चंद्रपुर के लालपेठ इलाके में मंगलवार, 8 सितंबर को होने वाला शिवलिंग जीर्णोद्धार समारोह उद्घाटन से ठीक पहले पुरातत्व विभाग की आपत्ति की वजह से सुर्खियों में आ गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की मौजूदगी में होने वाले इस आयोजन से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित स्मारक के पास हुए निर्माण को अवैध करार दिया है.
निरीक्षण में क्या मिला
नियमित जांच के दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को शिवलिंग के इर्द-गिर्द ग्रेनाइट की फर्श बिछी मिली, साथ ही परिसर में सीमेंट ईंटों से बनी दीवार और पक्की छत वाला शेड भी नजर आया. विभाग का कहना है कि यह सारा काम राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के प्रतिबंधित दायरे में हुआ है और इसी वजह से इस पर गंभीर आपत्ति जताई गई है. इसी आधार पर “लालपेठ विशाल शिवलिंग मंदिर सेवा समिति” के अध्यक्ष को पत्र भेजकर काम फौरन रोकने और कथित अतिक्रमण हटाने को कहा गया है.
100 मीटर की सीमा इतनी सख्त क्यों
लालपेठ का यह विशाल पत्थर, जिसे आधिकारिक रूप से ‘एकाश्म, चंद्रपुर’ कहा जाता है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है. पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के मुताबिक किसी भी संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर तक का इलाका पूरी तरह निर्माण-मुक्त रखा जाना चाहिए, यहां कोई भी नया ढांचा खड़ा करने की इजाजत नहीं होती. इसके आगे 100 से 300 मीटर तक का हिस्सा नियंत्रित क्षेत्र माना जाता है, जहां निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण से पहले मंजूरी लेना जरूरी होता है. लालपेठ में बना शेड, दीवार और ग्रेनाइट की फर्श ठीक इसी पहले, पूरी तरह निर्माण-मुक्त दायरे में आते नजर आ रहे हैं, इसीलिए यह मामला जांच के घेरे में आ गया.
विधायक की स्वनिधि और अनुमति पर सवाल
सामने आई जानकारी के मुताबिक इस निर्माण के लिए स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने अपनी स्वनिधि से पैसा दिया था. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में यह काम शुरू करने से पहले किसी ने पुरातत्व विभाग से मंजूरी ली थी या नहीं. यही अनुत्तरित सवाल एक धार्मिक जीर्णोद्धार कार्यक्रम को ऐन मौके पर विवाद में बदल गया है, और यही तय करेगा कि यह निर्माण आगे बचेगा भी या नहीं.
जुर्माना, सजा और पुलिस शिकायत की तैयारी
पुरातत्व विभाग की नोटिस में कहा गया है कि नियमित निरीक्षण के दौरान ‘लालपेठ एकाश्म, चंद्रपुर’ के प्रतिबंधित इलाके में बिना अनुमति निर्माण होने की बात सामने आई. नोटिस में पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम की धारा 20(ए) का हवाला देकर इसे स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है. नियम तोड़ने पर दो साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है, और समिति को निर्माण हटाकर जगह को पहले जैसी हालत में लाने का निर्देश भी दिया गया है. इसके अलावा लोक आंदोलन न्यास के जिलाध्यक्ष नितिन बन्सोड ने भी इसी मामले में पुरातत्व विभाग से शिकायत की है, और विभाग मंदिर समिति अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में बताया जा रहा है. शिकायत दर्ज होते ही मामला महज प्रशासनिक चेतावनी से आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई का रूप ले सकता है, जो महीनों तक खिंच सकती है.
विवाद के बीच जारी हैं समारोह की तैयारियां
इस पूरे विवाद का असर फिलहाल जमीनी तैयारियों पर पड़ता नहीं दिख रहा. मंगलवार के उद्घाटन से पहले शहर भर में अमृता फडणवीस की मौजूदगी वाले बैनर लग चुके हैं और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं. यह देखना बाकी है कि पुरातत्व विभाग की आपत्ति के बावजूद समारोह तय समय पर होता है या प्रशासन निर्माण की वैधता साफ होने तक कोई कदम उठाता है, और चंद्रपुर के लोग भी इसी उधेड़बुन में हैं.



















