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ईरान ओमान जलमार्ग वार्ता से कच्चे तेल के दाम टूटे, भारतीय रुपये में तेजी के आसारबाज़ार
26 अग॰ 2026, 5:19 pm (1 घंटे पहले)· 2

ईरान ओमान जलमार्ग वार्ता से कच्चे तेल के दाम टूटे, भारतीय रुपये में तेजी के आसार

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के बीच गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की शुरुआत बढ़त के साथ होने की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के करीब 20 प्रतिशत हिस्से के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति हुई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक कमोडिटी बाजारों में तेल के दामों को नीचे खींचने का काम किया है, जिसका सीधा लाभ भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिलने की उम्मीद है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में कूटनीतिक हलचल और कच्चे तेल की चाल

ओमान और ईरान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक अस्थाई संयुक्त शिपिंग कॉरिडोर बनाने को लेकर रचनात्मक बातचीत हुई है। दोनों देश इस प्रमुख तेल परिवहन मार्ग के लिए एक स्थाई प्रशासनिक व्यवस्था बनाने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ओमान के विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि सुरक्षित मार्ग बहाल करने के व्यावहारिक उपायों की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने जलडमरूमध्य में माइन्स हटाने के अभियान पर भी चर्चा की है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के विपरीत दिखाई देता है जिसमें उन्होंने माइन्स पहले ही हटाए जाने की बात कही थी।

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क्षेत्रीय तनावों, जहाजों पर हुए हालिया हमलों और ईरान के साथ व्यापार करने वाली संस्थाओं पर अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनियों के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। ओमान ने स्पष्ट किया है कि शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता के लिए क्षेत्रीय भागीदारों के साथ बातचीत जारी रहेगी। इन सकारात्मक चर्चाओं के कारण मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 21 सितंबर को समाप्त होने वाला कच्चे तेल का वायदा अनुबंध 2.2 प्रतिशत टूटकर 7,660 रुपये प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। यह स्तर पिछले हफ्ते दर्ज किए गए महीने के उच्च स्तर 8,076 रुपये प्रति बैरल से 8.5 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुका है।

भारतीय रुपये पर कच्चे तेल और विदेशी प्रवाह का प्रभाव

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम घटते हैं, देश का आयात बिल कम होता है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। भारतीय रुपया बाह्य कारकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में होने के कारण कच्चे तेल के भाव, डॉलर सूचकांक की स्थिति और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) का प्रवाह रुपये की विनिमय दर तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी विनिमय दर को स्थिर रखने और व्यापार प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करता है। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ब्याज दरों के माध्यम से मुद्रास्फीति को अपने 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनाए रखने का प्रयास करता है। जब भारत में वास्तविक ब्याज दरें (मुद्रास्फीति घटाकर मिलने वाली ब्याज दर) अधिक होती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशक कैरी ट्रेड रणनीति अपनाते हैं। इसके तहत कम ब्याज दर वाले देशों से कर्ज लेकर उच्च ब्याज दर देने वाले देशों में निवेश किया जाता है, जिससे रुपये की मांग में वृद्धि होती है।

सकल घरेलू उत्पाद और मुद्रास्फीति का गणित

रुपये के मूल्य निर्धारण में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर, व्यापार संतुलन और मुद्रास्फीति जैसे समष्टि अर्थशास्त्र के आंकड़े निर्णायक साबित होते हैं। देश में मजबूत आर्थिक विकास दर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और अप्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करती है, जिससे रुपये को सहारा मिलता है। इसके विपरीत, यदि भारत में मुद्रास्फीति साथी देशों की तुलना में अधिक बनी रहती है, तो यह मुद्रा की क्रय शक्ति को कमजोर करती है और निर्यात को महंगा बनाती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति के जवाब में रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी बनती है, जो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित कर रुपये के लिए सकारात्मक माहौल तैयार कर सकती है।

वैश्विक मुद्रा बाजार, सोना और हाइपरलिक्विड की स्थिति

वैश्विक वित्तीय बाजारों में निवेशक अमेरिका के व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक के आंकड़ों और जैक्सन होल सिंपोजियम का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के भाषण पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यूरोपीय कारोबारी सत्र में ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) 1.3650 के नीचे मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, हालांकि यह हाल ही में बनाए गए छह महीने के उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। वहीं, यूरो (EUR/USD) भी मुनाफा वसूली और मध्य पूर्व की अनिश्चितता के कारण 1.1650 के स्तर के आसपास दबाव में रहा।

सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने की कीमतों में 0.75 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 4,620 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के करीब आ गई। इससे एक दिन पहले सोना 4,697 अमेरिकी डॉलर के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। दूसरी ओर, क्रिप्टो और वित्तीय बाजार मंच हाइपरलिक्विड (HYPE) में 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 83.30 अमेरिकी डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ता दिखा। हाइपरलिक्विड में संस्थागत मांग की मजबूती इस बात से झलकती है कि इसके एक्सचेंज ट्रेडड फंड्स (ETF) में पिछले दो दिनों से प्रतिदिन 50 लाख डॉलर से अधिक का निवेश आया है, जबकि मंच का दैनिक राजस्व पिछले सात दिनों से औसतन 27.5 लाख डॉलर से अधिक रहा है।

सवाल-जवाब

गुरुवार को भारतीय रुपये में तेजी की संभावना क्यों जताई जा रही है?
ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिली है।
कच्चे तेल की कीमतें कम होने से रुपये को कैसे फायदा होता है?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। तेल के दाम घटने से विदेशी मुद्रा का खर्च कम होता है और व्यापार घाटा नियंत्रित रहता है, जिससे रुपये की मांग बढ़ती है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान और ओमान के बीच क्या चर्चा हुई है?
दोनों देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक अस्थाई संयुक्त शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने और जलमार्ग से माइन्स हटाने के अभियानों पर सकारात्मक चर्चा की है।
एमसीएक्स (MCX) पर कच्चे तेल के दाम में कितनी गिरावट दर्ज की गई है?
एमसीएक्स पर सितंबर अनुबंध का कच्चा तेल 2.2 प्रतिशत घटकर 7,660 रुपये प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो पिछले सप्ताह के 8,076 रुपये के उच्चतम स्तर से 8.5 प्रतिशत से अधिक कम है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रुपये की कीमत को कैसे नियंत्रित करता है?
आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में प्रत्यक्ष डॉलर की खरीद-बिक्री करके और मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में बदलाव करके रुपये को स्थिर रखता है।
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