इंदौर के रावजी बाजार में महिला को जबरन ले जाने की कोशिश, गुस्साई भीड़ ने आरोपी असलम को अर्धनग्न कर पीटाहल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कथित शुद्धीकरण का विवाद पहुंचा उत्तराखंड हाई कोर्टतमिलनाडु में 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा प्याज, इन जगहों से आसानी से करें खरीदारीअमेरिकी डॉलर में बड़ी गिरावट, एनएफपी आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजरअमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीनी युआन में दायरे में कारोबार जारीपश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाया जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का मुद्दा, सामने आया नया प्रस्तावउत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पकड़ी कोडीन सिरप की तीस हजार शीशियां, चार तस्कर दबोचेउत्तर प्रदेश में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा का ऐलान, 5 सितंबर से करें आवेदनजीपीटी-6 अस्त्र के साथ एजीआई युग की शुरुआत, ओपनएआई का बड़ा दावायूरोपीय गैस की कीमतें EUR70/MWh के पार, सर्दियों से पहले कम स्टोरेज ने कीमतों को संभाला
छतरपुर के जटाशंकर मंदिर में मूसलाधार बारिश के बाद गोमुख की तेज धारा से हुआ कुदरती जलाभिषेकमध्य प्रदेश
3 सित॰ 2026, 3:08 pm (9 घंटे पहले)· 1

छतरपुर के जटाशंकर मंदिर में मूसलाधार बारिश के बाद गोमुख की तेज धारा से हुआ कुदरती जलाभिषेक

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध जटाशंकर धाम में दो दिनों की भारी बारिश के बाद गोमुख से जलधारा का तेज बहाव शुरू हो गया है। प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक होते देख श्रद्धालु इसे अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य मान रहे हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्राचीन जटाशंकर धाम में मूसलाधार बारिश के बीच प्रकृति और आस्था का एक अनोखा संगम देखने को मिला है। लगातार दो दिनों तक हुई भारी बारिश के बाद मंदिर परिसर में स्थित 'गोमुख' से जल की विशाल धारा फूट पड़ी, जिसने पवित्र शिवलिंग का स्वतः ही जलाभिषेक करना शुरू कर दिया। बुंदेलखंड के केदारनाथ के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में पहाड़ियों से गिरते झरने और गोमुख का उफान मंदिर की भव्यता को कई गुना बढ़ा रहा है। मंदिर प्रांगण में पहुंचे श्रद्धालु इस क्षण को किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं और लगातार हो रही जलवर्षा के बीच पूजा-अर्चना में लीन हैं।

गोमुख का प्राकृतिक जलाभिषेक और पौराणिक मान्यताएं

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जटाशंकर धाम वह पावन स्थल है जहाँ भगवान शिव ने अपनी घनी जटाओं के बीच ध्यान साधना की थी। इस मंदिर में स्थित गोमुख से सामान्य दिनों में भी जलधारा बहती रहती है, लेकिन मॉनसून के दौरान दो दिनों तक हुई भीषण बारिश ने इसके प्रवाह को अत्यंत तीव्र कर दिया है। गोमुख से निकलता पानी सीधे शिवलिंग पर गिर रहा है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं महादेव का जलाभिषेक कर रही हो। इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले तीर्थयात्रियों का तांता लगा हुआ है। बारिश के मौसम में बढ़े इस जलप्रवाह ने यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव को और अधिक खास बना दिया है।

ये भी पढ़ें

सोशल मीडिया पर छाया अद्भुत नजारा

मंदिर प्रांगण और आसपास की पहाड़ियों से गिरते प्राकृतिक झरनों की सुंदरता को श्रद्धालुओं ने अपने कैमरों में कैद किया। गोमुख से बहती जलधारा का यह मनमोहक वीडियो अब इंटरनेट और सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से देखा जा रहा है। आध्यात्मिक विचार रखने वाले लोग इस नजारे को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मान रहे हैं। पवित्र स्थान पर प्राकृतिक रूप से हो रहे इस जलाभिषेक के दृश्य ने देश भर के शिव भक्तों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। लोग इस वीडियो को देखकर मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल की भरपूर सराहना कर रहे हैं।

पर्यटकों के लिए चेतावनी और प्रशासन की तैयारी

जटाशंकर धाम का यह रूप जितना मनमोहक है, वहीं लगातार हो रही बारिश के कारण मंदिर प्रांगण में कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी उत्पन्न हो गई हैं। दो दिनों के जलभराव के चलते मंदिर के मुख्य आंगन में पानी जमा हो गया है और पास ही बहने वाली नदी का जलस्तर भी काफी ऊपर आ गया है। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों ने पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे उफनती नदी और जलभराव वाले हिस्सों के करीब न जाएं तथा सुरक्षित स्थानों पर रहकर ही दर्शन एवं पूजन करें।

सवाल-जवाब

जटाशंकर धाम कहाँ स्थित है?
जटाशंकर धाम मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे 'बुंदेलखंड का केदारनाथ' भी कहा जाता है।
जटाशंकर धाम में गोमुख से पानी क्यों बहने लगा?
छतरपुर इलाके में दो दिनों की भारी बारिश के कारण गोमुख से पानी का बहाव बेहद तेज हो गया, जिससे प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक होने लगा।
जटाशंकर धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यता क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी स्थान पर अपनी जटाओं के बीच ध्यान लगाया था, इसलिए इस स्थान का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है।
भारी बारिश के कारण मंदिर परिसर में क्या चुनौतियां पैदा हुई हैं?
लगातार बारिश से मंदिर के आंगन में पानी भर गया है और पास की नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे प्रशासन को सुरक्षा परामर्श जारी करना पड़ा।
प्रशासन ने पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए क्या सलाह दी है?
अधिकारियों ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उफनती नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा सावधानी बरतने की सलाह दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR