मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति करके देश में नया इतिहास रच दिया है, और इनमें सबसे ज्यादा चर्चा गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव के नाम को लेकर हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि राघौगढ़ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का गृहनगर भी है, और अनिमेष के पिता अशोक भार्गव उनकी करीबी दोस्ती के लिए जाने जाते हैं।
पिता की दोस्ती, बेटे की अलग विचारधारा
पेशे से जाने-माने वकील अशोक भार्गव साल 1975 से दिग्विजय सिंह के साथ न सिर्फ करीबी रिश्ता रखते हैं, बल्कि दोनों के बीच गहरी और अटूट दोस्ती है। लेकिन बेटे अनिमेष भार्गव ने पारिवारिक राजनीतिक झुकाव से हटकर बिल्कुल अलग राह चुनी। शुरू से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रवाद, संघ और भाजपा की विचारधारा से रहा है। करीब एक दशक पहले उन्होंने एचडीएफसी बैंक में मैनेजर की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और पत्नी के साथ भोपाल शिफ्ट हो गए। तभी से वे बिना किसी स्वार्थ के भाजपा प्रदेश कार्यालय में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। सुबह से देर रात तक पार्टी दफ्तर की व्यवस्थाएं संभालना ही उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या बन चुकी थी।
वक्फ संशोधन अधिनियम लागू करने वाला पहला राज्य बना मध्य प्रदेश
4 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश राजपत्र में जारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए राज्य ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के सख्त प्रावधान लागू करते हुए देश का पहला राज्य बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले वक्फ अधिनियम-1995 के तहत बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही सदस्य बन सकते थे। साल 2025 में केंद्र सरकार ने इस कानून में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए यह अनिवार्य कर दिया कि हर राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य जरूर हों। इसी प्रावधान को लागू करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के सनवर पटेल को बोर्ड का नया अध्यक्ष बनाया, जबकि गुना के अनिमेष भार्गव और इंदौर के मनोज मालपानी को हिंदू सदस्य के तौर पर शामिल कर देश के सामने एक नई मिसाल पेश की।
फाइनेंस सेक्टर के अनुभवी अनिमेष अब भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट
एमबीए (फाइनेंस) की डिग्री रखने वाले अनिमेष भार्गव को फाइनेंस और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने का करीब 18 साल का अनुभव है। फिलहाल वे मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर पार्टी का पक्ष सार्वजनिक मंचों पर रखते हैं। उनकी संगठनात्मक यात्रा को देखें तो करीब एक दशक पहले राघौगढ़ नगर पालिका चुनाव के समय उन्होंने भाजपा से अध्यक्ष पद के टिकट के लिए जोरदार दावेदारी की थी। उस वक्त पार्टी के भीतर बने राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। लेकिन निराश होने के बजाय उन्होंने खुद को पूरी तरह संगठन के काम में झोंक दिया और भोपाल आकर प्रदेश की राजनीति की मुख्यधारा में सक्रिय हो गए। उनकी इसी लंबी मेहनत और समर्पण का नतीजा है कि आज उन्हें राष्ट्रीय स्तर की यह अहम जिम्मेदारी मिली है।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की नई टीम में कौन-कौन शामिल
नई अधिसूचना के मुताबिक मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में इन सदस्यों को शामिल किया गया है:
- अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना): सदस्य, गैर-मुस्लिम
- मनोज मालपानी (इंदौर): सदस्य, गैर-मुस्लिम
- डॉ. नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली): सदस्य, कार्यकाल अप्रैल 2028 तक
- आतिफ अकील, विधायक भोपाल उत्तर: सदस्य
- शाइस्ता सुल्तान, पार्षद बैरसिया भोपाल: सदस्य
- शबाना खान, पार्षद रतलाम: सदस्य
- आयुक्त, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग: पदेन सदस्य
इस तरह मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की टीम में मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों को जगह देकर राज्य सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने वाला देश का पहला राज्य होने का दर्जा हासिल कर लिया है।











