अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन नरमी का रुख बना हुआ है। मध्य पूर्व संकट को सुलझाने के लिए शुरू हुई कूटनीतिक कोशिशों के कारण बाजार से भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम कम हो रहा है। एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई का भाव गिरकर लगभग दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। शुक्रवार को दर्ज किए गए महीने के उच्चतम स्तर से शुरू हुई यह गिरावट अब 80.00 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ पहुंची है। भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तकनीकी संकेतकों के कमजोर पड़ने से आने वाले दिनों में कच्चे तेल पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
ईरान-अमेरिका वार्ता और भू-राजनीतिक तनाव में कमी
कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रगति को माना जा रहा है। ओमान के जरिए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए बातचीत दोबारा शुरू की है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल परिवहन करता है। इसके अलावा अमेरिका ने भी तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ईरान को नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने और वित्तीय प्रतिबंधों में राहत देने की पेशकश की है। इसके बदले अमेरिका ने मांग रखी है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह खोला जाए और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों द्वारा किए जा रहे हमलों पर तुरंत रोक लगाई जाए। इन घटनाक्रमों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है, जिससे व्यापारियों ने तेल की कीमतों में शामिल युद्ध प्रीमियम को घटाना शुरू कर दिया है।
तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर
बाजार के तकनीकी ढांचे को देखें तो यह मंदी का रुझान रखने वाले ट्रेडर्स के पक्ष में नजर आ रहा है। वर्तमान में कच्चे तेल का भाव 80.47 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद भाव 82.36 डॉलर था। इसमें 2.29 प्रतिशत की दैनिक गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान डब्ल्यूटीआई का न्यूनतम स्तर 54.98 डॉलर और अधिकतम स्तर 119.48 डॉलर रहा है। वर्तमान में ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.09 गुना है, जो सीमित कारोबारी गतिविधि को दर्शाता है।
तकनीकी स्तरों पर नजर डालें तो 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 80.26 डॉलर पर तत्काल प्रतिरोध बना हुआ है। अगर कीमत में सुधार की कोशिश होती है, तो इसे 81.90 डॉलर के 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर और 82.44 डॉलर पर स्थित 100-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) पर मजबूत बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है। यह क्षेत्र एक कड़ा सप्लाई बैंड बनाता है। इसके ऊपर 83.93 डॉलर का 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर और हालिया चक्र का उच्च स्तर 87.22 डॉलर के पास स्थित है।
दैनिक तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) 46 पर है, जो तटस्थ से कमजोर स्थिति की ओर इशारा करता है। MACD सूचकांक 0.83 पर है जबकि इसकी सिग्नल लाइन 0.97 पर है, जिसका हिस्टोग्राम -0.14 के साथ मंदी के संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय EMA 82.90 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 82.69 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 75.89 डॉलर पर स्थित है। दीर्घकालिक चार्ट पर 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है। बोलिंगर बैंड की सीमा 75.38 डॉलर से 89.15 डॉलर के बीच है जिसका मध्य स्तर 82.27 डॉलर है। पिवट बिंदु 80.62 डॉलर पर है, जबकि पहला रेजिस्टेंस R1 81.16 डॉलर और R2 81.85 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट S1 79.93 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 79.39 डॉलर पर देखा जा रहा है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज यानी ATR 3.59 डॉलर है जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल और कुशिंग हब की भूमिका
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बेचे जाने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई को बेंचमार्क माना जाता है। इसे हल्का (लाइट) और मीठा (स्वीट) क्रूड भी कहा जाता है। कम गुरुत्वाकर्षण घनत्व के कारण इसे हल्का और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे मीठा कहा जाता है। इन विशेषताओं की वजह से यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे गैसोलीन और डीजल में रिफाइन करना काफी आसान होता है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड मुख्य रूप से अमेरिका में उत्पादित किया जाता है। इसका भंडारण और वितरण ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग हब के माध्यम से होता है। कुशिंग को वैश्विक तेल उद्योग में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। कुशिंग हब में भंडारित तेल की मात्रा और वहां से होने वाली आपूर्ति सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई की दरों को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
मांग-आपूर्ति, ओपेक+ और अमेरिकी डॉलर का असर
किसी भी अन्य संपत्ति की तरह कच्चे तेल की कीमत भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के सिद्धांतों पर निर्भर करती है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि तेज होने पर औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे तेल की मांग और कीमतों में उछाल आता है। इसके विपरीत, वैश्विक मंदी या धीमी आर्थिक वृद्धि की स्थिति में मांग घटने से कीमतें गिरती हैं। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों को प्रभावित करते हैं।
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है। ओपेक सदस्य देश साल में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करते हैं। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है जिससे कीमतें बढ़ती हैं। जब उत्पादन बढ़ाया जाता है, तो आपूर्ति बढ़ने से कीमतें गिरती हैं। ओपेक+ इस समूह का एक विस्तृत रूप है, जिसमें रूस सहित 10 गैर-ओपेक देश शामिल हैं। इन देशों के फैसले अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं।
चूंकि कच्चे तेल का वैश्विक व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर का तेल कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए कच्चा तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। वहीं डॉलर मजबूत होने पर तेल खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट: एपीआई और ईआईए का महत्व
कच्चे तेल के कारोबारी अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी API और ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी EIA द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों पर पैनी नजर रखते हैं। ये रिपोर्ट अमेरिकी तेल भंडार में होने वाले बदलावों को दर्शाती हैं। यदि इन्वेंट्री में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, यदि तेल भंडार में बढ़ोतरी होती है, तो यह सुस्त मांग या अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देता है जिससे कीमतें नीचे आती हैं।
एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट बुधवार को सार्वजनिक करती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों रिपोर्टों के परिणाम 75 प्रतिशत मामलों में एक-दूसरे के 1 प्रतिशत के दायरे में होते हैं। हालांकि, ईआईए एक आधिकारिक सरकारी निकाय होने के कारण इसकी रिपोर्ट को वित्तीय बाजारों में अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जाता है।
व्यापक वित्तीय बाजार: फॉरेक्स और सोने का रुख
ऊर्जा बाजार के साथ-साथ व्यापक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) सोमवार की मंदी से उबरकर मामूली बढ़त दर्ज कर रहा है, हालांकि इसे 1.3650 के स्तर के पास मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी डॉलर पर बने हल्के बिकवाली के दबाव से पाउंड को सीमित समर्थन मिला है।
वहीं यूरो (EUR/USD) की जोड़ी वॉल स्ट्रीट के समापन के बाद 1.1670 के आसपास कारोबार कर रही है और 1.1700 के स्तर को हासिल करने की कोशिश में है। आने वाले समय में अमेरिका के कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी PCE मुद्रास्फीति आंकड़ों और दूसरी तिमाही के GDP संशोधनों पर निवेशकों की निगाहें टिकी रहेंगी। दूसरी ओर, सोने की कीमतें 4,650 डॉलर से नीचे के संक्षिप्त निचले स्तर से उबरकर 4,697 डॉलर प्रति औंस के 15-सप्ताह के उच्च स्तर की ओर बढ़ रही हैं। कमजोर डॉलर और आने वाले आर्थिक आंकड़ों से पहले निवेशकों की पुनर्संरचना से सोने की कीमतों को मजबूती मिल रही है।



















