लेबनानी अधिकारियों ने अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल में वरिष्ठ सैन्य कमांडर रहे मेजर जनरल आदिल ईसा को औपचारिक रूप से सीरिया के हवाले कर दिया है। दिसंबर 2024 में असद सरकार के पतन के बाद से लेबनान द्वारा सीरिया को किया गया यह किसी उच्च स्तरीय सैन्य अधिकारी का पहला प्रत्यर्पण है। 67 वर्षीय आदिल ईसा को 8 अगस्त को बेरूत स्थित सीरियाई दूतावास में कागजी कार्रवाई पूरी करने के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद बुधवार को उन्हें सीरियाई अधिकारियों की हिरासत में सौंप दिया गया।
देर एज़-ज़ोर में लगे गंभीर आरोपों का विवरण
मेजर जनरल आदिल ईसा पर सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान कई गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। सीरिया के गृह मंत्रालय के अनुसार, ईसा वर्ष 2016 तक पूर्वी प्रांत देर एज़-ज़ोर में ज़मीनी सैन्य बलों का नेतृत्व कर रहे थे। दमिश्क द्वारा जारी आधिकारिक आरोपों की सूची में उन पर हत्या, हिरासत में प्रताड़ना के जरिए जान लेने और नागरिक युद्ध तथा सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किए गए आक्रामक अपराधों के आरोप शामिल हैं।
बेरूत में अपनी गिरफ्तारी के दौरान ईसा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उनका मामला दमिश्क में एक रिफरल जज के समक्ष पेश किया जाएगा। यह न्यायिक अधिकारी मामले के सबूतों और तथ्यों की समीक्षा करेंगे, जिसके आधार पर यह तय होगा कि इस केस को औपचारिक आपराधिक अदालत में सुनवाई के लिए भेजा जाए या नहीं।
1951 की द्विपक्षीय संधि और राजनयिक दबाव
आदिल ईसा को सीरिया भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच दशकों पहले हुए एक कानूनी समझौते के तहत किया गया है। वर्ष 1951 में सीरिया और लेबनान के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। यह ऐतिहासिक समझौता दोनों पड़ोसी देशों के बीच अपराधियों और आरोपियों के हस्तांतरण का कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
ईसा का यह हस्तांतरण सीरिया के नए प्रशासन द्वारा लेबनानी सरकार पर बनाए जा रहे निरंतर राजनयिक दबाव का परिणाम है। दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य और सुरक्षा अधिकारी सीमा पार करके लेबनान भाग गए थे। दमिश्क की नई सरकार इन अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए लेबनान पर दबाव बना रही थी। इसी कड़ी में जनवरी के महीने में सीरिया ने लेबनानी अधिकारियों को 200 से अधिक पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की एक आधिकारिक सूची सौंपी थी, जिनकी अभियोजन के लिए प्रत्यर्पण की मांग की गई थी।
असद शासन के अधिकारियों पर व्यापक कानूनी शिकंजा
राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में सीरिया की नई सरकार ने गृहयुद्ध के दौरान हुए अत्याचारों के लिए जिम्मेदार पूर्व अधिकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इस कानूनी मुहिम का उद्देश्य उस संघर्ष में जवाबदेही तय करना है, जिसमें एक दशक से अधिक समय में 5 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
इसी महीने दमिश्क की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके भाई माहेर अल-असद को उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। दिसंबर 2024 में जब अहमद अल-शरा के बलों ने राजधानी दमिश्क पर कब्ज़ा किया था, तब दोनों भाई सीरिया छोड़कर मॉस्को भाग गए थे। वहीं, असद परिवार के अन्य प्रभावशाली सदस्यों को सीरिया के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया गया है। बशर अल-असद के चचेरे भाई वसीम अल-असद और आतिफ नजीब को सीरिया में हिरासत में लेकर अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।
सीरियाई संघर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ और भावी दिशा
सीरिया में वर्षों से चला आ रहा गृहयुद्ध दिसंबर 2024 में उस समय समाप्त हुआ जब विद्रोही गुटों ने राजधानी दमिश्क पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया। इस घटनाक्रम के साथ ही असद परिवार के दशकों पुराने शासन का अंत हो गया और सेना के शीर्ष अधिकारियों का पड़ोसी देशों में शरण लेने का सिलसिला शुरू हुआ।
मेजर जनरल आदिल ईसा के प्रत्यर्पण से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सीरिया का नया नेतृत्व पूर्व सैन्य अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनी समझौतों के जरिए वापस लाने के लिए कटिबद्ध है। दमिश्क में रिफरल जज के सामने ईसा की पेशी के साथ ही कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि जनवरी में सौंपी गई 200 अधिकारियों की सूची में शामिल अन्य लोगों को भी लेबनान से वापस लाया जाता है या नहीं।



















