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मोमासर बास में विधायक सारस्वत को युवाओं ने घेरा, सड़क-पानी के सवालों पर मचा बवालराजस्थान
8 सित॰ 2026, 9:25 am (1 घंटे पहले)· 2

मोमासर बास में विधायक सारस्वत को युवाओं ने घेरा, सड़क-पानी के सवालों पर मचा बवाल

बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में मोमासर बास स्थित विधायक ताराचंद सारस्वत की चुनावी सभा में युवाओं के सवाल-जवाब के बाद हंगामा मच गया, पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत कराया.

बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मोमासर बास गांव में विधायक ताराचंद सारस्वत की चुनावी सभा उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब मौजूद युवाओं ने विकास कार्यों और स्थानीय दिक्कतों को लेकर सीधे सवाल पूछने शुरू कर दिए. राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर प्रचार अभियान जोरों पर चल रहा है और इसी कड़ी में विधायक सारस्वत मोमासर बास में जनसभा कर रहे थे.

जानकारी के मुताबिक, सभा के दौरान विधायक सारस्वत क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का ब्योरा दे रहे थे और सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे. इसी बीच वहां मौजूद कुछ वार्डवासियों और युवाओं ने बीच में टोकते हुए स्थानीय समस्याओं पर जवाब मांगना शुरू कर दिया. देखते ही देखते सवाल-जवाब का यह सिलसिला गरमागरम बहस में बदल गया और कार्यक्रम में हंगामे जैसी स्थिति बन गई.

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सड़क, पानी और सफाई पर उठे सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया जा रहा है कि युवाओं ने मुख्य रूप से क्षेत्र की सड़कों, पानी की सप्लाई और सफाई व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतों को लेकर विधायक से जवाब मांगा. हालांकि इन समस्याओं की बारीक जानकारी अब तक सामने नहीं आई है. युवाओं का कहना था कि चुनाव के वक्त ही सही, जनप्रतिनिधियों से आम लोगों की परेशानियों और अधूरे विकास कार्यों पर सीधा जवाब लिया जाना चाहिए. इसी हंगामे के बीच कुछ लोगों की तरफ से बीजेपी मुर्दाबाद के नारे भी लगाए जाने की बात सामने आई है.

पुलिस पहुंची, मामला शांत कराया

कार्यक्रम स्थल पर हंगामा बढ़ने की खबर मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई. पुलिसकर्मियों ने वहां मौजूद स्थानीय लोगों और कार्यक्रम में शामिल लोगों से बातचीत कर स्थिति को काबू में किया. पुलिस की मौजूदगी के बाद माहौल शांत हुआ और तनाव धीरे-धीरे कम होता गया. राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी बड़े विवाद, झड़प या अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई.

चुनाव प्रचार के बीच बढ़ी सियासी हलचल

श्रीडूंगरगढ़ में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं. अलग-अलग वार्डों के प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदाताओं से सीधा संपर्क कर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में जुटे हैं. ऐसे माहौल में किसी जनप्रतिनिधि की सभा में स्थानीय लोगों की ओर से सीधे सवाल उठाया जाना और उसके बाद हंगामा होना, चुनावी माहौल को और गरमा गया है. विधायक सारस्वत के कार्यक्रम में हुई इस घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि हंगामे के दौरान किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं. पुलिस ने मामले को समय रहते शांत करा दिया, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
यह घटना बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मोमासर बास गांव में हुई.
हंगामा किसके कार्यक्रम में हुआ?
यह हंगामा विधायक ताराचंद सारस्वत की चुनावी सभा के दौरान हुआ.
युवाओं ने किन मुद्दों पर सवाल पूछे?
युवाओं ने मुख्य रूप से सड़क, पानी की सप्लाई और सफाई व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर सवाल पूछे.
क्या हंगामे के दौरान कोई नारेबाजी हुई?
हां, हंगामे के बीच कुछ लोगों की ओर से बीजेपी मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने की बात सामने आई है.
स्थिति को किसने नियंत्रण में किया?
मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया.
क्या इस मामले में कोई लिखित शिकायत दर्ज हुई?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी पक्ष की ओर से पुलिस में लिखित शिकायत दी गई है या नहीं.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

निकाय चुनाव के दौरान इस तरह की जनसभाओं में स्थानीय मुद्दों का मुखर होना यह संकेत देता है कि मतदाता अब पारंपरिक प्रचार से आगे बढ़कर सीधे जवाबदेही चाहते हैं। सड़क, पानी और सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों पर विधायक को घेरना यह बताता है कि जमीनी स्तर पर असंतोष गहरा रहा है। पुलिस के हस्तक्षेप से तत्काल मामला भले ही शांत हो गया हो, लेकिन आने वाले दिनों में विपक्षी दल इस घटना को चुनावी मुद्दा बना सकते हैं जिससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने की पूरी संभावना है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

एक क्राइम और कानून-व्यवस्था के रिपोर्टर के रूप में मेरा आकलन है कि हालांकि पुलिस ने समय पर हस्तक्षेप कर के किसी बड़ी झड़प को टाल दिया, लेकिन राजनीतिक आयोजनों में इस प्रकार का बढ़ता आक्रोश सुरक्षा प्रबंधन के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। जब जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद तीखी बहस और नारेबाजी तक पहुँचता है, तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। आने वाले दिनों में स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस बल को चुनावी रैलियों में इस तरह के अप्रत्याशित विरोध से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

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