अमेरिकी महंगाई के उम्मीद से नरम आंकड़ों ने डॉलर को नीचे धकेला, जिसके बाद USD/THB में गिरावट आई, लेकिन यह करेंसी जोड़ी बहुत जल्दी वापस अपने स्तर पर लौट आई। इससे साफ है कि थाई बात की मजबूती में ज्यादा दम नहीं बचा है। ओसीबीसी के विश्लेषक सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग का कहना है कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम, पर्यटन में असमान रिकवरी और बैंक ऑफ थाईलैंड की ओर से बात की व्यवस्थित कमजोरी को स्वीकार करने के रुख को देखते हुए, कारोबारियों के लिए 33.40 से 33.20 के आसपास गिरावट पर USD/THB खरीदना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
डॉलर क्यों फिसला और बात क्यों नहीं टिक पाया
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े आने के बाद डॉलर में जो गिरावट आई, उसने USD/THB को नीचे की ओर खींचा। लेकिन न्यूयॉर्क सत्र आते-आते यह गिरावट काफी हद तक वापस पलट गई। इसका सीधा मतलब यह है कि बात की बढ़त लंबी नहीं चल पाई और उसमें आगे बढ़ने की कोई मजबूत रफ्तार नहीं दिखी। विश्लेषकों की नजर में इसकी दो बड़ी वजहें हैं, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और पर्यटन क्षेत्र की असमान रिकवरी। थाईलैंड एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए जब कच्चा तेल महंगा रहता है तो देश को उसके भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं, जिससे स्थानीय करेंसी पर दबाव बना रहता है। वहीं पर्यटन थाईलैंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जब तक यह पूरी रफ्तार से नहीं लौटता, बात को टिकाऊ सहारा मिलना मुश्किल है।
कमजोर बात से बेफिक्र दिखता केंद्रीय बैंक
बैंक ऑफ थाईलैंड के गवर्नर विताई रतनाकोर्न की हालिया टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि बात की व्यवस्थित कमजोरी को लेकर केंद्रीय बैंक को फिलहाल कोई तत्काल परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक करेंसी में हाल की हलचल मोटे तौर पर व्यापक बाजार के रुझानों के अनुरूप ही है। गवर्नर ने यह भी दोहराया कि बात की कमजोरी थाईलैंड के निर्यात और पर्यटन दोनों को सहारा देती है, क्योंकि कमजोर करेंसी से देश का सामान और यहां घूमने आना विदेशियों के लिए सस्ता पड़ता है। इससे यह अंदाजा लगता है कि नीति के स्तर पर एक हद तक कमजोरी को स्वीकार किया जा रहा है। हालांकि माना जा रहा है कि अगर उतार-चढ़ाव जरूरत से ज्यादा तेज हुआ, तो वह फिर भी अधिकारियों का ध्यान खींच सकता है।
आगे किस दिशा में जा सकता है USD/THB
नजदीकी समय में अगर डॉलर की कमजोरी आगे भी बनी रहती है, तो बात दूसरी एशियाई करेंसियों के साथ मिलकर कुछ रिकवरी कर सकता है। लेकिन इसकी बढ़त की रफ्तार बाकी एशियाई करेंसियों से पीछे रह सकती है, खासकर तब जब तेल के दाम ऊंचे बने रहें। मौजूदा हालात में USD/THB करीब 33.50 के स्तर पर देखा गया है। कुल मिलाकर विश्लेषकों का नजरिया साफ है कि जब तक ये ढांचागत दबाव बने हुए हैं, बात की किसी भी तेजी को बेचने का नहीं, बल्कि गिरावट पर डॉलर खरीदने का मौका माना जाना चाहिए।
वे महंगाई के आंकड़े जिन्होंने बाजार का मूड बदला
अमेरिका के थोक महंगाई के ताजा आंकड़े उम्मीद से नरम रहने के बाद बुधवार को बिटकॉइन 65,000 डॉलर के स्तर के पार चला गया। थोक महंगाई यानी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) जून में पिछले महीने के मुकाबले 0.3% गिरा, जो अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। सालाना आधार पर हेडलाइन PPI घटकर 5.5% रह गया, जो अर्थशास्त्रियों के 6.2% के अनुमान से कम है।
इसी तरह जून का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महीने के आधार पर 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद की सबसे बड़ी एक महीने की गिरावट है। इसने सालाना दर को मई के 4.2% से घटाकर 3.5% पर ला दिया और लगातार तीन महीने से चली आ रही तेजी की कड़ी को तोड़ दिया। कोर यानी बुनियादी कीमतें महीने के दौरान लगभग जस की तस रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% पर आ गईं, ये दोनों ही आंकड़े अनुमान से नीचे रहे।
कारोबारियों के लिए क्या मायने
यह पूरी तस्वीर बताती है कि भले ही अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों से डॉलर पर कुछ दबाव आया हो और जोखिम वाले असेट्स में जान लौटी हो, लेकिन थाई बात के लिए हालात अलग हैं। ऊंचे तेल के दाम और पर्यटन की धीमी रिकवरी जैसे ढांचागत कारण बात की तेजी पर लगाम लगाए हुए हैं, और केंद्रीय बैंक भी इस कमजोरी से असहज नहीं दिख रहा। ऐसे में विश्लेषकों की रणनीति सीधी है, बात की हर उछाल को सीमित मानते हुए 33.40 से 33.20 के दायरे में आने वाली गिरावट पर USD/THB में खरीदारी की जाए।











