घरेलू और विदेशी बाजार में सोने की चमक इस हफ्ते भी बरकरार रहने की उम्मीद है। बाजार की नजर अब अमेरिका समेत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है, जिनसे यह अंदाजा लगेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर आगे क्या रुख अपनाता है। कारोबारी खासतौर पर अमेरिकी सेवा पीएमआई, व्यापार के आंकड़े और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों पर ध्यान देंगे। इसके साथ ही यूरो क्षेत्र, चीन, जापान और जर्मनी से जारी होने वाले महंगाई के आंकड़े भी दिशा तय करेंगे। किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम या कच्चे तेल की कीमतों में हलचल से कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।
बीते हफ्ते कैसा रहा सोने का सफर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव ने लगातार चार हफ्ते की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और वापसी की राह पकड़ी। हफ्ते के दौरान यह 3,216 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत चढ़कर करीब 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर के मुताबिक, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में सोने की कीमतों को आगे भी सहारा मिलता रहने के आसार हैं।
चांदी में दिखी तेज छलांग
सोने से ज्यादा जोश इस बार चांदी में दिखा। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 13,938 रुपये यानी 6.2 प्रतिशत उछलकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने बताया कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और ज्यादा बिकवाली के स्तरों के बाद लौटी खरीदारी की वजह से इस हफ्ते सोने में सुधार आया। उनके अनुसार, इससे करीब एक महीने तक बने रहे कमजोर रुझान के बाद सर्राफा की कीमतों को उबरने में मदद मिली। त्रिवेदी ने आगे कहा कि महंगाई का दबाव घटने, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श की टिप्पणियों ने बाजार को अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर फिर से आकलन करने पर मजबूर कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
विदेशी बाजार में भी रुझान सोने के पक्ष में रहा। बीते हफ्ते कॉमेक्स गोल्ड वायदा 91 डॉलर यानी 2.2 प्रतिशत चढ़कर 4,187.30 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं चांदी 3.14 डॉलर यानी 5.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.81 डॉलर प्रति औंस पर जा पहुंची। प्रणव मेर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकने की कई नाकाम कोशिशों के बाद सोना शुरुआती गिरावट से उबर गया और सप्ताह के आखिर में सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ।
तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद ने दिया सहारा
रूस और यूक्रेन के बीच बढ़े नए तनाव ने भी सर्राफा की मांग को मजबूती दी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने मई महीने में अपने भंडार में कुल 41 टन सोना जोड़ा। जतीन त्रिवेदी का कहना है कि हाल के निचले स्तरों के पास सहारा मिलने के बाद सोने की कीमत अब स्थिर हो गई है। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि यह अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी बॉन्ड के प्रतिफल और आने वाले बड़े आर्थिक आंकड़ों में जरा से बदलाव के प्रति भी बेहद संवेदनशील बनी रहेगी।











