अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्य पूर्व दूत जारेड कुश्नर ने अमरीका समर्थित गाजा शांति योजना को लागू कराने के मकसद से हमास के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण बैठक की है। यह उच्च स्तरीय बातचीत मिस्र में आयोजित की गई, जहां कुश्नर ने हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से सीधे संवाद किया। पिछले वर्ष गाजा पट्टी में युद्धविराम समझौते पर सहमति बनने के बाद से दोनों पक्षों के बीच इस स्तर की यह पहली सीधी और औपचारिक मुलाकात मानी जा रही है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त करने और एक स्थायी शांति तंत्र स्थापित करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाना है।
मिस्र में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की मौजूदगी और बातचीत के मुख्य बिंदु
रविवार को मिस्र की राजधानी में आयोजित इस बैठक में केवल अमरीकी दूत ही शामिल नहीं थे, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मध्यस्थ भी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस के वरिष्ठ दूत निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी इस बातचीत में सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके अतिरिक्त, गाजा शांति वार्ता में लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे मिस्र, कतर और तुर्की के प्रतिनिधियों ने भी इस प्रक्रिया में अपना सहयोग दिया।
हालांकि इस महत्वपूर्ण बैठक के संबंध में कोई आधिकारिक संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जानकारी के अनुसार वार्ता मुख्य रूप से तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही। इनमें हमास के हथियारों को पूरी तरह से निष्क्रिय या निसंतान करने की प्रक्रिया, गाजा पट्टी के विभिन्न इलाकों से इजराइली सैन्य टुकड़ियों की वापसी और युद्ध से प्रभावित नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता सामग्री पहुंचाना शामिल था। मिस्र प्रवास के दौरान जारेड कुश्नर ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से भी अलग से मुलाकात की, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति योजना के क्रियान्वयन पर रणनीतिक चर्चा की जा सके।
नेतन्याहू का कड़ा रुख और 15 सूत्री प्रस्ताव की अस्वीकृति
अमरीका द्वारा तैयार की गई इस शांति योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती इजराइल का वर्तमान रुख बनी हुई है। इजराइली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जारेड कुश्नर, निकोले म्लादेनोव और टोनी ब्लेयर का सोमवार को इजराइल जाने का कार्यक्रम है, जहां वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करके ट्रंप की शांति योजना को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। हालांकि, नेतन्याहू ने किसी भी समझौते को स्वीकार करने से पहले हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण की शर्त को अनिवार्य बना दिया है।
इजराइली प्रधानमंत्री ने अपने निकटतम सहयोगी अमरीका के रुख के विपरीत जाते हुए पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि इजराइल बोर्ड ऑफ पीस के 15 सूत्री गाजा दस्तावेज को स्वीकार नहीं करता है। अपनी नीति को दोहराते हुए नेतन्याहू ने कहा, "आईडीएफ तब तक कोई वापसी नहीं करेगा जब तक कि हमास को वास्तविक रूप से निशस्त्र न कर दिया जाए।" इजराइल के इस सख्त रवैये ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमरीकी प्रशासन के प्रयासों के सामने एक बड़ा गतिरोध पैदा कर दिया है।
आठ मुस्लिम राष्ट्रों की कड़ी प्रतिक्रिया और कूटनीतिक तनाव
इजराइल द्वारा अमरीका समर्थित शांति दस्तावेज को खारिज किए जाने के बाद मुस्लिम बहुल देशों में तीव्र असंतोष देखा जा रहा है। रविवार को आठ प्रमुख मुस्लिम देशों मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान और इंडोनेशिया ने एक अभूतपूर्व संयुक्त बयान जारी किया। इन देशों ने इजराइल के इस रुख की कड़े शब्दों में निंदा की और चेतावनी दी कि इजराइल की अस्वीकृति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए किए जा रहे गंभीर प्रयासों को सीधे तौर पर खतरे में डालती है।
उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस नामक संगठन की अध्यक्षता करते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना मूल रूप से गाजा में शांति स्थापित करने के लिए की गई थी, लेकिन बाद में इसके दायरे का विस्तार करते हुए दुनिया भर के अन्य वैश्विक संघर्षों को भी इसके तहत शामिल कर लिया गया। आठ देशों का मानना है कि इजराइल का अड़ियल रुख पूरे मध्य पूर्व में शांति की संभावनाओं को कमजोर कर रहा है।
युद्ध का भयावह मानवीय असर और गाजा में जमीनी हकीकत
गाजा पट्टी में गत वर्ष 10 अक्टूबर को लागू हुआ युद्धविराम आधिकारिक तौर पर अब भी प्रभावी माना जा रहा है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। इजराइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने इस अवधि के दौरान गाजा में कई हवाई और जमीनी हमले किए हैं। हाल ही में गाजा के खान यूनिस और नुसीरात क्षेत्रों में संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां इजराइल ने हमास पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इस पूरे संघर्ष की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी, जब हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इजराइल पर बड़ा हमला किया गया था। उस हमले में लगभग 1,200 लोगों की जान चली गई थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी विश्वसनीय माना जाता है, इस युद्ध में अब तक 73,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 19 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो गाजा की कुल आबादी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है।



















