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सस्ते कच्चे तेल और कमजोर डॉलर के सहारे रुपये को मिली हल्की मजबूतीबाज़ार
3 जुल॰ 2026, 5:34 pm (45 दिन पहले)· 3

सस्ते कच्चे तेल और कमजोर डॉलर के सहारे रुपये को मिली हल्की मजबूती

कच्चे तेल की गिरावट और कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच रुपया 95.26 के पास हल्की बढ़त बनाए हुए है। इसी दौरान विदेशी निवेशकों ने जुलाई में बिकवाली की रफ्तार कुछ घटाई है।

CLSMA20 SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण3 जुलाई 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

CL अभी $68.69 पर है, जबकि EMA20 $76.47, EMA50 $84.03 और EMA200 $76.09 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($76.47) के पास थम सकती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 29 है।

आगे संभावित चाल

30 के ऊपर वापसी उछाल की पुष्टि करती है।

भारतीय रुपया इस समय हल्की बढ़त बनाए हुए है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और कमजोर पड़े अमेरिकी डॉलर ने मिलकर पलड़ा रुपये के पक्ष में झुका दिया है, और USD/INR जोड़ी 95.26 के आसपास धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ती दिख रही है। कमजोर डॉलर का सीधा असर यह होता है कि दूसरी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर सस्ता पड़ता है, जिससे रुपये जैसी मुद्राओं को थोड़ी राहत मिलती है।

मजदूरी के आंकड़ों के बाद डॉलर पड़ा नरम

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की कीमत मापता है, करीब 100.78 पर हल्का नीचे कारोबार कर रहा था। इससे पहले गुरुवार को यह इंडेक्स बुधवार के बंद स्तर से लगभग 0.6% लुढ़क गया था, जिससे डॉलर दबाव में आ गया। ताजा वेतन आंकड़ों ने भी माहौल नहीं बदला। वेतन वृद्धि का अहम पैमाना माने जाने वाले औसत प्रति घंटा वेतन (एवरेज आवरली अर्निंग्स) में साल-दर-साल 3.5% की बढ़ोतरी हुई, जो अनुमान के मुताबिक रही और पिछले 3.4% के आंकड़े से तेज है। इस तरह के आंकड़े ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें तय करने में भूमिका निभाते हैं।

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सस्ते तेल से आयातकों को राहत

रुपये के लिहाज से असली कहानी ऊर्जा की घटती लागत है। 20 जुलाई को एक्सपायर होने वाला MCX कच्चा तेल कॉन्ट्रैक्ट जून में 20% से ज्यादा टूटने के बाद अब 6,450 से 6,600 के दायरे में टिक गया है। कीमतें मध्य पूर्व में छिड़े संघर्ष से पहले वाले स्तरों के आसपास बनी रहने के आसार हैं, क्योंकि कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में "प्रगति" का जिक्र किया है। शुक्रवार के लाइव आंकड़ों में कच्चा तेल करीब $68.69 पर दिखा, जहां 14 दिन का RSI 29 के पास ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा कर रहा है। भारत जैसी अर्थव्यवस्था, जो अपनी ज्यादातर तेल जरूरत आयात से पूरी करती है, के लिए सस्ता कच्चा तेल सीधे तौर पर मुद्रा के लिए राहत की तरह है, क्योंकि इससे आयात बिल घटता है, व्यापार घाटे पर दबाव कम होता है और रुपये को सहारा मिलता है।

विदेशी निवेशकों ने बिकवाली घटाई

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जुलाई के पहले दो कारोबारी सत्रों में बिकवाल बने रहे और उन्होंने ₹1,452.32 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि तेल की कीमतें ठंडी पड़ने के साथ बिकवाली की रफ्तार घटी है, और निवेशकों का ध्यान अब भारतीय वित्तीय सेवा और उपभोग से जुड़ी कंपनियों के कारोबारी अपडेट पर है। बिकवाली में यह नरमी रुपये के लिए एक अच्छा संकेत मानी जा रही है।

USD/INR का तकनीकी हाल

चार्ट पर USD/INR 95.26 के पास हल्के तेजी के रुझान के साथ है, क्योंकि यह अपने 20 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) करीब 94.93 के ऊपर और डिसेंडिंग ट्रायंगल पैटर्न के ब्रेकआउट से ऊपर टिकी हुई है। इस तरह का ब्रेकआउट अक्सर आगे और बढ़त की संभावना की ओर इशारा करता है। करीब 54 पर मौजूद रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) बताता है कि गति हल्की सकारात्मक है, लेकिन ज्यादा खिंची हुई नहीं है।

अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

नीचे की ओर पहला सहारा 20 दिन के EMA के पास 94.933 पर दिखता है, जिसे दोबारा हासिल की गई गिरावट वाली ट्रेंड-लाइन के करीब 94.764 का क्षेत्र और मजबूती देता है, जबकि इससे गहरा बचाव 94.065 के ढांचागत सपोर्ट जोन के पास है। अगर यह जोड़ी डिसेंडिंग ट्रायंगल ब्रेकआउट को बचाए रखती है, तो यह अपनी बढ़त को 96.00 की ओर बढ़ा सकती है।

बाकी मुद्राएं और सोना कैसा

मुद्रा बाजार में बाकी जगह, शुक्रवार को GBP/USD सकारात्मक दायरे में रहा, हालांकि यूरोपीय सत्र में इसकी तेजी 1.3400 के नीचे थम गई, क्योंकि अनुमान से कमजोर अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल्स के आंकड़े के बाद डॉलर की कमजोरी और गहरी हो गई, जिससे फेड की ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें घटीं। इसी तरह EUR/USD यूरोपीय कारोबार में करीब 1.1450 पर मजबूत रहा और तीन हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर दिखा, इसकी वजह भी डॉलर पर दबाव डाल रहीं घटती दर-वृद्धि उम्मीदें रहीं। सोने ने लगातार तीसरे दिन अपनी तेजी बरकरार रखी और यह डेढ़ हफ्ते के ऊंचे स्तर के पास कारोबार करते हुए पांच हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। तेजी वाले कारोबारी अब भी $4,200 के पार एक चाल का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही वे नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर से इस हफ्ते की रिकवरी के आगे बढ़ने पर दांव लगाएंगे।

क्रिप्टो: हाइपरलिक्विड में तेजी

क्रिप्टो में हाइपरलिक्विड (HYPE) $66 के ऊपर निकल गया और उसने अपना लंबी अवधि का तेजी का रुझान बनाए रखा, जिसे करीब $60 पर चढ़ रहा 50 दिन का EMA सहारा दे रहा है। नजदीकी अवधि में रिटेल मांग बढ़ी है, ओपन इंटरेस्ट 24 घंटे में करीब 5% चढ़ा है और फंडिंग रेट शून्य से ऊपर बने हुए हैं, जबकि संस्थागत मांग इस हफ्ते अब तक शांत रही है।

फेड पर नजर: मिनट्स और वॉर्श

आगे बाजार का ध्यान अगले हफ्ते आने वाले FOMC मिनट्स पर है, जिनमें इस बात के संकेत तलाशे जाएंगे कि क्या चीज एक बंटी हुई कमेटी को रुके रहने से हटाकर दरें बढ़ाने की ओर ले जा सकती है। पिछली बैठक के डॉट प्लॉट ने साफ कर दिया था कि नीति-निर्माता इस पर बंटे हुए हैं कि ऊंची दरें जायज हैं या नहीं, और चेयर केविन वॉर्श के नेतृत्व में फॉरवर्ड गाइडेंस को नरम किए जाने के बीच यह साफ नहीं है कि आखिर कौन सी बात सख्त नीति के लिए व्यापक समर्थन जुटाएगी। सिंत्रा में जुटे बाजार फेड के अगले कदम को समझने की उम्मीद में आए थे, लेकिन ज्यादातर इस पुष्टि के साथ लौटे कि वॉर्श इन संकेतों को पढ़ना काफी मुश्किल बनाना चाहते हैं।

सवाल-जवाब

अभी रुपये को किस चीज से सहारा मिल रहा है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कमजोर अमेरिकी डॉलर रुपये को सहारा दे रहे हैं, क्योंकि भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरत आयात से पूरी करता है और सस्ता तेल आयात बिल घटाता है।
USD/INR कहां कारोबार कर रहा है?
यह जोड़ी करीब 95.26 पर है और 94.93 के पास मौजूद 20 दिन के EMA के ऊपर हल्के तेजी के रुझान के साथ टिकी है।
जुलाई की शुरुआत में विदेशी निवेशकों ने कितनी बिकवाली की?
FII ने जुलाई के पहले दो कारोबारी सत्रों में ₹1,452.32 करोड़ के शेयर बेचे, हालांकि बिकवाली की रफ्तार कुछ घटी है।
सस्ता तेल रुपये की मदद क्यों करता है?
भारत बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए सस्ता कच्चा तेल आयात लागत घटाता है और मुद्रा पर दबाव कम करता है।
USD/INR में कौन से स्तर देखने चाहिए?
सपोर्ट 20 दिन के EMA पर 94.933, फिर 94.764 और 94.065 के पास है, जबकि ब्रेकआउट बना रहने पर जोड़ी 96.00 की ओर बढ़ सकती है।
बाजार फेड से क्या देख रहा है?
ध्यान अगले हफ्ते के FOMC मिनट्स पर है, जिनसे यह संकेत मिल सकता है कि बंटी हुई कमेटी रुके रहने से दरें बढ़ाने की ओर बढ़ेगी या नहीं।
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