावुर दक्षिण पुलिस स्टेशन के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था क्योंकि वहां बड़ी संख्या में डीएमके समर्थक एकत्र होकर नारेबाजी कर रहे थे। हालांकि, सुरक्षा कारणों से पुलिस काफिले को तंजावुर शहर में प्रवेश कराने के बजाय शहर से पहले ही तंजावुर जिले में स्थित सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन की ओर मोड़ दिया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्वयं सेंगीपट्टी थाने पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
शाम लगभग 6:45 बजे उदयनिधि स्टालिन को लेकर पुलिस का वाहन सेंगीपट्टी थाने के प्रांगण में पहुंचा। थाने के बाहर पहले से ही डीएमके कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमी हुई थी। पुलिस वाहन से उतरते ही उदयनिधि स्टालिन ने हाथ हिलाकर बाहर मौजूद अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया, जिसके बाद अधिकारी उन्हें पूछताछ कक्ष में ले गए। सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन के भीतर उनसे लगभग डेढ़ घंटे तक गहन सवाल-जवाब किए गए। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप पूछताछ समाप्त होने के बाद पुलिस ने उन्हें स्टेशन जमानत पर मुक्त कर दिया। रिहाई के तुरंत बाद उदयनिधि स्टालिन तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से वह विशेष विमान द्वारा चेन्नई के लिए रवाना हो गए। चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुंचने पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसके बाद वह अपने सरकारी आवास के लिए प्रस्थान कर गए।
तिरुचि हवाई अड्डे पर उदयनिधि स्टालिन का बयान और सरकार पर आरोप
रिहाई के बाद तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके भाषण का उद्देश्य कभी भी किसी व्यक्ति विशेष या महिलाओं का अनादर करना नहीं था। उन्होंने उन मीडिया दावों को पूरी तरह से काल्पनिक और बेबुनियाद बताया जिनमें कहा गया था कि उनके वक्तव्य में द्विअर्थी या अशोभनीय संकेत शामिल थे।
उदयनिधि स्टालिन ने टीवीके सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक द्वेष के तहत उनके वीडियो क्लिप में काट-छांट की है और ऐसे शब्द उनके नाम से जोड़ दिए हैं जो उन्होंने जनसभा में कभी कहे ही नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि वह लगातार राज्य में किसानों के मुद्दों, कावेरी जल बंटवारे के संकट और जनहित की समस्याओं को उठा रहे थे। टीवीके सरकार इन बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इन सवालों का जवाब देने से बचने के लिए जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति के तहत यह झूठा मामला दर्ज कराया गया है।
सत्ताधारी टीवीके नेताओं के कड़े तेवर और जयललिता का उल्लेख
उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई पर टीवीके सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया। टीवीके के वरिष्ठ नेता तथा राज्य के ऊर्जा एवं कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने मंगलवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि डीएमके युवा मोर्चा के सचिव और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है और वह तमिलनाडु विधानसभा में प्रवेश करने या सार्वजनिक जीवन में बने रहने के योग्य नहीं हैं।
मंत्री आर. निर्मलकुमार ने तर्क दिया कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से समाज एक आदर्श व्यवहार की अपेक्षा करता है। महिलाओं के प्रति अशोभनीय रवैया रखने वाला व्यक्ति विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने की अर्हता खो देता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आज पुरातची तलैवर एम.जी. रामचंद्रन और अम्मा जे. जयललिता जीवित होते, तो वे भी महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए वही कठोर कदम उठाते जो आज मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उठाया है।
दूसरी ओर, चेन्नई के पनईयूर स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित टीवीके और उसके सहयोगी दलों के विधायकों की उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए चुनाव अभियान प्रबंधन के टीवीके महासचिव तथा लोक निर्माण व खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने सरकार की नीति को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शेगी नहीं। चाहे वह कोई बड़ा विपक्षी नेता हो, पीली पत्रकारिता करने वाले मैगजीन प्रकाशक हों या सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी से ट्रॉल करने वाले लोग हों, सभी के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि जिस प्रकार सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है, उसी प्रकार सार्वजनिक संवाद से महिलाओं के अपमान की संस्कृति को समाप्त करना टीवीके की प्रमुख नीति है। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कभी किसी पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए; यहां तक कि मदुरै की एक रैली में उन्होंने एम.के. स्टालिन को केवल एक बार पारिवारिक रिश्ते के संदर्भ में 'स्टालिन अंकल' कहा था और बाद में उसका प्रयोग भी बंद कर दिया था।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया: एआईएडीएमके और एमडीएमके का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर तमिलनाडु की अन्य प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के महासचिव और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए सरकार के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने टीवीके सरकार से मांग की कि वह नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ की गई गिरफ्तारी की कार्रवाई को तत्काल वापस ले। पलानीस्वामी ने कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद एक संवैधानिक और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। सरकार द्वारा विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले विपक्ष के नेता को गिरफ्तार कर बिना उनके ही सत्र आयोजित करने की योजना बनाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ और निंदनीय है।
हालांकि, इसके साथ ही पलानीस्वामी ने उदयनिधि स्टालिन की भाषा शैली पर भी सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एआईएडीएमके लंबे समय से यह कहती आ रही है कि उदयनिधि स्टालिन को अपने द्वारा बोले जाने वाले शब्दों के चयन पर संयम और ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस उच्च पद पर वह आसीन हैं, उसकी गरिमा को समझे बिना महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणियां करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
वहीं दूसरी ओर, मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको ने भी उदयनिधि स्टालिन के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की। वाइको ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि तंजावुर की जनसभा में उदयनिधि स्टालिन द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा ने उन्हें एक निचले स्तर के साधारण मंच वक्ता के समकक्ष ला खड़ा किया है। वाइको ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से भाषण देते समय संयम और शिष्टाचार बनाए रखना अनिवार्य है और इस तरह की हल्की बयानबाजी नेता प्रतिपक्ष जैसे उच्च पद की गरिमा और मर्यादा के बिल्कुल अनुकूल नहीं है।
डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन और युवा मोर्चा का पलटवार
डीएमके के शीर्ष नेतृत्व ने इस कानूनी कार्रवाई को सत्ताधारी दल का राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को बयान जारी कर आरोप लगाया कि टीवीके सरकार का यह कदम केवल एक राजनीतिक चालबाजी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में राज्य कावेरी जल बंटवारे के गंभीर संकट से जूझ रहा है और सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं तथा कावेरी मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपना रही है। एम.के. स्टालिन ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे विपक्ष की आवाज को दबाने की नीयत से उदयनिधि स्टालिन को निशाना बनाया गया है।
इसी सुर में डीएमके युवा मोर्चा ने भी एक आधिकारिक वक्तव्य जारी कर अपने प्रमुख नेता की गिरफ्तारी पर गहरा रोष व्यक्त किया। युवा मोर्चा ने कहा कि कावेरी नदी के जल बंटवारे पर उठाए गए तीखे सवालों का जवाब देने के बजाय टीवीके सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई का सहारा लिया है, जो राज्य सरकार की बेबसी, लाचारी और घबराहट को दर्शाती है। तिरुचि में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व मंत्री अनबिल महेश पोयामोझी ने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार को इस बात का डर था कि उदयनिधि स्टालिन बुधवार को विधानसभा में मेकेदाटु बांध निर्माण विवाद और किसानों की समस्याओं पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे, इसीलिए सत्र से ठीक पहले उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
मध्य तमिलनाडु और विभिन्न जिलों में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के विरोध में और उनके समर्थन में मंगलवार को तमिलनाडु के कई जिलों में भारी राजनीतिक घमासान और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। मध्य तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुनेलवेली और रामनाथपुरम जैसे प्रमुख शहरों में माहौल दिनभर तनावपूर्ण बना रहा।
तिरुचिरापल्ली में डीएमके कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मेयर एम. अनबाझगन के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सेंट्रल बस स्टैंड के निकट एकत्रित हुए और टीवीके सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं तंजावुर जिले के पट्टुकोट्टई में स्थिति तब और बिगड़ गई जब टीवीके युवा मोर्चा के सदस्यों ने सड़क पर उदयनिधि स्टालिन का पुतला फूंकने का प्रयास किया। हालांकि, मौके पर तैनात पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुतले को छीन लिया और पुतला दहन के प्रयास को नाकाम कर दिया। इसके अलावा सेंगीपट्टी थाने के बाहर भी सैकड़ों डीएमके समर्थक झंडे लेकर पहुंचे और नारेबाजी करते रहे।
कोयंबटूर जिले के विभिन्न हिस्सों में डीएमके और टीवीके के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। गांधीपुरम सहित शहर के प्रमुख चौराहों पर डीएमके समर्थकों ने गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर, कवुंडमपलायम क्षेत्र की विधायक कनिमोझी संतोष के नेतृत्व में टीवीके कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधायक कनिमोझी संतोष ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में ऊंचे पदों पर आसीन नेताओं पर भाषा में संयम और मर्यादा बनाए रखने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारधाराओं का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी मंच से महिलाओं को नीचा दिखाने या उनके सम्मान पर चोट करने वाली भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मदुरै में टीवीके की महिला इकाई की कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर जुलूस निकाला और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ नारेबाजी की। तिरुनेलवेली में टीवीके कार्यकर्ताओं ने तिरुनेलवेली रेलवे जंक्शन के बाहर जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया, जबकि रामनाथपुरम में भी टीवीके सदस्यों ने डीएमके नेता के बयान के विरोध में प्रदर्शन कर अपना आक्रोश प्रकट किया।



















