असम के शिवसागर जिले में बीर लाचित सेना के वरिष्ठ नेता मानस ज्योति चेतिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद राज्य सरकार ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए हैं। चेतिया 23 अगस्त को बीहुबार (बीरुबोर) इलाके में एक सड़क के किनारे गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (AMCH) में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
उच्चस्तरीय पुलिस अधिकारियों की तैनाती और फॉरेंसिक जांच
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कड़े निर्देशों के बाद असम पुलिस ने मामले की छानबीन तेज कर दी है। असम के डीजीपी हरमीत सिंह ने बताया कि जांच की निगरानी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। आईजीपी (ईस्टर्न रेंज) केजे सैकिया और डीआईजी (एपी हेडक्वार्टर्स) डॉ रोबिन कुमार गुवाहाटी से फॉरेंसिक टीम के साथ शिवसागर के बीहुबार पहुंचे हैं, ताकि घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।
इस पूरे मामले में बीहुबार पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 3(5) के तहत केस संख्या 10/26 दर्ज किया गया है। शिवसागर की एसएसपी पापोरी चेतिया (APS) खुद जमीन पर उतरकर इस जांच का नेतृत्व कर रही हैं। घटना के संदर्भ में डीजीपी असम पुलिस ने X पर लिखा कि पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप मानस ज्योति चेतिया की मृत्यु से जुड़ी हर एक सच्चाई को सामने लाने के लिए गंभीर कदम उठा रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों का खुलासा
मानस ज्योति चेतिया का पोस्टमार्टम कराने के बाद आई शुरुआती रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर के पिछले हिस्से में बेहद गंभीर चोट लगी थी, जो उनकी मौत का मुख्य कारण बनी। 23 अगस्त को सड़क किनारे अचेत मिलने के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें डिब्रूगढ़ स्थित अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार को उनकी जीवन लीला समाप्त हो गई।
बीर लाचित सेना के गंभीर आरोप और आंदोलन की चेतावनी
दूसरी ओर, बीर लाचित सेना ने इस घटना को एक प्रायोजित हमला करार दिया है। संगठन का दावा है कि चेतिया पर जानबूझकर जानलेवा हमला किया गया था। इस सिलसिले में संगठन की ओर से पुलिस को 10 लोगों के नाम सौंपते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। संगठन के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में आई बाढ़ के दौरान बीहुबार इलाके में कई संदिग्ध लोग दाखिल हुए थे, जिनमें बांग्लादेशी मुस्लिम भी शामिल हो सकते हैं। संगठन ने मांग की है कि पुलिस इस कोण से भी जांच करे।
बीर लाचित सेना के प्रमुख नेता शृंखल चालिहा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एफआईआर में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय पुलिस उन्हें संरक्षण दे रही है। चालिहा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नामजद लोगों के खिलाफ तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए और उन्हें पकड़ा नहीं गया, तो उनका संगठन राज्यभर में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा।





















