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महेश भट्ट का फिल्मी सफर, जटिल रिश्ते और पर्दे पर निजी जिंदगी की अनकही दास्तानमनोरंजन
20 सित॰ 2026, 5:06 am (33 मिनट पहले)· 0

महेश भट्ट का फिल्मी सफर, जटिल रिश्ते और पर्दे पर निजी जिंदगी की अनकही दास्तान

बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मकार महेश भट्ट का जीवन संघर्षों, जटिल पारिवारिक पृष्ठभूमि, दो शादियों और पर्दे पर उतारी गई निजी सच्चाइयों का एक अनूठा संगम रहा है।

सिनेमा जगत में बहुत कम ऐसे कहानीकार हुए हैं जिन्होंने अपनी ही जिंदगी की उथल-पुथल, दर्द और उलझे हुए रिश्तों को बेबाकी से कैमरे के सामने रखा हो। इस श्रेणी में फिल्मकार महेश भट्ट का नाम सबसे पहले याद किया जाता है। उनकी बनाई फिल्मों के किरदार काल्पनिक दुनिया की बजाय अक्सर उनके अपने वजूद और अंदरूनी कश्मकश से रूबरू कराते हैं। एक असामान्य बचपन से लेकर हिंदी सिनेमा के शीर्ष निर्देशकों में शुमार होने तक, उनकी अपनी दास्तान किसी बेहद भावुक और नाटकीय पटकथा से कम नजर नहीं आती।

कठिन बचपन और सामाजिक तानों के बीच बीता शुरुआती दौर

महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई की सरजमीं पर हुआ था। उनके पिता नानाभाई भट्ट हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बतौर निर्माता सक्रिय थे। हालांकि, नानाभाई भट्ट ने महेश की वालिदा शिरीन मोहम्मद अली के साथ कभी औपचारिक निकाह नहीं किया था। इस पारिवारिक स्थिति की वजह से महेश भट्ट को अपने शुरुआती दिनों से ही समाज के तीखे तानों और पहचान से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा।

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उस दौर में उनके घर के माली हालात भी ठीक नहीं थे और आर्थिक तंगी रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी थी। अभाव और सामाजिक असहजता के इस माहौल ने उन्हें कच्ची उम्र में ही इंसानी फितरत, रिश्तों की जटिलता और हकीकत को बहुत करीब से देखने पर मजबूर कर दिया। इन्हीं कठिन परिस्थितियों ने उनके भीतर कुछ असाधारण कर गुजरने की गहरी इच्छा जगाई।

महबूब स्टूडियो की चौखट, एक सफेद झूठ और फिल्मी दुनिया में पहला कदम

फिल्मों की दुनिया उन्हें लगातार अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। इसी लगन के चलते वह काम की तलाश में मुंबई के मशहूर महबूब स्टूडियो के चक्कर लगाने लगे। उस समय बॉलीवुड के बड़े घरानों से उनका कोई सीधा परिचय नहीं था। काम का जरिया तलाशने के लिए उन्होंने एक छोटा सा झूठ बोला कि वह जाने-माने फिल्म निर्देशक राज खोसला को अच्छी तरह जानते हैं।

हालांकि, जब इस संबंध में उनसे सीधे सवाल किए गए, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के सच स्वीकार कर लिया। अपनी गलती को तुरंत मान लेने की इसी साफगोई और ईमानदारी ने राज खोसला को गहराई से प्रभावित किया। राज खोसला ने नौजवान महेश की इसी सच्चाई को परखते हुए उन्हें अपनी टीम में बतौर सहायक निर्देशक शामिल कर लिया, जहां से उनके सिनेमाई सफर की नींव पड़ी।

निर्देशन की पहली पारी और समाज के कड़वे सच बयां करती फिल्में

बतौर मुख्य निर्देशक महेश भट्ट ने साल 1974 में फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ के जरिए अपनी पारी का आगाज किया। अपनी शुरुआती रचनाओं से ही उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दे दिया था कि वह पारंपरिक नाच-गाने के बजाय सामाजिक दबावों और मानवीय दर्द को पर्दे पर जगह देंगे। इसके बाद उन्होंने ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘नाम’, ‘अवारगी’ और ‘कश्मकश’ जैसी बेहद संजीदा फिल्मों का निर्देशन किया।

साल 1984 में दर्शकों के सामने आई ‘सारांश’ ने सिनेमा समीक्षकों और आम लोगों को झकझोर कर रख दिया। इस फिल्म ने महेश भट्ट को एक ऐसे संवेदनशील फिल्मकार के तौर पर स्थापित किया, जो बिना किसी कृत्रिम चमक-दमक के बुजुर्गों की लाचारी, भ्रष्टाचार और जीवन की कड़वी सच्चाइयों को बहुत सादगी के साथ प्रस्तुत करने का साहस रखता था।

‘आशिकी’ का दौर, संगीत का जादू और विशेष फिल्म्स का उभार

गंभीर सिनेमा में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद साल 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘आशिकी’ ने महेश भट्ट की लोकप्रियता को नए शिखर पर पहुंचा दिया। यह फिल्म केवल एक भावुक युवा प्रेम कहानी भर नहीं थी, बल्कि इसके गानों ने संगीत की दुनिया में इतिहास रच दिया। इस अप्रत्याशित कामयाबी ने साबित किया कि महेश भट्ट सामाजिक गहराई के साथ-साथ बड़े स्तर पर व्यावसायिक मनोरंजन परोसने में भी पूरी तरह माहिर हैं।

