अमेरिकी डॉलर इस हफ्ते दबाव में रहा और अब यह 0.50% की साप्ताहिक गिरावट के साथ बंद होने की तरफ बढ़ रहा है। यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) फिलहाल 100.90 के आसपास के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अब बाजार की नजर अगले हफ्ते अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जो संख्या में भले ही कम हों, लेकिन डॉलर की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम हैं।
सोमवार को फाइनल S&P ग्लोबल सर्विसेज PMI और ISM सर्विसेज PMI के आंकड़े आएंगे। इसके बाद मंगलवार को व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस के आंकड़े जारी होंगे। लेकिन पूरे हफ्ते का सबसे बड़ा इवेंट बुधवार को आने वाले FOMC मिनट्स रहेंगे। ये फेडरल रिजर्व की जून बैठक का ब्योरा हैं, और खास बात यह है कि यह चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में हुई पहली बैठक थी। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा मिल सकता है कि नीति-निर्माता ब्याज दरों को सख्त बनाए रखने के अपने रुख पर अब भी कायम हैं या नहीं।
करेंसी बाजार में डॉलर का हाल
प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले देखा जाए तो डॉलर सबसे ज्यादा मजबूती जापानी येन के सामने दिखा रहा है। USD/JPY जोड़ी 161.40 के करीब कारोबार कर रही है। इसी हफ्ते यह जोड़ी 162.84 के स्तर तक पहुंची थी, जो पिछले 40 साल का सबसे ऊंचा स्तर है। अगर डॉलर की मजबूती इसी तरह जारी रही तो जापानी येन पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि अगर अमेरिकी आंकड़े नरम रहते हैं और बाजार यह मानने लगता है कि फेड अब उतना सख्त रुख नहीं रखेगा, तो इस जोड़ी की तेजी पर लगाम लग सकती है। इसके साथ ही, जब तक USD/JPY कई दशकों के इस ऊंचे स्तर के पास बनी रहेगी, बाजार में हस्तक्षेप यानी इंटरवेंशन का खतरा भी बना रहेगा।
ब्रिटिश पाउंड की बात करें तो GBP/USD जोड़ी शुक्रवार को 1.3350 के आसपास हल्की बढ़त में रही। डॉलर की चाल इस दौरान अस्थिर बनी रही। फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ने और अमेरिकी बाजार के स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के चलते बंद रहने से पाउंड इस हफ्ते ठोस साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर दिखा।
यूरो की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही रही। EUR/USD जोड़ी हफ्ते के आखिर में 1.1440 के आसपास अपनी हालिया बढ़त को संभालते हुए एक दायरे में टिकी रही, क्योंकि डॉलर को कोई साफ दिशा नहीं मिल पाई। इस बीच कारोबारी माहौल सुस्त रहा और अमेरिकी बाजार बंद होने की वजह से उतार-चढ़ाव भी सीमित रहा।
सोने में लगातार तीसरे दिन चमक
सोने (XAU/USD) में तेजी बनी हुई है और यह 4,175 डॉलर के आसपास ऊपर की ओर कारोबार कर रहा है। अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड गिरती है और फेड मिनट्स इस उम्मीद को मजबूत करते हैं कि केंद्रीय बैंक अब ज्यादा समय तक सख्त नीति नहीं अपनाएगा, तो सोने को और सहारा मिल सकता है। दूसरी तरफ, अगर डॉलर में जोरदार वापसी होती है तो इस कीमती धातु की तेजी थम सकती है।
शुक्रवार को सोने ने लगातार तीसरे दिन रिकवरी दिखाते हुए 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर कदम बढ़ाए। ऐसा लग रहा है कि यह धातु अपने लगातार चार हफ्ते के गिरावट के सिलसिले को तोड़ देगी। इसकी बड़ी वजह जून के नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के आंकड़े रहे, जो उम्मीद से कमजोर आए। इन आंकड़ों के बाद निवेशकों ने फेड की ओर से आगे और सख्ती की अपनी उम्मीदों को घटा दिया।
क्रिप्टो बाजार में भी लौटी हलचल
बिटकॉइन में तेजी का रुख कायम है और शुक्रवार को लिखे जाने के समय यह 61,000 डॉलर के स्तर से ऊपर बना हुआ था। एथेरियम और रिपल जैसी बड़ी अल्टकॉइन्स में भी बढ़त देखी गई। इससे बाजार की धारणा में हल्का सुधार और निवेशकों में जोखिम लेने की नई भूख के संकेत मिल रहे हैं।
ईरान युद्ध और तेल की चिंता
ईरान युद्ध शुरू हुए करीब चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था हैरान करने वाली मजबूती दिखा रही है। शुरुआत में इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मचाई थी और तेल की कीमतें तेजी से चढ़ गई थीं। लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हाल में हुई कूटनीतिक प्रगति ने आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा रहने की आशंकाओं को कुछ हद तक कम कर दिया है।
सिंत्रा से बाजार को क्या मिला
वित्तीय बाजार सिंत्रा में इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि उन्हें फेडरल रिजर्व के अगले कदम को लेकर कोई इशारा मिलेगा। लेकिन वे ज्यादातर इसी पुष्टि के साथ लौटे कि फेड चेयरमैन केविन वॉर्श इन इशारों को पढ़ पाना और भी मुश्किल बनाने के इरादे में हैं। यही वजह है कि अब सबकी निगाहें बुधवार के मिनट्स पर टिक गई हैं, जिनसे शायद कुछ साफ तस्वीर उभर सके।













