अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि ईरान के ठिकानों पर संभावित सैन्य हमले काफी सीमित दायरे में रखे जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति और उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने इस बात पर गंभीरता से विचार किया है कि होर्मुज क्षेत्र में चुनिंदा और सीमित हमले किए जाएं ताकि तेहरान को अपनी मिसाइल और रडार क्षमताओं को दोबारा मजबूत करने से रोका जा सके। इन क्षमताओं का इस्तेमाल अक्सर जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और नौसेना की सुरक्षा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में बेहद मजबूत और सुरक्षित स्थिति में बना हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण मार्ग से तेल की भारी मात्रा लगातार बाहर आ रही है। इसके अलावा, हालिया रात के दौरान अमेरिकी नौसेना के सहयोग और सुरक्षा escort के साथ कई मालवाहक जहाज इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से हर रात औसतन 30 जहाजों की आवाजाही दर्ज की जा रही है। युद्ध संबंधी एक अन्य टिप्पणी में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जो आवश्यक कदम लगते हैं, वे उठाने ही होंगे और साथ ही वर्तमान में ब्याज दरें काफी ज्यादा बनी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन में निरंतर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। हालिया कारोबारी सत्रों के दौरान, प्रमुख मुद्राओं के साथ तुलना करने पर अमेरिकी डॉलर सबसे अधिक मजबूत स्थिति में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले नजर आया। विदेशी मुद्रा बाजार की विनिमय दरों को दर्शाने वाले हीट मैप से यह स्पष्ट होता है कि बेस करेंसी और कोट करेंसी के बीच का आपसी उतार-चढ़ाव किस प्रकार वैश्विक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहा है। उदाहरण के लिए, जब अमेरिकी डॉलर को बाईं ओर रखकर येन के साथ उसकी तुलना की जाती है, तो दोनों के बीच का प्रतिशत बदलाव स्पष्ट रूप से सामने आता है।
वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का माहौल
वैश्विक वित्तीय शब्दावली में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ वे दो प्रमुख स्थितियां हैं जो यह तय करती हैं कि निवेशक किसी खास अवधि में कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। रिस्क-ऑन बाजार वह स्थिति है जहां निवेशकों का भविष्य को लेकर दृष्टिकोण सकारात्मक होता है और वे अधिक मुनाफा कमाने की उम्मीद में जोखिम भरे परिसंपत्तियों में निवेश करने के लिए उत्सुक रहते हैं। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ बाजार में निवेशक भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं और अपनी पूंजी सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख करते हैं, भले ही उन पर मिलने वाला रिटर्न अपेक्षाकृत कम क्यों न हो।
रिस्क-ऑन के दौर में आमतौर पर शेयर बाजारों में तेजी आती है, सोने को छोड़कर लगभग सभी जिंसों की कीमतों में बढ़त दर्ज की जाती है, और जिन देशों की अर्थव्यवस्थाएं बड़े पैमाने पर कमोडिटीज के निर्यात पर निर्भर हैं, उनकी मुद्राएं मजबूत होती हैं। साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी देखने को मिलती है। इसके विपरीत, जब बाजार रिस्क-ऑफ के चरण में प्रवेश करता है, तो सरकारी बॉन्ड की कीमतें ऊपर जाती हैं, सोने की चमक बढ़ जाती है, और जापानी येन, स्विस फ्रैंक तथा अमेरिकी डॉलर जैसी सेफ-हेवन मुद्राएं खासी मजबूत होती हैं।
प्रमुख वैश्विक मुद्राएं और जिंस बाजार की स्थिति
कमोडिटी निर्यात पर अत्यधिक निर्भर रहने वाली अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कैनेडियन डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर और दक्षिण अफ्रीकी रैंड आमतौर पर रिस्क-ऑन के माहौल में मजबूत होती हैं, क्योंकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से कच्चे माल की मांग बढ़ने की उम्मीद की जाती है। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के समय अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक में निवेश बढ़ता है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण अमेरिकी ट्रेजरी डेट को सबसे सुरक्षित माना जाता है, जिससे डॉलर को संकट के समय मुख्य सहारा मिलता है।
विदेशी मुद्रा और वैश्विक व्यापक बाजारों के विश्लेषकों का मानना है कि इन तमाम आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों का असर सीधे तौर पर प्रमुख करेंसी जोड़ियों पर पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, GBP/USD जोड़ी हालिया तीन दिनों की गिरावट से उबरते हुए 1.3550 के दायरे के आसपास कारोबार कर रही है। ग्रीनबैक में आई हालिया कमजोरी के कारण पाउंड और अन्य रिस्क एसेट्स को अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में मदद मिली है, जबकि निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दरों की दिशा पर टिकी हुई हैं।
यूरो, सोना और क्रिप्टोकरेंसी का हालिया रुझान
दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी ने भी बढ़त हासिल करते हुए 1.1600 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर लिया है। अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ने से इस जोड़ी को रिकवरी का मौका मिला है, खासकर ऐसे समय में जब सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में शुक्रवार की भारी गिरावट के बाद थोड़ा सुधार देखा गया है और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के निचले स्तर से थोड़ा ऊपर संभलने में कामयाब रहा है, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण बुल फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 78,000 डॉलर के ऊपर अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है, जबकि निवेशक जल्द ही इसके 80,000 डॉलर के आंकड़े को छूने की उम्मीद कर रहे हैं। एथेरियम भी 2,400 डॉलर के ऊपर टिककर तकनीकी रूप से मजबूत स्थिति प्रदर्शित कर रहा है, और रिपल 1.37 डॉलर के आसपास रिकवरी के शुरुआती संकेत दे रहा है।
डीजल बाजार में रिकॉर्ड उछाल
भले ही तेल बाजार कुछ महीनों पहले की तुलना में शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल की कीमतें एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड के बीच का प्रीमियम, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है और इसने 102.00 डॉलर से ऊपर का intraday रिकॉर्ड स्तर छू लिया है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इन पन्नों पर दी गई सभी जानकारियां भविष्य की संभावनाओं पर आधारित हैं जिनमें जोखिम और अनिश्चितताएं शामिल हैं। यहां उल्लिखित बाजार और वित्तीय उपकरण केवल सूचना के उद्देश्य से हैं और इन्हें किसी भी प्रकार की खरीद या बिक्री की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपनी स्वतंत्र रूप से गहन जांच-पड़ताल अवश्य करनी चाहिए।


