आगे चलकर 1990 के दशक में उन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर विशेष फिल्म्स की कमान संभाली। इस बैनर के माध्यम से ‘राज’, ‘मर्डर’, ‘जिस्म’, ‘जन्नत’ और ‘आशिकी 2’ जैसी अत्यधिक सफल फिल्मों का निर्माण हुआ। इन फिल्मों ने नए कलाकारों को रातों-रात शोहरत दिलाई और दर्शकों को थ्रिलर व संगीत से भरपूर सिनेमा दिया।

महेश भट्ट के रचनात्मक जीवन में साल 1998 में आई फिल्म ‘जख्म’ को मील का पत्थर माना जाता है। निजी अनुभवों से प्रेरित इस फिल्म को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के रूप में नरगिस दत्त अवॉर्ड भी दिया गया।

लोरिएन से पहली शादी और रिश्तों में पैदा हुआ तनाव

व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ महेश भट्ट का निजी जीवन भी लगातार चर्चा और विवादों के केंद्र में रहा। अपनी पढ़ाई के दिनों में उनका परिचय लोरिएन नामक युवती से हुआ, जो बॉम्बे स्कॉटिश अनाथालय में रहकर पढ़ाई कर रही थीं। दोनों के बीच लगाव इतना गहरा था कि एक बार महेश उनसे मिलने की खातिर अनाथालय की ऊंची दीवार लांघकर भीतर घुस गए थे, जहां वह सुरक्षाकर्मियों द्वारा पकड़े भी गए।

जब दोनों करीब 20 साल के हुए, तब उन्होंने दांपत्य जीवन में बंधने का फैसला लिया। शादी के बाद लोरिएन ने अपना नाम बदलकर किरण भट्ट रख लिया। निकाह के एक साल बाद उनके घर बेटी पूजा भट्ट का जन्म हुआ। हालांकि, समय बीतने के साथ दोनों के वैवाहिक संबंधों में कड़वाहट और दूरियां आने लगीं। पहली पत्नी किरण से उनके दो बच्चे हैं, बेटी पूजा भट्ट और बेटा राहुल भट्ट।

परवीन बाबी का साथ और सोनी राजदान संग दूसरा विवाह

किरण के साथ रिश्ते में आई दरार के दौर में महेश भट्ट का नाम मशहूर अदाकारा परवीन बाबी के साथ जुड़ा। दोनों के गहरे रिश्ते ने इंडस्ट्री में खूब सुर्खियां बटोरीं और एक समय ऐसा भी आया जब दोनों एक साथ रहने लगे थे।

इसके बाद, साल 1984 में जब वह ‘सारांश’ के निर्माण में व्यस्त थे, तब उनकी मुलाकात अभिनेत्री सोनी राजदान से हुई। सेट पर शुरू हुई यह जान-पहचान धीरे-धीरे गहरे प्रेम में बदल गई। उस वक्त महेश भट्ट अपनी पहली पत्नी किरण के साथ वैवाहिक रिश्ते में थे। बाद में महेश भट्ट और सोनी राजदान ने औपचारिक रूप से शादी कर ली। इस विवाह से उनकी दो बेटियां हैं, शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट, जो आज बॉलीवुड में एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं।

सवाल-जवाब

महेश भट्ट का जन्म कब और कहां हुआ था?
महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था।
महेश भट्ट के माता-पिता कौन थे?
उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट था जो एक फिल्म निर्माता थे, और उनकी मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली था।
महेश भट्ट ने निर्देशन की शुरुआत किस फिल्म से की थी?
उन्होंने साल 1974 में फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी।
फिल्म ‘जख्म’ को कौन सा बड़ा सम्मान मिला था?
साल 1998 में रिलीज हुई ‘जख्म’ को राष्ट्रीय पुरस्कार और राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड मिला था।
महेश भट्ट की पहली पत्नी कौन थीं और उनके कितने बच्चे हैं?
उनकी पहली पत्नी लोरिएन थीं, जिन्होंने शादी के बाद किरण नाम रखा था। उनसे दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं।
सोनी राजदान से महेश भट्ट की मुलाकात कब हुई थी?
सोनी राजदान से उनकी मुलाकात साल 1984 में फिल्म ‘सारांश’ की शूटिंग के दौरान हुई थी, जिनसे उनकी बेटियां शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Aisha Khan@aisha-khan·13 मिनट पहले

महेश भट्ट की सिनेमाई शैली ने बॉलीवुड में पारंपरिक कमर्शियल सिनेमा के सांचे को तोड़ा और पर्सनल वॉयड को पर्दे पर कहानी का मुख्य आधार बनाया। उनके करियर का यह शुरुआती संघर्ष और जीवन के कड़वे अनुभवों को कला में ढालने की प्रवृत्ति ही उनके ब्रांड सिनेमा की ताकत बनी, जो आज के स्ट्रीमिंग दौर में भी व्यक्तिगत कहानियों के प्रति दर्शकों की रुचि को परिभाषित करती है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·13 मिनट पहले

आयशा खान के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, महेश भट्ट की फिल्मों का बॉक्स ऑफ़िस पर असर इस बात का प्रमाण है कि भारतीय दर्शक हमेशा से मानवीय संवेदनाओं और यथार्थवादी कहानियों से जुड़ाव महसूस करते रहे हैं। ‘अर्थ’ और ‘सारांश’ जैसी फिल्मों ने न केवल वैकल्पिक सिनेमा को मजबूत किया, बल्कि यह साबित किया कि दर्द और निजी अनुभवों को बिना किसी परदे के पेश करने का साहस भी व्यावसायिक रूप से सफल हो सकता है। आज जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर व्यक्तिगत और बायोपिक आधारित कहानियों की मांग बढ़ रही है, तब भट्ट साहब का यह विजन और भी प्रासंगिक हो गया है।

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