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अगस्त में सात देश बढ़ाएंगे तेल उत्पादन, कच्चे तेल के दाम 72 डॉलर से नीचेबाज़ार
6 जुल॰ 2026, 4:51 am (45 दिन पहले)· 3

अगस्त में सात देश बढ़ाएंगे तेल उत्पादन, कच्चे तेल के दाम 72 डॉलर से नीचे

ओपेक+ के सात सदस्य देश अगस्त में हर दिन 1,88,000 बैरल अतिरिक्त कच्चा तेल बाजार में उतारेंगे। यह लगातार पांचवां महीना है जब गठबंधन ने आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति जताई है।

कच्चे तेल के दाम में आई तेज गिरावट के बीच ओपेक+ ने एक बार फिर आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है। गठबंधन के सात सदस्य देश अगस्त में उत्पादन में मामूली इजाफा करेंगे और हर दिन कुल 1,88,000 बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे। खास बात यह है कि यह लगातार पांचवां महीना है जब यह गठबंधन आपूर्ति बढ़ाने पर राजी हुआ है। यह कदम उस वक्त आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कम होने के बाद तेल की कीमतें तेजी से लुढ़क चुकी हैं।

किन देशों ने लिया फैसला

इस फैसले में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हुए। ओपेक+ ने साफ किया कि वह आगे भी आपूर्ति और मांग के संकेतों पर नजर बनाए रखेगा। गठबंधन ने इस योजना को बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने की मंशा से जोड़ा है। तेल बाजार अब भी जहाजों की आवाजाही से जुड़े जोखिमों और कूटनीति को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ है, इसलिए उत्पादक देश फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

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उत्पादक देशों ने कहा कि वे बाजार की परिस्थितियों और जोखिमों पर लगातार नजर रखेंगे। गठबंधन ने अपने बयान में कहा, "देश बाजार की स्थितियों की निगरानी और आकलन जारी रखेंगे, और बाजार में स्थिरता बनाए रखने की अपनी लगातार कोशिशों के तहत उन्होंने सतर्क रुख अपनाने के महत्व को दोहराया।"

क्यों गिरे तेल के दाम

पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें इसलिए गिरीं क्योंकि कारोबारियों की उम्मीदें बेहतर होने लगीं। अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से पहले और बाद, दोनों ही मौकों पर दाम टूटे। एक व्यापक सहमति पत्र के तहत ईरान जहाजों को अपने रास्ते से गुजरने देने पर राजी हुआ। वहीं अमेरिका भी ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी खत्म करने पर सहमत हो गया।

इसके बाद से ज्यादा व्यापारिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने लगे हैं। जंग शुरू होने से पहले इसी रास्ते से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था। हालांकि आवाजाही अब भी युद्ध से पहले वाले स्तर से नीचे है और तनाव बरकरार है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को तेल टैंकरों को लेकर चेतावनी दी और कहा कि जहाजों को तय किए गए मंजूर रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा।

72 डॉलर से नीचे पहुंचा ब्रेंट क्रूड

अमेरिका और ईरान के वार्ताकार जैसे-जैसे अंतिम शांति समझौते पर काम कर रहे हैं, तेल के दाम गिरते जा रहे हैं। रविवार रात बाजार खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था। यह उस स्तर के करीब है जहां अमेरिका और इजरायल के फरवरी के आखिर में हुए हमलों से पहले भाव थे। इससे पहले मार्च में कीमतें उछलकर करीब 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं।

जंग ने खड़ा किया ऊर्जा संकट

इस टकराव ने कई इलाकों में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया था। होर्मुज जलडमरूमध्य में ज्यादातर जहाजों की आवाजाही ठप होने के कारण ओपेक+ की पहले की बढ़ोतरी का असर सीमित रह गया था। वह अतिरिक्त तेल बाधित आपूर्ति और तंग सप्लाई की भरपाई नहीं कर पाया। इस दबाव से ईंधन खरीदने वालों और आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की लागत और बढ़ गई।

जंग के शुरुआती दौर में मध्य पूर्व के कई बड़े उत्पादकों ने अपना उत्पादन घटा दिया था। जहाज खुलकर आवाजाही नहीं कर पा रहे थे, इसलिए बहुत सारा तेल निर्यात के रास्तों के अभाव में अटका रहा। S&P ग्लोबल एनर्जी का अनुमान है कि खाड़ी क्षेत्र का उत्पादन जल्दी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटेगा। इसके मुताबिक पूरी तरह वापसी में कम से कम 2027 की पहली तिमाही तक का वक्त लग सकता है।

आगे क्या

ऊर्जा जानकार बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि ईंधन की लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि लड़ाई खत्म होने के बाद भी उपभोक्ता वस्तुओं के दाम पर दबाव बना रह सकता है। ओपेक+ जोखिमों पर नजर रखते हुए छोटे-छोटे कदमों में आपूर्ति बढ़ा रहा है। अगस्त की यह बढ़ोतरी बाजार में और तेल तो जोड़ेगी, लेकिन जहाजों के रास्तों को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।

सवाल-जवाब

अगस्त में कितना तेल उत्पादन बढ़ेगा?
ओपेक+ के सात सदस्य देश अगस्त में हर दिन कुल 1,88,000 बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे।
किन देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है?
इसमें सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं।
यह लगातार कौन सा महीना है जब आपूर्ति बढ़ाई गई?
यह लगातार पांचवां महीना है जब ओपेक+ ने आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति जताई है।
ब्रेंट क्रूड इस समय किस स्तर पर है?
रविवार रात बाजार खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि मार्च में यह करीब 120 डॉलर तक पहुंच गया था।
खाड़ी क्षेत्र का उत्पादन कब तक पूरी तरह पटरी पर लौटेगा?
S&P ग्लोबल एनर्जी के अनुमान के मुताबिक पूरी तरह वापसी में कम से कम 2027 की पहली तिमाही तक का वक्त लग सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है?
जंग से पहले इसी रास्ते से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था, हालांकि अब आवाजाही युद्ध से पहले वाले स्तर से नीचे है।
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